ताज़ा खबर
 

बाढ़ के रास्ते

ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ होने के पूर्व ही देश के कई हिस्सों में पानी का संकट शुरू हो जाता है। पानी की आपूर्ति दो-तीन दिन के अंतराल पर सामान्य बात है, कुछ स्थानों पर पांच से सात दिन के अंतराल पर भी जलप्रदाय की सूचनाएं प्राप्त होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो दूर-दूर से महिलाओं को […]
Author August 10, 2015 08:49 am

ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ होने के पूर्व ही देश के कई हिस्सों में पानी का संकट शुरू हो जाता है। पानी की आपूर्ति दो-तीन दिन के अंतराल पर सामान्य बात है, कुछ स्थानों पर पांच से सात दिन के अंतराल पर भी जलप्रदाय की सूचनाएं प्राप्त होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो दूर-दूर से महिलाओं को सिर पर पानी के मटके रख कर घर की जरूरतों के लिए अपने समय और ऊर्जा को खपाते हुए देखा जा सकता है। नगर निकायों को टैंकर से जल प्रदाय की व्यवस्था करनी होती है, जिसमें भ्रष्टाचार की खबरें आती रहती हैं।

दूसरी ओर वर्षाकाल में पानी सहेजने की समुचित व्यवस्था न होने से अधिकांश पानी बह जाता है। थोड़ी-सी वर्षा होने पर शहरों में जल-जमाव हो जाता है और सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो जाती हैं। हाल की वर्षा ने इंदौर और उज्जैन में जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। खंडवा-इटारसी रेलखंड पर कामायनी एक्सप्रेस और जनता एक्सप्रेस कालीमाचक नदी के पुल पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें इकतीस लोग मारे गए।

पर्याप्त वर्षा के बावजूद जल प्रबंधन व्यवस्थित न होने से ग्रीष्म ऋतु में पानी का संकट और वर्षा ऋतु में पानी से त्रस्त रहने को जनता विवश है। पानी के व्यावसायीकरण का लगातार विस्तार हो रहा है। स्वच्छ पानी के भयादोहन के नाम पर जलशुद्धिकरण यंत्रों की बिक्री का बड़ा व्यवसायतंत्र अलग से निर्मित हो गया है। भारतीय रेलों में प्रतिदिन आस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर लोग यात्रा करते हैं। रेल यात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के बजाय बुलेट ट्रेन और द्रुतगति ट्रेनों की योजनाओं के विचार तर्कसंगत नहीं हैं।

पानी के पारंपरिक स्रोतों की रक्षा, उनकी जल भरावन क्षमता का विस्तार, नदियों के पुनर्जीवन की योजनाओं के साथ प्रत्येक गांव और शहर के लिए आत्मनिर्भर जलप्रबंधन, समुचित साफ-सफाई, प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण और सघन वृक्षारोपण, वनीकरण की योजनाओं को प्राथमिकता से लागू करने और जनता को इनसे जोड़ कर जनांदोलन का रूप देकर व्यवस्थित विकास किया जाना चाहिए।

सुरेश उपाध्याय, गीता नगर, इंदौर

 

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- http://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- http://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.