दुनिया मेरे आगे

  • कॉमरेड

    अजेय कुमार मुझे मालूम था कि उन्हें कैंसर है। लेकिन मेरी इस जानकारी के बारे में उन्हें पता नहीं था। शायद इसीलिए अपने जीवन के...

  • स्वच्छता और पवित्रता

    विष्णु नागर मोदीजी के स्वच्छता अभियान के नतीजे पूरी तरह हमारे सामने आ चुके हैं। स्थिति वही की वही है। यों इस अभियान की विफलता...

  • पहचान खोते शहर

    सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी पहले हर शहर की अपनी संस्कृति थी, पहचान थी; रिवाज था। हर चीज के मिलने का स्थान तय था। कपड़े, अनाज, गहने, फल-सब्जी,...

  • अनचीन्ही प्रतिभाएं

    वीणा शर्मा असगर पच्चीस-तीस साल का युवक है। उसकी छवि दरवेश जैसी लगती है, पर वह मजदूर है। इमारतों में सफेदी का काम करता है।...

  • बैलों का संगीत

    प्रेम सदानंद शाही बात पिछले साल गरमी की है। मैं छुट््िटयों में अपने गांव गया हुआ था। कुशीनगर जनपद के रामकोला कस्बे में हम लोगों...

  • रिक्शे के साथ

    राजेंद्र रवि विद्यालय की शिक्षा पूरी करके मैं गया कॉलेज में प्रवेश लेकर भारतीय साम्यवादी दल की छात्र शाखा अखिल भारतीय छात्रसंघ में शामिल हो...

  • बगैर ताज के ताजपोशी

    श्रीप्रकाश दीक्षित एक तरफ आम भारतीय इसे चुनावी जुमला न मान कर अच्छे दिनों की आस में मरा जा रहा है, तो दूसरी ओर अंगरेजों...

  • तुरंता योग

    सुमन केशरी पिछले दिनों टीवी देखते हुए एक चैनल पर ध्यान अटक गया। वहां ‘राज्य के योगीराज’ रामदेव दो मिनट में कुछ योगासनों के बारे...

  • यह क्रिकेट नहीं

    क्रिकेट के कारण देश की राजनीति में नैतिकता का युद्ध छिड़ गया है। नैतिकता के सवाल हर तरफ हैं लेकिन जवाब की नैतिकता कहीं नहीं...

  • अभाव के गांव

    इस बार बहुत दिनों बाद गांव जाना हुआ। बुंदेलखंड के दक्षिणी छोर पर चंबल और यमुना नदी के किनारे बसे मेरे गांव के पास ही...