December 07, 2016

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चौपाल: बिना तैयारी

नोटबंदी के कारण विभिन्न राज्यों में साठ से अधिक लोगों की जान जाने की खबरें आ चुकी हैं।

Author November 23, 2016 04:04 am
नोएडा में आईसीआईसीआई बैंक के बाहर नए नोट के लिए खड़े लोग। (AP Photo/File)

नोटबंदी के कारण विभिन्न राज्यों में साठ से अधिक लोगों की जान जाने की खबरें आ चुकी हैं। सरकार के इस कदम से भ्रष्टाचार के धन पर कितना अंकुश लग पाएगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इससे लोगों को अनेक तरह की परेशानी के साथ-साथ कइयों को जान जरूर गंवानी पड़ी है। यह कितना उचित है कि कोई कालाधन उगाही करने में सहयोग के नाम पर अपनी जान को भी जोखिम में डाले? क्या इसे देशहित में कहेंगे कि कोई तिहत्तर वर्षीय बुजुर्ग लाइन में खड़े होकर अपने प्राण दे दे? सहयोग के नाम पर अगर किसी एक इंसान की भी जान जाती है तो यह बेहद शर्मनाक है। इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? देश भर में रुपए की कमी के कारण फैली अराजकता और हाहाकार सरकार के दावे की पोल खोल रही है। सवाल है कि छह महीने तैयारी का जो दावा किया जा रहा है, उसका आधार क्या है? अगर तैयारी पूरी थी तो बाजार में नोटों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं की गई? लोगों को सुगमतापूर्वक नए नोटों को मुहैया कराने के उपायों के बारे में क्यों कोई योजना नहीं बनाई गई?

इसे केंद्र सरकार की कुव्यवस्था और लापरवाही का नतीजा ही कहेंगे कि पूरे देश में मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को ही खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। दिहाड़ी मजदूर अपने काम को छोड़ कर पूरे दिन भर बैंकों के बाहर खड़े होने के लिए मजबूर हैं, लेकिन रुपए हाथ नहीं आ रहे। इसके अलावा, पैसे की कमी के कारण आर्थिक गतिविधियों का ठप पड़ना, राशन की कमी के कारण राशन दुकानों की लूट, कथित छह महीने की तैयारी के बावजूद एटीएम मशीनों को नए नोट के निकासी के लिए तैयार नहीं रखना आदि। ऐसे कई सवाल हैं जिनक जवाब मोदी सरकार को देना है।

सरकार को नए नोटों के प्रवाह में तेजी लाकर पहले से ही बाजार को इस परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए था। इतनी बड़ी आबादी वाले देश में उत्पन्न परिस्थिति का अनुमान सरकार को होना चाहिए था। इससे निपटने के लिए सरकार को बैंकों के अलावा ऐसे नए केंद्र अवश्य खोले जाने चाहिए थे, जहां लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नोट बदलवा सकते थे। दो हजार के नोट के जारी होने के तीन-चार दिन बाद ही कुछ जगहों से नकली नोट की खबर बेचैन करने वाली है। बहरहाल, सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम कितना सार्थक है यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल कई त्रुटियां हैं, जिन पर मोदी सरकार को विचार करने की जरूरत है।
’रिजवान निजामुद्दीन अंसारी, दरभंगा, बिहार

 

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First Published on November 23, 2016 4:03 am

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