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सही वक्त

इसके बावजूद 1400 बरसों से इस कुप्रथा को जारी रखना मुसलिम महिलाओं पर हुई ज्यादती को बयान करने के लिए काफी है।
Author September 4, 2017 01:32 am
प्रतिकात्मक तस्वीर।

सही वक्त
सुप्रीम कोर्ट का तलाक-ए-बिद्दत को निरस्त करना महज एक प्रथा के अंत की ओर संकेत नहीं करता बल्कि यह पितृसत्तात्मक मानसिकता पर भी कड़ी चोट है। अब न केवल मुसलिम, बल्कि तमाम भारतीय महिलाओं में शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का हौसला बुलंद होगा। हैरानी की बात है कि तीन तलाक का कुरान में जिक्र तक नहीं है और खुद पैगंबर साहब इसे नाजायज मानते थे। इसके बावजूद 1400 बरसों से इस कुप्रथा को जारी रखना मुसलिम महिलाओं पर हुई ज्यादती को बयान करने के लिए काफी है। अब क्योंकि लैंगिक न्याय की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला दिया है तो यही सही वक्त है जब मातृशक्ति को तमाम हक दिलाने के लिए समाज कृतसंकल्प हो।
’नीरज मानिकटाहला, यमुनानगर
चंदे का रिकार्ड
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार का अगला कदम राजनीतिक चंदे को पारदर्शी बनाना है। राजनीतिक चंदे को लेकर हमेशा आरोप लगता रहा है कि सरकारें कारपोरेट घरानों से चंदे के रूप में मोटी रकम लेती हैं और उसका विवरण भी नहीं देतीं। जेटली ने आम बजट में राजनीतिक दलों के लिए 2000 रुपए से अधिक चंदे का ब्योरा सार्वजनिक करने और चुनाव फंडिंग में पारदर्शिता लाने के लिए चुनावी बांड जारी करने का ऐलान भी किया था लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।
इस बयान के बरक्स एसोसिएशन आफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट कई सवाल खड़े करती है। राजनीतिक चंदे को लेकर एडीआर ने पिछले दिनों जारी रिपोर्ट में दावा किया कि विगत चार वर्षों में सबसे ज्यादा 705.81 करोड़ रुपए राजनीतिक चंदे के रूप में भाजपा को मिले, जबकि दूसरे स्थान पर कांग्रेस रही। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भाजपा ने बड़ी तादाद में रकम बिना आधार और पैन नंबर पूछे लिए। अपनी पार्टी के ऐसे रिकार्ड के बाद भी अगर जेटली राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने की बात कर रहे हैं तो सोचने वाली बात है!
’नीरज कुमार यादव, इलाहाबाद

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