March 28, 2017

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चौपालः निजता की आड़

निर्वाचन के लिए शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है, लेकिन गलत जानकारी देना प्रत्याशी की अयोग्यता का कारण बन सकता है।

Author March 11, 2017 04:06 am
(प्रतीकात्मक चित्र)

चुनावों में नामांकन पत्र भरते समय प्रत्याशियों से मांगी गई जानकारी को निजता का हवाला देकर न तो छिपाया जा सकता है, न देशवासियों को गुमराह किया जा सकता है। वैसे भी कोई भी डिग्री या प्रमाणपत्र गोपनीय नहीं होता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित प्रमाणपत्रों में ऐसी कौन सी बात है जिसे निजता का मामला बता कर छिपाया जा रहा है? सामान्यत: यह देखने को मिलता है कि जब कोई व्यक्ति परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहता है या फिर अच्छे नंबर से उत्तीर्ण नहीं होता तो वह शर्मिंदगी के चलते ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने में संकोच करता है। लेकिन सच्चाई का पता लग ही जाता है। ऐसे समय उदाहरण के रूप में एक पुराने जमाने के फिल्मी गाने के बोल गुनगुनाने का मन कर रहा है कि ‘लाख छिपाओ छिप न सकेगा राज ये कितना गहरा, दिल की बात बता देता है असली नकली चेहरा।

परीक्षा परिणाम छिपाए नहीं जा सकते हैं। किसी दस्तावेजी कमी या फिर नकल प्रकरण के चलते परिणाम अवश्य रोके जाते हैं जिनका समाधान भी निकाला जाता है। परीक्षा परिणाम सार्वजनिक किए जाते हैं तभी पता चलता है कि कितने उत्तीर्ण हुए, कितने अनुत्तीर्ण और कितनों का परीक्षा परिणाम रोका गया है। हर साल विश्वविद्यालयीन और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणामों की योग्यता सूची उनकी तस्वीर के साथ समाचारपत्रों में छपती है, तब किसी की निजता पर हमला नहीं होता है। देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के लिए किसी भी शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता न होने के बाद भी जन साधारण का यह हक बनता है कि वह किसी प्रत्याशी द्वारा चुनाव आयोग को नामांकन पत्र में दी गई जानकारी की सच्चाई का पता कर सके। निर्वाचन के लिए शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है, लेकिन गलत जानकारी देना प्रत्याशी की अयोग्यता का कारण बन सकता है।

देशहित में जनप्रतिनिधियों की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेज उजागर किए जाने चाहिए । जब लोगों की संपत्ति का खुलासा किया जा रहा है तब अंक-सूची की सच्चाई को क्यों छिपाया जा रहा है? एक तरफ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे की क्रूर घृणित सोच को एक विचारधारा के रूप में महिमामंडित करने के लिए उसे सार्वजनिक किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेजों के खुलासे को निजता से जोड़कर उसे सार्वजनिक करने से रोका जा रहा है जो सरासर गलत है। किसी भी प्रत्याशी के निर्वाचन आयोग को दिए गए शैक्षणिक योग्यता संबंधी विवरण का खुलासा देशहित में सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि असली-नकली का फर्क सामने आ सके। इसमें निजता और गोपनीयता का हवाला दिया जाना आवाम को गुमराह करना होगा।
अजय खरे, नेहरू नगर, रीवा, मध्यप्रदेश

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First Published on March 11, 2017 4:06 am

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