December 05, 2016

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चौपाल: बुंदेलखंड की व्यथा

सूखा बुंदेलखंड का पर्याय बन गया है। उत्तर प्रदेश चुनाव में बुंदेलखंड राजनीति का केंद्र होने वाला है।

Author October 26, 2016 05:14 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

सूखा बुंदेलखंड का पर्याय बन गया है। उत्तर प्रदेश चुनाव में बुंदेलखंड राजनीति का केंद्र होने वाला है। इसकी वजह इसका पिछड़ा होना ही है। हर पार्टी सूखे की गेंद इधर से उधर उछालती रही है। लेकिन सूखे की समस्या ने बुंदेलखंड की बाकी सभी समस्याओं को ढक दिया। बुंदेलखंड के सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों और संसाधनों की कमी है। अच्छे इलाज के लिए मरीजों को कानपुर या लखनऊ जाना पड़ता है।

लिंग-भेद के मामले में स्थिति और भयानक है। आज भी कुछ परिवार लड़की पैदा नहीं करना चाहते। कुपोषण की शिकार भी लड़कियां ही ज्यादा हैं। स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ती कक्षा के साथ घट जाती है। रोजगार के लिए यहां के लोग खेती, मजदूरी करते हैं या अपना पुश्तैनी व्यवसाय चलाते हैं। यहां युवाओं के लिए नए अवसर नहीं हैं। नई पीढ़ी पढ़ाई और नौकरी के लिए पलायन कर रही है। कानून व्यवस्था पर दबंगई और बाहुबल हावी है। बुंदेलखंड को जरूरत है कि उसकी सरकार सूखे का परदा हटा कर इन सभी समस्याओं पर गौर करे और इनसे निबटने की योजना बनाए। बुंदेलखंड की जरूरत इस वक्त राजनीति नहीं, विकास है।
’आकांक्षा शर्मा, महोबा, उप्र

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First Published on October 26, 2016 5:14 am

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