April 28, 2017

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मुफ्त का जहर

सुप्रीम कोर्ट ने एक फरमान सुनाया कि एक अप्रैल 2017 से बीएस- 3 वाहनों की बिक्री बंद हो जाएगी ताकि प्रदूषण की मार झेलते ‘हम बिचारे’ लोगों को कुछ तो राहत मिले।

Author April 11, 2017 05:37 am
नया टीवीएस जुपिटर (Source: tvsmotor.com)

सुप्रीम कोर्ट ने एक फरमान सुनाया कि एक अप्रैल 2017 से बीएस- 3 वाहनों की बिक्री बंद हो जाएगी ताकि प्रदूषण की मार झेलते ‘हम बिचारे’ लोगों को कुछ तो राहत मिले। वाहन बनाने वाली कंपनियों ने कहा, हमारा स्टॉक पड़ा है, इसे बेचने दीजिए! इस पर कोर्ट ने फटकारा, लोगों की जान कीमती है या वाहन? प्रदूषण का हाल यह है कि भारत में इससे हर साल दस लाख लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। इसे फैलाने में बीस प्रतिशत भागीदारी इन्हीं वाहनों की है। देश की राजधानी में पढ़ने वाले मासूम नौनिहाल जब मुंह पर मास्क लगाए या खांसते हुए स्कूल जाते हैं तो सवाल उठता है जेहन में, यह कैसा भविष्य दे रहे हैं हम इन मासूमों को!

सुप्रीम कोर्ट का फरमान सुकून देने वाला था कि हां हम जाग रहे हैं, शायद कुछ बदलाव आए। लेकिन नहीं, अगले दिन सारे भ्रम दूर हो गए। वाहन बनाने वाली कंपनियों ने भारतीयों की कमजोर रग पर हाथ रख दिया- मुफ्त का माल या यों कहें मुफ्तखोरी! सब जगह बोर्ड लग गए, लो जी लो, नवरात्र में भारी डिस्काउंट! अगले दिन हर बड़ा अखबार डिस्काउंट की खबरों से भरा पड़ा था। शो रूम पर लंबी कतारें लग गर्इं। ऐसा लग रहा था कि उस दिन आधे भारत को वाहन खरीदना याद आ गया! दिन, चौघड़िया, तिथि, शुभ समय सब धरे रह गए, आखिर डिस्काउंट का सवाल था! और प्रदूषण का क्या? जवाब एक ही था, अरे भाई थोड़ा और बढ़ जाएगा, तो क्या?

जिन ‘बिचारे’ लोगों के लिए सरकार जागी और यह फैसला आया वे तो खुद मरने को तैयार बैठे हैं! क्यों नहीं भाई, मुफ्त का जहर मिलेगा तो भी हम स्टॉक कर लेंगे! शर्म आती है ऐसी मानसिकता पर। चंद पैसों के लिए हम इस हद पर उतर आए हैं! फिर क्यों हम चिल्लाते हैं कि भाई, इस साल पारा आसमान छू रहा है, मौसम का देखो क्या बुरा हाल है। बारिश आती नहीं है, और न जाने क्या-क्या!आखिर कौन होते हैं हम ये सवाल करने वाले? आज हम जो वाहन डिस्काउंट पर लाए हैं, उनका भारी ब्याज हमारे बच्चे चुकाएंगे। वाहन बनाने वाली कंपनियां खुश हैं। लोग भी प्रसन्न हैं कि चलो हमारा फायदा हुआ। मत सोचो कि यह छोटी-सी खुशी आगे कितनी भारी पड़ेगी! जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है, हम कुदरत को कोसते हैं, लेकिन जब हम खुद प्रकृति का शोषण करें, पर्यावरण से खिलवाड़ करें तो कुछ नहीं! यह गाना सही ही है, बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया!
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First Published on April 11, 2017 5:37 am

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