June 26, 2017

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चौपाल: नकल पर नकेल, बेतुके बोल

हैरान करने वाला तथ्य यह है कि पेपर लीक के मामलों में कुछ निजी कोचिंग संस्थानों का हाथ होने की बात भी सामने आई है।

Author March 9, 2017 04:16 am
प्रचीकात्मक चित्र

सरकारी नौकरियों और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक होने और आम शैक्षिक परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर नकल की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में बिहार एसएससी प्रतियोगी परीक्षा और सेना भर्ती परीक्षा में हुई पेपर लीक की घटनाएं इसकी पुष्टि करती हैं। सवाल उठता है कि क्या सरकारी सेवाओं व शिक्षण संस्थानों में नकल के मार्फत सफल होने वाले अयोग्य व्यक्ति अपने पद की गरिमा और महत्त्व समझेंगे? ऐसे कदाचार की मार्फत पदासीन होने वाले लोग क्या हमारी समूची व्यवस्था में भ्रष्टाचार का बीजारोपण करने में जरा भी हिचकिचाएंगे? क्या इन अयोग्य व्यक्तियों के चुने जाने से मेहनतकश छात्रों और प्रतियोगियों का मनोबल नहीं गिरेगा? और भी कई सवाल हैं जिनके संतोषजनक जवाब तभी मिलेंगे जब यह सब बंद होगा।
शुरुआती जांच-पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि इन मामलों में कई बड़े पदाधिकारियों का हाथ रहा है। निश्चित तौर पर इन अधिकारियों की संलिप्तता के बिना यह सब संभव ही नहीं था। सेना भर्ती परीक्षा पेपर लीक के मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने कुछ सेना अफसरों को गिरफ्तार किया गया है और जांच आगे चल रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही यह जांच पूरी होगी और इसके लिए दोषी अफसरों को उचित सजा दी जाएगी।
इस सिलसिले में हैरान करने वाला तथ्य यह है कि पेपर लीक के मामलों में कुछ निजी कोचिंग संस्थानों का हाथ होने की बात भी सामने आई है। ये संस्थान अपना बेहतर रिकॉर्ड छात्रों के सामने पेश करने के लिए इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियों का हिस्सा बन रहे हैं। अपना बेहतर रिकॉर्ड छात्रों के समक्ष रखने से इन्हें भारी-भरकम फीस वसूलने में मदद मिलती है। यह न केवल छात्रों के साथ छलावा है बल्कि इससे देश की युवा पीढ़ी बेकार भी हो रही है। इसलिए, दोषी पाए जाने पर इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि आगे ऐसा करने की सोचने वालों को कानून से कड़ी सजा मिलने के डर का आभास हो सके।
हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली में बढ़ता निजीकरण, गुणवत्ताहीन शिक्षा व सुविधाहीन शिक्षण संस्थान जैसी ढेर सारी खामियां हैं। इन खामियों से निपटने के लिए सरकार नई शिक्षा नीति भी लाने वाली है। देखना होगा कि नई शिक्षा नीति इन चुनौतियों से निपटने में कितनी कारगर होती है और उसमें पेपर लीक और नकल की बढ़ती जा रही समस्या से निपटने के लिए क्या प्रावधान किए जाते हैं।
नितीश कुमार, आइआइएमसी, दिल्ली

 

भाजपा सांसद साक्षी महाराज, योगी आदित्यनाथ और अन्य नेताओं का सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के बावजूद एक समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ व आपत्तिजनक बयान दागने का सिलसिला बेखौफ और बदस्तूर जारी है। ये अपने जहरीले बयानों से ‘टू इन वन’ काम ले रहे हैं। इनका मकसद एक तरफ दो समुदायों में कटुता और दूरियां बढ़ाना है वहीं अपने आकाओं को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करना भी है।
दुख और अफसोस की बात यह भी है कि कुछ टीवी चैनल एक खास मकसद के तहत इनके बयानों को हवा देने का काम कर रहे हैं। इनके आका इनके जहरीले बयानों पर ‘मोगेंबो’ की तरह खुश होते हैं। हां, जब विरोध उठता है तो यह कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि यह उनकी निजी राय है या ऐसा हमारा मत नहीं है। ये डरते इसलिए नहीं कि जब सैंया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का!
आसिफ खान, बाबरपुर, शाहदरा, दिल्ली

साक्षी महाराज के खिलाफ चुनाव आयोग ने जारी किया नोटिस; बढ़ती आबादी पर दिया था सांप्रदायिक बयान

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First Published on March 9, 2017 4:14 am

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