May 24, 2017

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चौपालः स्त्री का हक

किसी सभ्य समाज में मान-मर्यादा, प्रतिष्ठा, शालीनता के साथ किसी स्त्री-पुरुष का रिश्ते में रहना स्वाभाविक है।

Author May 20, 2017 03:12 am
(express Photo)

किसी सभ्य समाज में मान-मर्यादा, प्रतिष्ठा, शालीनता के साथ किसी स्त्री-पुरुष का रिश्ते में रहना स्वाभाविक है। उस रिश्ते के बंधते समय अलग-अलग समुदायों के बीच उसे विवाह या निकाह आदि नामों से जाना जाता है। कहने को ये रिश्ते ‘सात जन्मों के लिए’ होते हैं, लेकिन अगर पहले ही जन्म में कोई खटास आ जाए और उसे संभालना मुमकिन नहीं हो तो ऐसे रिश्ते को खत्म कर देना अनुचित नहीं है। अगर इस हालत में भी रिश्ते को ढोया जाता है तो दोनों पक्षों की ही जिंदगी बोझ बन कर रह जाती है। ऐसे में तलाक एक उपाय के तौर पर सामने आता है।
अब सवाल यह है कि ऐसे रिश्ते को खत्म करने का हक किसे है? क्या यह हक केवल इस पितृसत्तात्मक समाज की गद्दी पर बैठे मर्दों का है? या उन औरतों का भी, जो सुबह सबसे पहले उठ कर रात को सबसे देर से सोती हैं और सब जानते हैं कि वह ऐसा किसके लिए करती है? जो औरतें बिना अपना दर्द बताए किसी भी वक्त केवल अपने मर्दों की खुशी के लिए खुद को नाखुश करती हों, क्या उनके लिए किसी हक की व्यवस्था नहीं है? अगर किसी औरत को शिकायत है तो वह उसे अपने मन में दबा कर सबको ढोती रहती है। लेकिन पुरुष अपनी शिकायत को अचानक रिश्ते को तोड़ने के रूप में सामने पटक देता है। समाज की ओर से थोपी गई इस मानसिक त्रासदी को केवल औरत ही क्यों झेले? यह किसी से छिपा नहीं है कि एक तलाकशुदा औरत की जिंदगी उतनी सहज नहीं रह पाती है, जितनी एक तलाकशुदा पुरुष की।

एक औरत के अपने हक, स्वाभिमान, अभिमान को खोने वजह यह भी बनती है कि वह एक स्त्री होने के नाते केवल अपने पति की संपत्ति मानी जाती है। तलाक के बाद समाज उसे सब कुछ से वंचित मान लेता है और उसे तरह-तरह के लांछनों के निशाने पर रखता है। उसे यह अहसास दिलाया जाता है कि सारी गलती उसी की है और तलाक का कारण केवल वही है। यह पितृसत्तात्मक समाज उस स्त्री को नाम के लिए कुछ देकर उसके सारे हक छीन लेता है, जिसके लिए उसे अपने जन्म से ही लड़ना पड़ा होता है। आज रिश्ते तो बदल गए हैं, लेकिन उसके मायने ज्यों के त्यों हैं। रिश्ते अगर बोझिल हो जाएं तो उसे खत्म करना ही ठीक है। लेकिन उसके बाद भेदभाव किसी एक के साथ न हो, इसकी जिम्मेदारी इसी समाज की बनती है।
’खुशबू, मुकुंदपुर, दिल्ली

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First Published on May 20, 2017 3:12 am

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