ताज़ा खबर
 

हार का सबक

जनसत्ता 19 सितंबर, 2014: देश के विभिन्न राज्यों में हाल में हुए उपचुनावों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले उत्तराखंड, बिहार, कर्नाटक और मध्यप्रदेश के उपचुनावों में भी भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। यह कहीं न कहीं साबित करता है कि यदि लोकतंत्र में कोई भी पार्टी और […]
Author September 19, 2014 12:29 pm

जनसत्ता 19 सितंबर, 2014: देश के विभिन्न राज्यों में हाल में हुए उपचुनावों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले उत्तराखंड, बिहार, कर्नाटक और मध्यप्रदेश के उपचुनावों में भी भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। यह कहीं न कहीं साबित करता है कि यदि लोकतंत्र में कोई भी पार्टी और उसके नेता आम जन को नजरअंदाज करके काम करते हैं तो उसका नतीजा बुरा ही होता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की चलती है लेकिन भाजपा ने लोकसभा चुनावों में बड़ी जीत दर्ज करके मान लिया कि वह कभी भी जीत दर्ज करने की क्षमता रखती है। मोदी और उनके समर्थकों का जादू नहीं चला और तीन महीने में ही भाजपा की लोकप्रियता की धज्जियां उड़ने लगीं। इस बार भाजपा को उत्तर प्रदेश समेत राजस्थान और गुजरात में भी बड़ा झटका लगा है। इन झटकों से भाजपा का उबरना भी मुश्किल ही नजर आता है। जिस राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में उसने लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को अर्श से फर्श पर ला दिया था आज वहां वह खुद फर्श पर पड़ी है।

उपचुनाव में भाजपा को उसके कब्जे वाली चौबीस सीटों में से यदि तेरह पर हार का जायका लेने को मजबूर होना पड़े तो वाकई यह भाजपा और मोदी समेत अमित शाह और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के लिए चिंता की बात है। उत्तर प्रदेश में, जहां लोकसभा चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को कुल अस्सी में से तिहत्तर सीटें मिली थीं आज वहां उसे ग्यारह सीटों में से सात पर हार गई। वास्तव में यह भाजपा विशेषकर नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह के लिए हार के कारणों की समीक्षा करने का समय है।

मोदी सरकार के सत्ता में आने के सौ दिनों के भीतर ही सरकार विरोधी कारक यदि काम करने लगे हैं तो यह भाजपा के स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं ठहराया जा सकता है। भाजपा और उसके नेताओं द्वारा की गई और की जा रही ध्रुवीकरण की राजनीति इस करारी हार के लिए जिम्मेदार ठहराई जा सकती है। भाजपा के तमाम नेताओं और सहयोगियों-समर्थकों को समझने की जरूरत है कि जनता को अधिक समय तक मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है। यह भी कटु सत्य है कि चुनाव केवल उन्हीं मुद्दों पर जीता जा सकता है जो जनता को सीधे प्रभावित करते हों।

लोकतंत्र में जनता के हितों से खिलवाड़ करके कोई भी अधिक समय तक सत्ता में   नहीं रह सकता। जब तीन महीने में ही भाजपा का देश में यह हाल हो गया तो कोई भी समझ सकता है कि आने वाले समय में उसका क्या हश्र होगा।

सुनील कुमार महला, सिनौला, अल्मोड़ा

 

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- http://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- http://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग