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दावे और हकीकत

आज बड़ी अजीब-सी स्थिति है देश में। कोई दाल-प्याज के लिए रो रहा है, कोई बाजार के लिए रो रहा है, कोई सीमा पर शहीद अपने दोस्त के लिए रो रहा है, कोई पूर्व सैनिक अपने अधिकार के लिए रो रहा है..
Author September 3, 2015 02:11 am

आज बड़ी अजीब-सी स्थिति है देश में। कोई दाल-प्याज के लिए रो रहा है, कोई बाजार के लिए रो रहा है, कोई सीमा पर शहीद अपने दोस्त के लिए रो रहा है, कोई पूर्व सैनिक अपने अधिकार के लिए रो रहा है, तो कोई अपनी फसल चौपट होने या खेती में घाटे के लिए रो रहा है। इसी बीच कोई ‘सामान्य’ से ‘पिछड़ा’ होने के लिए रो रहा है। अगर कोई हंस रहा है तो वह जिसके अच्छे दिन आ गए हैं। ये अच्छे दिन वाले आजकल दिख रहे हैं तो बस अपने आका के खिलाफ लिखने-बोलने वालों को समझाते, गरियाते या आबुधाबी में मंदिर बनने की खुशी मनाते हुए। बेचारे करें भी क्या! जब समर्थन और भक्ति शुरू कर ही दी है तो देवता को असुर होने दे नहीं सकते! चीन थोड़ा-सा हिला तो दुनिया हिल गई, फिर भी देश के वित्तमंत्री नहीं हिले। एक दिन में निवेशकों के सात लाख करोड़ डूब गए लेकिन भक्तों का जज्बा काबिले तारीफ है, अब भी यह तैर रहा है।

बेशक कोई जादू की छड़ी नहीं है इनके पास, लेकिन आका का आदेश है। आका से भारत के ढेर सारे दलों ने जातिगत गणना को उजागर करने की गुहार लगाई। प्रभु के अनुचरों ने कहा यह हमारे अधिकार-क्षेत्र में नहीं बल्कि महापंजीयक के अधिकार-क्षेत्र में है। लेकिन बिहार में चुनाव आते ही धर्म आधारित गणना इनके अनुचरों के अधिकार क्षेत्र में आ गई! बड़ी समस्या है भक्तों के सामने। आजकल तो भगवान से ही भरोसा उठ रहा है इनका। इनके अच्छे दिन आते-आते रह गए। काश, प्रभु कोई जादू की छड़ी घुमाते। लेकिन प्रभु हैं कि फुरसत ही नहीं है विदेश घूमने से।

एक तरफ पाकिस्तान सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन दर उल्लंघन कर रहा है तो दूसरी ओर हम पर ही आरोप भी लगा रहा है। आका ने अपने चुनावी घोषणापत्र में ढेर सारे वादों की फेहरिस्त शामिल की थी। कुछ तो पूरा होने की दहलीज तक आ गए हैं फिर भी यह सरकार उन्हें टालने की कोशिश कर रही है।

अब कश्मीर को ही देख लीजिए। आए दिन वहां भारत विरोधी गतिविधियां ऐसे हो रही हैं जैसे किसी ने हवा दे दी हो। पूर्वोत्तर भारत के गुटों ने संघर्ष विराम की समाप्ति की घोषणा कर दी। ऐसे में पूर्वोत्तर में सुरक्षा संकट उत्पन्न हो गया है। सब अच्छी तरह समझते हैं कि जब आग घर में लगी हो तो आग बुझाने का कार्य पहली प्राथमिकता होनी चाहिए न कि मित्र देशों से बातचीत।

आए दिन मन की बात करने वाले हमारे प्रधानमंत्री को चाहिए कि देश में शांति और सौहार्द का मार्ग प्रशस्त करने के लिए इन भक्तों को प्रेरित करें। अगर वे ऐसा करते हैं तो कुछ ही सालों में भारत की कायापलट जाएगी। विकास का मार्ग शांति और सौहार्द से ही दीर्घकालिक हो सकता है।
हेमंत कुमार गुप्ता, लखनऊ

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