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चीनी अमानवीयता

हिटलरशाही की तरह चीनी कम्युनिस्ट तानाशाही भी ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी।
Author July 18, 2017 10:53 am
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फाइल फोटो)

चीनी अमानवीयता
महान चीनी लेखक ली शाओबो की जेल में ही मौत हो गई। चीन की सरकार ने कैंसरग्रस्त इस इकसठ वर्षीय मानवाधिकारवादी की ढंग से चिकित्सा भी नहीं होने दी। उनकी पत्नी ली शिया उन्हें कारागार में देखने तक से वंचित रखी गर्ईं। ली शिया दुनिया के सामने अपना दुख व्यक्त न कर सकें, इसलिए वे भी नजरबंदी में हैं। सन 2010 में जब शाओबो को नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा हुई थी, उन्हें पुरस्कार लेने के लिए नॉर्वे नहीं जाने दिया गया था। वे जेल में ही कैद रखे गए थे। चीन ने उस समय उन्हें एक शातिर अपराधी तक कह दिया था। चीनी शासक पड़ोसी देशों के साथ दबंगई और अपने ही नागरिकों से बेरहमी दिखाते हैं। यह हिटलर नीति है। हिटलरशाही की तरह चीनी कम्युनिस्ट तानाशाही भी ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी।
’अजय मित्तल, मेरठ

मोसुल की मुक्ति
आखिरकार लंबी जद्दोजहद के बाद इराकी गठबंधन सेना ने मोसुल से दुर्दांत आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का सफाया कर दिया। आइएस न केवल इराक बल्कि दुनियाभर के लिए आतंक का पर्याय बन चुका था। मोसुल शहर की यह आजादी आतंक के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि मोसुल के बाद दूसरे सबसे बड़े गढ़ सीरिया के रक्का में अभी भी आइएस के पांव उखाड़ना चुनौती भरा है। उम्मीद की जा सकती है कि जल्द ही सैन्य अभियान रक्का पर भी जीत की इबारत लिखेगा।
अब अगला कदम पूरी तरह से बिखर चुके मोसुल शहर को फिर बसाने और विस्थापितों के पुनर्वास का होगा जिसमें काफी वक्त लगेगा। पर इराकी सेना और वहां की जनता अपने बुलंद हौंसलों से जल्द ही इस शहर की तस्वीर भी बदल देगी। आतंक के पोषक मुल्क पाकिस्तान को भी मोसुल से सीख लेने की जरूरत है कि जीत अंत में सच की ही होती है। पड़ोसी मुल्क भारत की सहनशीलता की और परीक्षा न ले तो बेहतर होगा।
’नीरज मानिकटाहला, यमुनानगर, हरियाणा

गोद में स्कूल
सांसद आदर्श ग्राम योजना की तर्ज पर सांसद अब स्कूलों को भी गोद लेंगे। इस योजना को अमल में लाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने कमर कस ली है और इसे जल्द से जल्द लागू करने के लिए खाका भी तैयार कर रहा है। इस योजना के तहत सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के किसी भी स्कूल को गोद लेकर सांसद निधि के तहत उसके विकास के लिए राशि मुहैया करा सकते हैं। मंत्रालय ने यह फैसला इसलिए किया है कि गांवों के स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं जैसे, कक्षाओं आदि का निर्माण किया जा सके। अगर सांसदों ने सही ढंग से काम किया तो ग्रामीण स्कूलों के दिन जरूर बहुरेंगे नहीं तो नतीजे ढाक के तीन पात ही साबित होंगे। भारत में ऐसी कई योजनाएं हैं जिनका सही तरह क्रियान्वयन न हो पाने के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। सांसद आदर्श ग्राम योजना भी उसमें से एक है।
’नीरज कुमार यादव, इलाहाबाद

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First Published on July 18, 2017 5:20 am

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