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कश्मीरियत से दूर

हाल ही में पीडीपी के नेता पीरजादा मंसूर ने अनंतनाग जिले में चुनावी भाषण देते हुए अपने कार्यकर्ताओं से कश्मीरी भाषा में कहा था कि अगर रियासत में एक हिंदू मुख्यमंत्री बन जाता है तो ‘असी पेई तावान’ यानी हम पर जैसे वज्रपात होगा! कश्मीरियत और साझी संस्कृति का दम भरने वाली पार्टियां कैसे कहती […]
Author November 14, 2014 12:35 pm

हाल ही में पीडीपी के नेता पीरजादा मंसूर ने अनंतनाग जिले में चुनावी भाषण देते हुए अपने कार्यकर्ताओं से कश्मीरी भाषा में कहा था कि अगर रियासत में एक हिंदू मुख्यमंत्री बन जाता है तो ‘असी पेई तावान’ यानी हम पर जैसे वज्रपात होगा!

कश्मीरियत और साझी संस्कृति का दम भरने वाली पार्टियां कैसे कहती कुछ हैं और करती कुछ और हैं, इस कथन में देखा जा सकता है। देश के कई राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री मुसलिम रहे हैं।

फिर जम्मू-कश्मीर में एक हिंदू के मुख्यमंत्री बनने के मुद्दे पर इतनी बहसबाजी और बवाल क्यों? यह सही है कि बहुमत जिसका होगा निश्चित रूप से मुख्यमंत्री भी उसी पार्टी का होगा। मगर थोड़ी देर के लिए संकीर्णता को तिलांजलि देकर उदार मनोवृत्ति का परिचय तो दिया ही जा सकता है। ‘कश्मीरियत’ के सपने तभी साकार होंगे!

 

’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

 

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