June 24, 2017

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चौपाल: रिश्तों का कत्ल, नोटबंदी के बाद

आजकल जिस तरह रिश्तों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं वह बहुत चिंताजनक है। सगे-संबंधी भी रुपयों के लिए किसी भी हद तक गिर रहे हैं।

Author March 8, 2017 05:21 am
प्रतीकात्मक चित्र

आजकल जिस तरह रिश्तों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं वह बहुत चिंताजनक है। सगे-संबंधी भी रुपयों के लिए किसी भी हद तक गिर रहे हैं। मामूली कहासुनी में पश्चिमी दिल्ली के बिंदापुर थाना क्षेत्र में एक युवक ने अपने बूढ़े पिता को पीट-पीट कर मार डाला। कुछ वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश के सहावर तहसील क्षेत्र में एक लड़के ने अपने पिता को सरकारी नौकरी पाने के लालच में मार डाला था। ऐसे वाकये भी सामने आते रहे हैं जिनमें सगे, यहां तक कि भाई या बाप ने, नाबालिग बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया हो।
आदमी जानबूझ कर गलतियां करता है और कहता है कि भई कलयुग है! रिश्तों की अहमियत भूलते हम कैसे विश्वबंधुत्व का ढोल पीट सकते हैं जबकि हम में अपनों को अपनाने तक की सामर्थ्य नहीं है।

चंद्रकांत, एएमयू, अलीगढ़

 

हिंदुस्तान के अवाम के हक में लिए गए मौजूदा सरकार के फैसलों में विमुद्रीकरण काफी साहसपूर्ण रहा। इस निर्णय के लिए उसे काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी, हालांकि बीच-बीच में काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए इस कदम की तारीफ के स्वर भी सुनाई देते रहे। इस फैसले के बाद देश में अफरातफरी का माहौल बन गया था। कुछ महीनों तक एटीएम और बैंक आम जनता के स्थायी पते बन गए थे। पूरे देश ने बैंकों और एटीएम के बाहर लगी लंबी-लंबी लाइनें देखीं, जिनमें लोग भूखे-प्यासे रह कर घंटों खड़े रहे। कहीं-कहीं तो रात-रात भर लाइन में लगे रह कर लोगों ने अपना ‘नंबर’ सुरक्षित रखा ताकि बैंक या एटीएम खुलते ही पैसा निकाल सकें।
इस फैसले से भ्रष्टाचारियों और आतंकवादियों की कमर कुछ हद तक टूटती दिखी। देश भर में छापे पड़ने लगे, भ्रष्टाचारी और देशद्रोही प्रवर्तन निदेशालय की राडार पर आने लगे। यहां तक कि बैंकों के कर्मचारियों से लेकर मैनेजर तक की मिलीभगत देखने को मिली, जो बहुत अफसोसनाक बात है। इससे बैंकों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे। बैंकों से लोगों का भरोसा डिगने लगा। खास चहेतों की बैंकों ने पूरी तरह से आवभगत की। देश ने यह भी देखा कि लाइन सिर्फ आम जनता के लिए होती है। सरकार की नीयत और फैसलों को जनता ने अपने संयम का परिचय देते हुए भरपूर सम्मान दिया। इस फैसले का नतीजा आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा।

प्रशांत रंजन, बाबा फरीद कॉलेज, बठिंडा

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First Published on March 8, 2017 4:49 am

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