ताज़ा खबर
 

अंधेरे में तीर

जनसत्ता 22 अक्तूबर, 2014: हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद अलग-अलग टीवी चैनलों पर चुनाव विश्लेषकों और पार्टी प्रवक्ताओं ने विभिन्न राजनीतिक दलों की हार-जीत के कारणों पर अपनी-अपनी राय दी और टीका-टिप्पणी भी खूब हुई। चर्चा के दौरान राजनीतिक दलों के पक्ष-विपक्ष में बहुत कुछ कहा गया। सारी बातें समझ में […]
Author October 22, 2014 10:14 am

जनसत्ता 22 अक्तूबर, 2014: हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों के तुरंत बाद अलग-अलग टीवी चैनलों पर चुनाव विश्लेषकों और पार्टी प्रवक्ताओं ने विभिन्न राजनीतिक दलों की हार-जीत के कारणों पर अपनी-अपनी राय दी और टीका-टिप्पणी भी खूब हुई। चर्चा के दौरान राजनीतिक दलों के पक्ष-विपक्ष में बहुत कुछ कहा गया। सारी बातें समझ में आने वाली थीं, मगर एक बात को सुन कर ताज्जुब हुआ। ज्यादातर विश्लेषक महानुभाव इस मुद्दे को बराबर उछालते रहे कि ‘भाजपा ने हरियाणा में बहुमत तो हासिल कर लिया, महाराष्ट्र में वह ऐसा क्यों नहीं कर पाई’।

 

यानी भाजपा ने अगर बढ़िया जीत दर्ज की तो क्यों की, और अगर नहीं की तो क्यों नहीं की, ऐसे लच्चर प्रश्न पर किसे हंसी नहीं आएगी। लगता है बातों को एक खास नजरिए से देखने और उससे मुक्त होने में हमारे मीडिया और पूर्वग्रहग्रस्त वक्ताओं को अभी कुछ वक्त लगेगा। सच्चाई को सीधे-सीधे स्वीकार न करने का मतलब ही होता है असत्य को बढ़ावा देना और देश, मानवता और समाज का ‘असत्य’ से बढ़ कर और कोई दुश्मन नहीं हो सकता!

 

शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

 

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- http://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- http://twitter.com/Jansatta

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. O
    ONKAR PRASAD
    Oct 22, 2014 at 4:19 pm
    अपनी गलती को स्वीकार करने का मनोवल हम भारतीयों में आने में समय लगेगा जब तक गलती को स्वीकार करना अपमान समझता रहेगा तब तक कोई सुधार नहीं हो सकता है
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग