December 04, 2016

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आजकल चीनी सामानों का बहिष्कार करने की अपील जोर-शोर से प्रचारित की जा रही है।

Author October 25, 2016 03:30 am
चीनी झालर।

आजकल चीनी सामानों का बहिष्कार करने की अपील जोर-शोर से प्रचारित की जा रही है। ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि इस अपील का असर अब भारतीय बाजारों में दिखने लगा है। यह तथ्य तकरीबन हर भारतीय को पता होगा कि हमारी बाजारें चीनी सामानों से भरी पड़ी हैं। दरअसल, चीनी सामानों की कीमत अन्य देशी या विदेशी उत्पादों की तुलना में काफी कम होने की वजह से भारतीय मध्यवर्ग इनसे जुड़ा हुआ है। हालत यह है कि अत्याधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरणों से लेकर, बच्चों के खिलौनों और घरों में सजावट के लिए लगने वाली लड़ियां भी चीन में ही बनी होती हैं। दलील दी जा रही है कि अगर भारतीयों ने चीन के सामानों का बहिष्कार कर दिया तो चीन आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा और साथ ही पाकिस्तान की अक्ल भी ठिकाने लग जाएगी।

मगर आर्थिक विशेषज्ञ इस विचार से पूरी से सहमत नहीं हैं। दरअसल, चीन पूरे विश्व में जितना निर्यात करता है, उसका महज तीन फीसदी ही भारत आयात करता है। ऐसे में यह बात पूरे दावे से नहीं कही जा सकती कि चीनी सामानों का बहिष्कार करने से चीन आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा। इसके अलावा एक अन्य महत्त्वपूर्ण दिक्कत यह आएगी कि देश की इतनी बड़ी आबादी जो अपनी जरूरत के सामानों के लिए चीनी उत्पादों पर ही निर्भर है, उसकी पूर्ति कर पाना आसान नहीं होगा। यानी इस मामले में भावनाओं को थोड़ा नियंत्रित करके, सोच-समझ कर फैसला लेने की जरूरत है।
’नीतीश कुमार, आइआइएमसी, दिल्ली

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First Published on October 25, 2016 3:30 am

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