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दुनिया मेरे आगे

काश किताब खो जाती

मन के किसी कोने में आस थी कि शायद किताब मिल जाए। यह याद था कि प्रेम ने आईएनएस पर नींबू की चाय पीते...

काश किताब खो जाती

मन के किसी कोने में आस थी कि शायद किताब मिल जाए। यह याद था कि प्रेम ने आईएनएस पर नींबू की चाय पीते...

रिश्तों के पैमाने

बात थोड़ी पुरानी हो चली, मगर प्रसंग रोचक है, भारत में रह रही बासठ वर्षीय जेनिफर की सौतेली बहन इक्यासी वर्षीय रोएसाई से बीजिंग...

संवेदना के शहर

महानगरों की बात अब पुरानी हो गई। अब तो बाकी शहरों के बारे में भी इस तरह मिथक कायम हो गए हैं कि वहां...

बालहठ के नए तराने

उसे देख कर मुझे गुरु रवींद्रनाथ की कहानी ‘होमकमिंग’ की पंक्ति याद आई, जो चौदह वर्षीय बच्चे के विषय में कही गई है। वह...

वे पांच दिन

कुछ समय पहले दिल्ली के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों और पश्चिम बंगाल के जाधवपुर विश्वविद्यालय में एक आंदोलन चला- ‘पैड्स अगेंस्ट सेक्सिज्म’। उद्देश्य था महिलाओं..

अहा जिंदगी

एक छोटे शहर से विस्थापित होकर इस महानगर दिल्ली में आ गया हूं। इन बहुमंजिला इमारतों के बीच एक फ्लैट में मेरी दुनिया सिमट...

छवि के बरक्स बनारस

यों ही नहीं कहते कि बनारस में रस घुला है। मस्ती, अल्फाजों में ‘गुरु’ और ‘राजा’ का संबोधन, तारीफ भी गालियों से करना, चाय...

लोकार्पण की माया

पुस्तक लोकार्पण की परंपरा की शुरुआत इस देश में कब हुई, इसके बारे में मुझे अभी तक कुछ विशेष जानकारी नहीं है। लेकिन संभवत:...

समाख्या की साथिनें

हमारी मुलाकात ट्रेन में हुई थी। पहली बार जब मैं उससे मिली तो वह बेहद डरी और जिंदगी से हारी हुई दिख रही थी।...

अश्लीलता के आयाम

हाल ही में राजग सरकार ने इंटरनेट पर अश्लीलता को काबू में करने के लिए गुपचुप तरीके से इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को आठ सौ...

मुफ्त की सलाह

बिन मांगे मुफ्त में सलाह देना शायद हमारा राष्ट्रीय शगल है। विदेशियों के बीच यह धारणा भी है कि भारत में हर व्यक्ति डॉक्टर...

दायरों में आजादी

पड़ोस की सुगंधा दीदी अपनी पढ़ाई के लिए शहर के जिस छात्रावास में रह रही थीं, उसका मुख्य दरवाजा रात को नौ बजे बंद...

खिड़की से ताज

होटल की कांच खिड़की से ताजमहल को देख रहा हूं। वह स्थिर, चित्रजड़ित इमारत की तरह मुझे हमेशा लगा है। वह यहां से एक...

विज्ञापन का परदा

कुछ दिनों से एक नया दुपहिया वाहन लेने बारे में सोच रहा हूं। पिछला दुपहिया लगभग दस साल अपनी सेवा दे चुका है। जानकार...

किताबों का सिकुड़ता कोना

बीस बरस पहले जब मैं देश की राजधानी में आया था, तब दक्षिणी दिल्ली के वसंत लोक स्थित प्रिया सिनेमा हॉल के इर्द-गिर्द खूब...

बन्नो के बहाने

मुंबई उन दिनों बड़ी समृद्ध, बड़ी बख्तावर थी। उर्दू के कई लेखकों से सजी और हिंदी के कई दिग्गजों से पगी। यों लगता था,...

गायब होते गीत

उस दिन रसोई में काम करते हुए अचानक मेरे कानों में एक गीत की आवाज आई- ‘लल्ला लल्ला लोरी, दारू की कटोरी…!’ मैं ये...

कलक्टर की फाइल

तकरीबन बीस-बाईस साल पहले की बात है। स्थानीय पत्रकारिता में इतना दखल था कि शक्ल और नाम से लोग जानते थे। एक दिन तीन...

असहमति की जगह

अजीब-सी बात है। समाज हो या साहित्य, कहीं भी किसी से असहमत होना दिक्कतदेह हो सकता है। असहमत होने का मतलब है कि हुक्का-पानी...

मिट्टी के मोल

हाल में मध्यप्रदेश माटी कला बोर्ड द्वारा आयोजित मिट्टी की कलाकृतियों, बर्तनों की प्रदर्शनी में जाने का मौका मिला। इसी बहाने मिट्टी की याद...

अंधेरे कोने

अफगानिस्तान से पहली मुलाकात मां के जेहन में बसे किस्सों के जरिए हुई थी। बंटवारे के बाद पाकिस्तान की जमीन को दुखी मन से...

लोकतंत्र के आईने में

निवेदिता सिंह काफी जद्दोजहद के बाद हाल ही में आखिर मुझे भी मौका मिला अपने देश के लोकतंत्र के मंदिर को देखने का। उस...

सांध्यवेला में कुछ लिखना

अरुणेंद्र नाथ वर्मा नई पीढ़ी के उन विलक्षण प्रतिभासंपन्न बच्चों की खबरें, जिन्हें चार वर्ष की आयु में ही पूरी गीता कंठस्थ है या...