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चौपालः शाहबानो की विरासत

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की ग्रीष्मकालीन अवकाश में पांच हजार से अधिक मामलों की सुनवाई की पहल ऐतिहासिक व प्रेरणादायक है।
Author April 7, 2017 03:16 am
भारतीय मुसलिम महिलाएं

भारतीय मुसलिम महिला आंदोलन के अनुसार भारत में 46 फीसद मुसलिम औरतें तीन तलाक का शिकार बनी हैं। हाल ही में मुजफ्फरनगर की एक तलाक-पीड़िता नाजिया खान ने अपने जैसी महिलाओं का एक ‘व्हाट्सएप ग्रुप’ बनाया। चंद दिनों में ही उस जिले की 25 महिलाएं ग्रुप से जुड़ गर्इं। इन्होंने पिछले दिनों वहां के जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। इसमें तीन तलाक, हलाला कुप्रथा और बहु-विवाह को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। मुसलिम महिला आंदोलन के सर्वे के अनुसार 92.1 फीसद औरतें तीन तलाक की समाप्ति चाहती हैं और 91.7 फीसद महिलाएं मुसलिम मर्दों द्वारा किए जाते बहु-विवाहों के खिलाफ हैं।

1980 के दशक में निकाह के 42 साल बाद तीन तलाक का शिकार बनी 68 वर्षीय शाहबानो बेहद मुफलिसी में दिन गुजारते हुए दुनिया छोड़ गर्ईं, पर औरतों को सबसे ज्यादा हक देने का दावा करने वाले मजहब के ठेकेदार जरा नहीं पसीजे। आज शाहबानो की विरासत संभालते हुए गुजरात की जकिया सोमान, दिल्ली की अर्शिया, उत्तर प्रदेश की अतिया साबरी, रेशमा परवीन, शगुफ्ता शाह, रेहाना, रुबीना, परवीन जहां, और अमीना खातून जैसी तलाक-पीड़िता संघर्षशील मुसलिम महिलाएं सर्वोच्च न्यायालय में अपने मौलिक अधिकारों के लिए एक साथ लड़ रही हैं। यह कारवां हर दिन बढ़ता जा रहा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर ने यह मसला सुलझाने के लिए गर्मी की छुट्टियों के नौ दिन तय करके तदर्थ पांंच जजों का संविधान पीठ बनाया है। अब शक नहीं कि मुसलिम महिलाएं कानूनी संरक्षण और सुकून पा सकेंगी।
’अजय मित्तल, मेरठ

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