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किसका हित

सरकार रोज-रोज नए नियम ला रही है, जिससे आम जनता अब मायूस हो रही है।
Author December 22, 2016 04:23 am
प्रेस कॉन्‍फ्रेंस को संबोधित करते वित्‍तमंत्री अरुण जेटली। (PTI File Photo)

मोदी सरकार ने आठ नवंबर को नोटबंदी का फैसला लिया था। 500 और 1000 के नोट बंद करने के इस फैसले को जनता ने अपना पूरा समर्थन भी दिया था। जनता को लगा था कि बेईमानों पर चोट लगेगी और काला धन रखने वाले कुबेरों का पैसा अब रद्दी के टुकड़ों में बदल जाएगा। लेकिन सरकार रोज-रोज नए नियम ला रही है, जिससे आम जनता अब मायूस हो रही है। सबसे ज्यादा काला धन रखने वाली राजनीतिक पार्टियों को छूट दे दी गई है कि वे जितना चाहें धन जमा करें। उन पर न तो टैक्स लगेगा और न ही उनसे स्रोत पूछा जाएगा।

दूसरी ओर फिर एक नया नियम आया कि आम आदमी 5000 रुपए से ज्यादा जमा करेगा तो पहले बैंक के दो अफसर पूछताछ करेंगे और संतुष्ट हुए तभी रकम जमा की जाएगी। हालांकि इस मसले पर उठे विरोध के बाद यह फैसला वापस ले लिया गया है, लेकिन यह रवैया अपनाने से सरकार की मंशा पर शक पैदा हो गया है। क्या सिर्फ आम जनता बेईमान है और सारे नियम जनता के लिए हैं? नोटबंदी के बाद इतने दिनों से सबसे ज्यादा तकलीफ में आम जनता ही है। अब जनता का धैर्य भी जवाब देने लगा है। मोदी सरकार को अहसास होना चाहिए कि अगर जनता की परेशानी तुरंत समाप्त नहीं हुई तो इसका खामियाजा सरकार को ही भुगतना होगा।

’संगीता चौधरी, दिल्ली

RBI का नया निर्देश- “5000 रुपये से ज़्यादा के पुराने नोट जमा करने पर KYC खाताधारकों से नहीं होगी पूछताछ”

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