ताज़ा खबर
 

चौपाल : कांग्रेस की मुश्किल

पार्टियों की हार और जीत लोकतंत्र का हिस्सा है। दिल्ली-बिहार की हार के बाद भाजपा की असम में जीत के अलग मायने हैं। पूर्वोत्तर में यह भाजपा की बड़ी उपलब्धि है।
Author नई दिल्ली | June 1, 2016 05:59 am
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी।

पार्टियों की हार और जीत लोकतंत्र का हिस्सा है। दिल्ली-बिहार की हार के बाद भाजपा की असम में जीत के अलग मायने हैं। पूर्वोत्तर में यह भाजपा की बड़ी उपलब्धि है। इस जीत ने बताया कि स्थानीय मुद्दों और नेताओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता। दो सीटों से 282 सीटें पाने वाली यह पार्टी उत्तर-पूर्व और वामपंथ का गढ़ कहे जाने वाले बाकी राज्यों में भी अपने पांव पसार रही है। विश्लेषणकर्ता बता रहे हैं कि कांग्रेस समाप्त हो रही है इसलिए भाजपा का उदय हो रहा है जबकि ऐसा नहीं है। भाजपा में संगठन क्षमता कांग्रेस से अधिक है। लंबे समय बाद भाजपा की केंद्र में सरकार बनी है। केंद्रीय सत्ता में होने के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश है। उधर कांग्रेस में पार्टी के बजाय परिवार बड़ा हो गया है। राहुल गांधी भारत की राजनीति को साधने में सक्षम नहीं हैं। ‘गांधी’ होने का दबाव है शायद उन पर कि वे चुनाव के समय ही सक्रिय दिखाई देते हैं।

इन चुनावों के बाद राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। देखना होगा कि वे पार्टी को संगठनात्मक रूप से खड़ा करने में कितने सफल होते हैं। कांग्रेस नेतृत्व इस समय हारा हुआ दिखाई दे रहा है। लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से ही उसने हथियार डाल दिए हैं। यह कांग्रेस नेतृत्व की अपरिपक्वता है कि वह एक सशक्त विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पा रहा है। कांग्रेस की साख बीते वर्षों में काफी गिरी है। जिन घोटालों के उजागर होने से कांग्रेस की लोकसभा चुनावों में हार हुई थी उनके खुलासे अब तक कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहे।

गांधी परिवार ने किसी अन्य को नेता बन कर उभरने का मौका नहीं दिया। पार्टी ने परिवार के सामने घुटने टेक दिए हैं। कांग्रेस को इस समय जनाधार वाले नेतृत्व की आवश्यकता है। स्पष्ट है कि नेतृत्व की अक्षमता ही कार्यकर्ताओं को एकजुट नहीं कर पा रही। सत्ता से दूर होते जाने के कारण पार्टी में असंतोष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं वहां भी स्थिति कुछ ठीक नहीं। पार्टी का हर दूसरा मजबूत नेता बागी होकर भाजपा में शामिल हो रहा है।

अपने दो वर्ष के शासन में मोदी सरकार ने कुछ बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं। सामाजिक बदलाव लाने के लिए सरकार ने जो योजनाएं लागू की हैं, उनका बृहत्तर प्रभाव आने वाले समय में देखने को मिलेगा। मोदी लोगों के भीतर सामूहिकता की भावना जगा रहे हैं। वे इंडिया के बजाय भारत पर विशेष जोर दे रहे हैं। राहुल ऐसे मुद्दों पर निस्पृह दिखाई पड़ते हैं, जहां मोदी सोच में उनसे युवतर साबित हो रहे हैं। राहुल गांधी का नेतृत्व कांग्रेस को उसकी खोई साख वापस दिला पाएगा, इसमें संशय है।

’क्षमा सिंह, बीएचयू, वाराणसी

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.