दुनिया मेरे आगे

  • लाल टाई का गणित

    अभिषेक श्रीवास्तव गणितज्ञ जॉन नैश की एक सड़क हादसे में मौत की खबर जिस वक्त मिली, मैं दिल्ली के हिंदी भवन में बैठा था। वहां...

  • सफर के रंग

    निवेदिता जिंदगी ने दुनिया के कुछ मुल्कों के दो-चार शहरों को देखने का मौका दिया। जब कनाडा के एक प्यारे शहर मिसीसागा पहुंची तो लगा...

  • अच्छे दिनों की आस

    संपत सरल सोलहवीं लोकसभा का चुनाव लड़ते हुए भाजपा ने जुमला उछाला- ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ और मतदाता ने भरोसा करके अपना अमूल्य मत...

  • कुछ अभिकथन

    राजकिशोर यह दंभ मत पालो कि दूसरों को तुमने पहचान लिया है। क्या तुम्हें कोई और पहचान पाया है? कुछ चीजें सोचने में सुंदर लगती...

  • शोध का यथार्थ

    सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी पीएचडी की उपाधि किसी भी विषय के गहन अध्ययन और सूक्ष्म सोच-विचार के बाद अनेक पहलुओं को उजागर करने के लिए दी जाती...

  • स्मृतियों में शरद भाई

    यशवंत कोठारी वे 1977 की सर्दियों के दिन थे। शरद जोशी किसी कवि सम्मेलन के सिलसिले में उदयपुर आए और एक होटल में ठहरे हुए...

  • वाह रे गर्व

    पाणिनि आनंद गर्व बुखार हो जैसे। मुद्दत हुई, हुआ ही नहीं और अब आ गया है तो उतरता नहीं, चढ़ता चला जाता है। और शर्म...

  • समाज का सहयोग

    प्रेमपाल शर्मा नई सरकार ने गद्दी संभालते ही बड़े धुआंधार ढंग से स्वच्छता अभियान शुरू किया है, गांधी से लेकर ईश्वर का नाम लेते हुए।...

  • हवा में विकास

    प्रवीण कुमार सिंह दिल्ली से जब मैंने पश्चिम एक्सप्रेस से गुजरात का रुख किया तो मन में बहुत कौतूहल था। गुजरात के बारे में बहुत...

  • मौसम और आदमी

    विष्णु नागर अब गरमी आ गई है। पहले जो था, अब बदल चुका है। ठंड में कपड़ों से लदे-फदे-दबे रहते थे, अब घर में बनियान-लुंगी...