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नजरबंद लोकतंत्र

गुजरात विधानसभा के छह कांग्रेसी विधायकों के त्यागपत्र ने पार्टी में बेचैनी बढ़ा दी है।
Author August 1, 2017 05:58 am
कांग्रेस

चिंता से आगे
केरल में आरएसएस कार्यकर्ताओं पर हमले की घटनाएं लगातार हो रही हैं। बीते शनिवार को भी एक कार्यकर्ता का हाथ काटे जाने के बाद उसकी मौत हो गई। देश के गृहमंत्री ठोस कार्रवाई करने के बजाय अभी तक सिर्फ चिंता जता कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। जब यह बात निर्विवाद सत्य है कि लोकतंत्र में राजनीतिक हिंसा की कोई जगह नहीं होती तो ये हमले क्यों नहीं रुक रहे? यदि राज्य सरकार इन्हें रोकने में नाकाम साबित हुई है तो गृहमंत्री को इन हमलों को रोकने के लिए कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। जरूरत है कि राजनाथ सिंह अब सिर्फ चिंता न जाहिर करें बल्कि ठोस कदम उठाएं।
’बृजेश श्रीवास्तव, गाजियाबाद

नजरबंद लोकतंत्र
गुजरात विधानसभा के छह कांग्रेसी विधायकों के त्यागपत्र ने पार्टी में बेचैनी बढ़ा दी है। इसका सबसे बड़ा कारण पार्टी के मुख्य रणनीतिकारों में से एक अहमद पटेल का राज्यसभा सदस्य के रूप पुनर्निर्वाचन के खतरे में पड़ना है। गुजरात में कांग्रेस के विधायकों की संख्या घट कर इक्यावन रह गई है। पटेल का निर्वाचन सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस अपने बाकी विधायकों को बचाए रखने की जुगत में लग गई है। यही कारण है कि सभी विधायकों को रातोंरात कांग्रेसशासित राज्य कर्नाटक की राजधानी ले जाकर एक प्रकार से नजरबंद कर दिया गया है।
एक ओर जहां दलबदल कानून के तहत ‘व्हिप’ जारी करने की व्यवस्था ने किसी भी दल के भीतर लोकतंत्र का गला दबा रखा रखा है वहीं दूसरी ओर इस तरह का घटनाक्रम अपने ही दल के जनप्रतिनिधियों के प्रति अविश्वास व दबाव की राजनीति को दर्शाता है। सिद्धांतों-आदर्शों को ताक पर रख कर अवसरवाद की राजनीति करते हुए दल बदलना कुछ जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता को कठघरे में लाता है मगर किसी राष्ट्रीय दल का इस तरह का व्यवहार भी भारतीय राजनीति के लिए चिंता का विषय है।
’ऋषभ देव पाण्डेय, कोरबा, छत्तीसगढ़

ऐसी समानता
भ्रष्टाचार के मामले में लालू और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ में समानताएं दंग करने वाली हैं। यहां लालू, उनके पुत्र तेजस्वी व तेज प्रताप, पुत्री मीसा भारती और दामाद शैलेश कुमार- सब भ्रष्टाचार, जिसमें धन-शोधन का आरोप भी सम्मिलित है, में फंसे हैं; वहां नवाज शरीफ, उनके बेटे हसन नवाज व हुसैन नवाज, बेटी मरियम नवाज तथा दामाद मोहम्मद सफदर अवान पर भी धन-शोधन सहित भ्रष्टाचार के तमाम आरोप हैं। दोनों के ही उपर्युक्त परिवारजन राजनीति से कहीं न कहीं जुड़े हैं। यहां न्यायपालिका ने लालू को गद्दी से हटने को मजबूर किया, वहां भी सुप्रीम कोर्ट ने नवाज को बाहर का रास्ता दिखाया। जरा-सा अंतर यह आ गया कि नवाज अपनी विरासत, यानी प्रधानमंत्री की गद्दी, अपने भाई शाहबाज को सौंप सके पर लालू की विरासत के लिए किसी भाई का नाम नहीं आता। कोई बात नहीं, पुत्र-पुत्री तो और भी हैं। सब संभाल लेंगे! पत्नी राबड़ी देवी ने पहले लालू की गद्दी संभाली थी लेकिन उन पर भी आरोप आ गए।
’आस्था गर्ग, बागपत रोड, मेरठ

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