December 10, 2016

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अलग-अलग लोगों का जिंदगी जीने का अपना नजरिया होता है।

Author December 2, 2016 00:56 am
प्रतीकात्मक तस्वीर।

अलग-अलग लोगों का जिंदगी जीने का अपना नजरिया होता है। बिन मोहब्बत जिंदगी दुश्वार है, दोस्त की दोस्ती में भी प्यार है, पापा की डांट मां के दुलार में प्यार है, भाई-बहन के मीठी तकरार में भी प्यार है। अपने रूठ जाएं तो उनको मानना प्यार है। प्यार एक ऐसा रिश्ता है, जिसे बनाने के लिए दो लोगों की पसंद का होना और चलाने के लिए उन दो लोगों के बीच आपसी समझ का होना जरूरी है। एक स्तर पर ऐसा भी आता है, जब सब कुछ होकर भी एक अजीब-सी कमी महसूस होती है। इतने सारे लोग… कुछ अपने कुछ अनजान-पराए, लेकिन जब कभी आकस्मिक उमड़ा प्यार पराए को अपने से भी ज्यादा अपना बना देता है तो मन की आंखें एक मूर्तरूप और एक अजीब-सी कमी को पूरा कर देती है। ऐसी खुशी भर देती है जो सर्वत्र खुशियों से भी प्रिय होती है।

यह अक्सर कहा जाता है कि प्यार एक अहसास है, जिसे रूह से महसूस किया जा सकता है। यह सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है, बस जो जितना ले सका या फिर जिसे जितना मिल सका। यह हमारे संपूर्ण जीवन में विभिन्न रूपों में सामने आता है। यह अहसास दिलाता है कि जिंदगी कितनी खूबसूरत है। प्रेम इंसान की सोच, उसके व्यवहार और वाणी- सब कुछ में परिवर्तन ले आता है। दरअसल, प्रेम इंसान को विनम्र बना देता है।

प्रेम बोलने में जितना मीठा है, उसका अहसास उतना ही खूबसूरत और प्यारा होता है। इसे शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। प्यार कब हो जाता है, पता ही नहीं चलता। वैसे भी यह सोच-समझ कर की जाने वाली चीज नहीं है। कोई कितना भी सोचे, अगर उसे सच्चा प्रेम हो गया तो उसके लिए दुनिया की हर चीज गौण हो जाती है। प्रेम की अनुभूति विलक्षण है। इसका अहसास तब होता है, जब मन सदैव किसी का सामीप्य चाहने लगता है। उसकी मुस्कराहट पर खिल उठता है। उसके दर्द से तड़पने लगता है। उस पर सर्वस्व समर्पित करना चाहता है, बिना किसी अपेक्षा के। किसी के खयालों में खोकर खुद को भुला देना, उसके सभी दर्द अपना लेना, खुद को समर्पित कर देना, उसकी खुशियों में खुश होना, उसके आंसुओं को अपनी आंखों में ले लेना, इसके सिवा और प्यार है क्या..! और इससे कौन बचा..!
’संतोष कुमार, बठिंडा, पंजाब

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First Published on December 2, 2016 12:56 am

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