दुनिया मेरे आगे

  • उनके पास वक्त न हुआ

    किरण बेदी समय पर ही बाहर आर्इं। इतनी तेजी से घर से निकलीं कि दुआ-सलाम का भी ठीक से वक्त नहीं मिला। हम उनके साथ-साथ, बल्कि पीछे-पीछे भागते चले...

  • आया ऋतुराज वसंत

    चंचल भला हो लोककथाओं का, उनके मिथकीय चरित्रों और कथा के ताने-बाने का, जिसने समूचे समाज को उत्सवधर्मी बना दिया। हजारों-हजार साल से ये कथाएं...

  • आस्था के आडंबर

    अशोक गुप्ता मैं बेशक एक आस्तिक व्यक्ति हूं और धार्मिक आयोजनों की प्रस्तुति में अंतर्निहित संस्कृति का भावबोध ग्रहण कर सकता हूं। लेकिन धार्मिक कर्मकांड...

  • सबक के बजाय

    महेंद्र राजा जैन मुझे लगता है कि सोलह दिसंबर 2012 की घटना की खौफनाक रात दिल्ली के साथ-साथ देश भर के लोग अभी भूले नहीं...

  • विविधता की जगह

    वरुण शर्मा जिन आदिवासी समुदायों की भाषाएं विलुप्ति के कगार पर हैं, उनके बच्चों को आज एक दोराहे पर खड़ा कर दिया गया है। एक...

  • चुनाव के चेहरे

    एक गाना है- ‘ये मौसम भी गया वो मौसम भी गया, अब तो कहो मेरे सनम फिर कब मिलोगे, मिलेंगे जब हां हां बारिश होगी।’ बॉलीवुड के इस गाने...

  • बचपन के रंग

    विष्णु नागर जिन दिनों हमारे साथी, मित्र, रिश्तेदार ठंड से ठिठुर रहे हैं, हम अपने दो पोतों के पास केरल में हैं, जहां ठंड का...

  • अजमेर में रज़ा

    हर साल अपनी पहचान में कोई न कोई ऐसा प्रसंग छोड़ जाता है, जिससे उसकी यादें, उसकी क्रमिकता हमारे भीतर बनी रहती हैं। बीते वर्ष...

  • वह सुबह

    दिल्ली के पंडारा रोड में मेरे घर के अगल-बगल अनेक बड़े-बड़े अफसर, मंत्री, सांसद रहते हैं, जो एक दूसरे से शायद ही कभी बोलते हैं।...

  • ठगी के ठिकाने

    प्रेमपाल शर्मा नाम हरीचंद। काम ठेली पर हरी सब्जी बेचना। वह अक्सर अंधेरा होने के बाद ही मिलता था। गिनी-चुनी सब्जी, पालक, मेथी, सरसों या...