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सत्तांध शहजादे

हैरत की बात है कि इस घटना के बाबत एक भाजपा नेता का बयान आया कि लड़की को इतनी रात में बाहर नहीं घूमना नहीं चाहिए!
Author August 9, 2017 05:55 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है। (Source: Express Archives)

सत्तांध शहजादे
हरियाणा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के बेटे ने एक आइएएस अफसर की बेटी के साथ छेड़खानी की कोशिश की जो अत्यंत शर्मनाक है। दरअसल, सत्ता के करीबी या उससे जुड़े लोगों को अक्सर यह दंभ हो जाता है कि प्रशासन उनकी मुट््ठी में है और वे इसका नाजायज फायदा उठाते हैं। पुलिस भी ऐसे लोगों के सामने नतमस्तक रहती है। हैरत की बात है कि इस घटना के बाबत एक भाजपा नेता का बयान आया कि लड़की को इतनी रात में बाहर नहीं घूमना नहीं चाहिए! क्या लड़कों को रात में छेड़खानी का लाइसेंस मिला हुआ है? ऐसी घटनाएं निंदनीय तो हैं ही, उनका परोक्ष समर्थन करना तो और भी शर्मनाक है।
’जफर अहमद, रामपुर डेहरु, मधेपुरा, बिहार
सीवर में मौत

दिल्ली के लाजपत नगर में सीवर की सफाई करने उतरे तीन मजदूरों की जहरीली गैस के कारण मौत हो गई। इनके पास सीवर की सफाई करने के लिए जीवन रक्षक उपकरण नहीं थे। पिछले दिनों दक्षिण दिल्ली के घिटोरनी इलाके में सेप्टिक टैंक में सफाई के लिए उतरे चार लोगों की मौत हो गई थी। यह हमारे शासन-प्रशासन और समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक है। पिछले कई वर्षों से देशभर में सफाई कर्मचारी सीवर, गटर या गंदे नालों की सफाई के दौरान असमय काल का ग्रास बनते आ रहे हैं पर किसी सरकार ने इनके जोखिम भरे काम के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई है। एक ओर तो हमारी सरकार देश भर में स्वच्छता अभियान का भोंपू बजा रही है, लेकिन दूसरी ओर आज भी सिर पर मैला ढोने की अमानवीय कुप्रथा जारी है। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग होते हुए भी इन मजदूरों का मरना हमारी शासन व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

गौरतलब यह भी है कि ठेकेदारी प्रथा के कारण बिना जीवन रक्षक उपकरणों के अकुशल-सस्ते मजदूरों को ही इस जोखिम भरे काम में धकेल दिया जाता है। यहां तक कि निगम के स्थायी सफाई कर्मचारियों को भी बिना सुरक्षा कवच के ही काम करना पड़ता है। अस्थायी मजदूरों को उचित दिहाड़ी भी नहीं मिलती है और न उनके लिए जीवन बीमा का प्रबंध है। निस्संदेह देशभर में दलित वर्ग के लोग ही इस जोखिम भरे काम को करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक शासन-प्रशासन ने उनके इस काम की गंभीरता को नहीं समझा हैं। दिल्ली के तीनों नगर निगमों का दायित्व है कि वे सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराएं और उनके भविष्य को आर्थिक तौर पर सुरक्षा प्रदान करें।
’रमेश शर्मा, केशवपुरम, दिल्ली

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