ताज़ा खबर
 

मनमानी के स्कूल

देश की सरकार स्वच्छता जैसे मुद्दों को लेकर ज्यादा उत्साहित दिखाई दे रही है। लेकिन इससे भी अधिक संवेदनशीलता की अपेक्षा और जरूरत शिक्षा के बुनियादी ढांचे में परिवर्तन को लेकर है।
Author September 13, 2017 01:58 am
रेयान इंटरनेशनल स्कूल।

मनमानी के स्कूल

आज शिक्षा एक ऐसा कारोबार बन गया है, जिसमें घाटे की आशंका शून्य फीसदी है और मुनाफा कई गुना है। देश के पचास फीसद निजी स्कूल अलग-अलग पार्टियों के नेताओं या राजनीतिकों और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े बड़े अधिकारियों या उनके रिश्तेदारों के हैं। निजी स्कूलों के कारोबार को बढ़ाने के लिए जानबूझ कर और षड्यंत्रपूर्वक सरकारी स्कूलों और उसकी शिक्षा का स्तर गिराया गया, ताकि लोग मजबूर होकर अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजें। पुराने समय में सरकारी स्कूलों में शिक्षक अच्छे होते थे और पढ़ाई की गुणवत्ता भी अच्छी थी। अब प्राइवेट स्कूलों का जाल पूरे देश में फैल गया है, जहां मनमानी फीस वसूली जाती है और बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह लापरवाही बरती जाती है। गुरुग्राम (गुड़गांव) के रेयान स्कूल की त्रासद घटना से यह साफ हो गया है।

प्राइवेट स्कूलों का नेटवर्क तैयार करने और पोषित करने में अपवाद को छोड़ कर सभी राजनीतिक दलों में एकता और सहमति है। जिस रेयान स्कूल में सात वर्ष के मासूम प्रद्युम्न ठाकुर की नृशंस हत्या की गई, उसके सबूत मिटाने में स्कूल प्रबंधन का हाथ सामने आ रहा है। इस स्कूल के संचालक पहले कांग्रेस से जुड़े हुए थे, फिर भाजपा से जुड़ गए। इस स्कूल के संचालकों की बड़े-बड़े नेताओं के साथ नजदीकियों अपने सभी स्कूलों में भाजपा के लिए बाकायदा सदस्यता अभियान चलाने की खबरें हैं। कहने को यह स्वैच्छिक है, लेकिन व्यवहार में कैसा दबाव काम करता होगा, यह सब जानते हैं।जब हम इस तरह षड्यंत्र की गहराई में जाएंगे, तब यह समझ में आएगा कि किस तरह देश की शिक्षा व्यवस्था को साजिशन अपने हित में मोड़ा गया है। देश में आज तक निजी स्कूलों के लिए कोई आचार संहिता नहीं बनाई गई है। जहां कुछ नियम बनाए भी गए हैं, वहां उनका पालन नहीं होता है। दो दिन पहले ही हैदराबाद में किसी कारणवश सिर्फ यूनिफॉर्म पहन कर नहीं आने पर एक ग्यारह साल की लड़की को बतौर सजा लड़कों के शौचालय में खड़ा कर दिया गया। इस तरह की मनमानियां बिना राजनीतिक प्रश्रय के होना संभव नहीं है। इस मामले में दोषी स्कूल शिक्षक के विरुद्ध पास्को का मामला दर्ज किया गया है। लेकिन यह अकेला उदाहरण नहीं है। ऐसी अमानवीय घटनाएं आए दिन पढ़ने और सुनने में आती हैं, जिनका कोई अंत दिखाई नहीं दे रहा है।देश की सरकार स्वच्छता जैसे मुद्दों को लेकर ज्यादा उत्साहित दिखाई दे रही है। लेकिन इससे भी अधिक संवेदनशीलता की अपेक्षा और जरूरत शिक्षा के बुनियादी ढांचे में परिवर्तन को लेकर है। बुनियादी शिक्षा अगर अच्छी और सुसंगत होगी तो अच्छे नागरिकों का निर्माण होगा और अस्वच्छता जैसी समस्याएं रहेंगी ही नहीं।

’प्रवीण मल्होत्रा, इंदौर

असुरक्षित सफर
बसें हमारे समाज में सार्वजनिक परिवहन का एक महत्त्वपूर्ण साधन हैं। भारत में रोज करोड़ों की संख्या में लोग बसों में यात्रा करते हैं। इसलिए आज परिवहन के क्षेत्र में बसों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता और न ही इन बसों में उपलब्ध सुरक्षा उपायों की जरूरत को। अभी हाल में ही बाबा गुरुमीत राम रहीम को जब सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया था, तब उसके समर्थकों ने दिल्ली परिवहन की कई बसों में तोड़फोड़ और आगजनी की थी। इस दौरान देखा गया कि ज्यादातर बसों में न तो आपात स्थिति में दरवाजा खोलने वाला दरवाजा या उसके लॉक सही स्थिति में हैं और न आगजनी की स्थिति में आग बुझाने वाला अग्निशामक यंत्र दुरुस्त है। न ही कांच तोड़ने के लिए हथौड़ा था, जिसका उपयोग बस दुर्घटना के समय लोग बस से निकलने में प्रयोग कर सकें।

यह स्थिति सिर्फ दिल्ली के बसों की नहीं है। देश भर में बस हादसे अक्सर होते रहते हैं और सुरक्षा उपायों की कमी के कारण बस यात्री मरते रहते हैं। पहाड़ी क्षेत्र में तो बस दुर्घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। यात्रियों से सुविधाओं के नाम पर अधिक किराया वसूले जाने के बावजूद उनकी यात्रा को सुरक्षित बनाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हर बार कोई बड़ा हादसा होने के बाद यह वादा किया जाता है कि अब सब कुछ दुरुस्त कर दिया जाएगा। लेकिन इसका शायद ही कोई असर देखने में आता है। इसका खमियाजा हर बार बसों में सफर कर रहे यात्रियों को उठाना पड़ता है।
’आशुतोष शुक्ला, कौशाम्बी, गाजियाबाद

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.