दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरेे आगेः शिक्षा का समाज

पिता कहते थे कि शिक्षा प्राप्त कर लोगे तो सब पा जाओगे; मैं शिक्षा नहीं पा सका, इसलिए जीवन में कष्ट है। पिता के...

दुनिया मेरे आगेः तेज धूप में घनी छांव

उन रास्तों की तेज धूप तब धूप नहीं रहती, जब आगे कोई सुंदर संसार आपके इंतजार में हो। तेज धूप में भीगते हुए जब...

दुनिया मेरे आगेः भ्रम के विज्ञापन

क्या हम विज्ञापनों से जी रहे हैं? टीआरपी के हिसाब से चैनल अपने धारावाहिक और अन्य कार्यक्रमों के बारे में फैसला करते हैं। दर्शकों...

दुनिया मेरे आगेः सफर के शोर में

यह कहा जाए कि दिल्ली से बिहार की किसी ट्रेन में बहुत भीड़ थी और उसमें भी भयंकर गरमी और भीड़ ने ट्रेन यात्रा...

दुनिया मेरे आगेः एक और कप

सुहानी सुबह कब होती है? जब आंख खुलने से पहले दिल और आंख को इत्मीनान हो कि सपना पूरा हो चुका है, हमदम जाग...

दुनिया मेरे आगेः धनौल्टी की याद

उस दिन जैसे ही आंख खुली, मैंने अपना सिर कंबल के घुप अंधकार और मासूम गरमाहट से बाहर निकाला और खिड़की की तरफ नजर...

किताब की जगह

किसी भी क्षेत्र के विकास को सिर्फ भौतिक विकास तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि वहां के लोगों के बौद्धिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक...

परवरिश का परिवेश

यह विडंबना है कि अधिकतर मामलों में स्कूल और खुशी का कोई रिश्ता ही नहीं। ‘कैसा रहा स्कूल’, इस सवाल के जवाब में छिपी...

चैत की हवा

बिहार की शराबबंदी का असर आसपास के राज्यों पर कैसा और कितना होगा! अगर हंड़िया बंद करने की बात आई तो संभव है आदिवासियों...

जड़ता की रिवायत

गांव का माहौल एक सामंती परिवेश में जैसा था।

अकेलेपन का अंधेरा

आत्महत्या को समझने के लिए पुलिसिया जांच की जरूरत नहीं होती, बल्कि सामाजिक तौर पर इसकी जांच होनी चाहिए।

बाजार में पानी

अभी सूरज की तपिश बढ़ी नहीं है, लेकिन हौले-हौले उसकी गरमी का अहसास होने लगा है और इसी के साथ पानी का संकट बढ़ने...

दुनिया मेरे आगेः संवेदना की नीधि

जाते-जाते ‘भगवन’ कह गए थे- ‘शाम-शाम लौट आऊंगा, अपने ‘भक्त’ से मिल कर। एकतारा यहीं, तुम्हारे पास छोड़ जाता हूं।’ दोपहर बाद ही निकले...

दुनिया मेरे आगेः दोस्त बनाते रहिए

पड़ोसी एक ऐसा शब्द है, जिसका भूगोल संदर्भ के साथ बदलता रहता है। शहरीकरण की प्रक्रिया और आजीविका के लिए इस शहर से उस...

सुविधा की संस्कृति

मंगलसूत्र में सात मोती होते हैं और इसको किसी स्त्री द्वारा निकालने का बिल्कुल वही अर्थ है, जो ईसाई धर्म में विवाहित स्त्री या...

हाशिये की कला

गायन-वादन में पारंगत ये कलाकार ठाढ़ी और मीरासी नामों से जाने जाते हैं। हालांकि ये मुसलिम धर्मावलंबी है, लेकिन हिंदुओं के सभी शुभ कार्यों...

स्वच्छता का समाज

यह कोई छिपी बात नहीं है कि जगह-जगह थूकने से कई तरह के रोग फैलने की आशंका हमेशा बनी रहती है।

हंसमुख बेगम

फगुनहटी पवन का स्पर्श उसके अंग-अंग में भी गुदगुदी कर सकता था जैसे केदारनाथ अग्रवाल की ‘बसंती हवा’ कभी गेहूं की बालों को गुदगुदाती...

दुनिया मेरे आगेः समाजीकरण के दायरे

एक लंबे अरसे से भारतीय समाज में कुछ ऐसा घटित हो रहा है जो सभी चेतनशील नागरिक को असहज बनाता है।

दुनिया मेरे आगेः गांव की हत्या

पिछले दिनों बिहार के कुछ गांवों में जाने का मौका मिला। एक गांव में तकरीबन बीस साल के बाद गया था। मेरे मन-मस्तिष्क में...

जीवन का पंछी

क्यों हमारे बच्चे आज उन पक्षियों को नहीं पहचानते? क्यों आज सैकड़ों पक्षियों के बीच एक ‘गौरैया दिवस’ मनाने की नौबत आई?

धारणा बनाम तर्क

जब भी देश में आतंकी घटना होती है तो हमारी सरकार जांच और कोई ठोस निष्कर्ष के सामने आए बिना पाकिस्तान का नाम लेकर...

अपनी सफाई

रास्ते से गुजरने वाले लोगों को इससे काफी परेशानी होती है, फिर भी लोग मुंह बिचकाते हुए या नाक पर रूमाल रख कर रोजाना...

दुनिया मेरे आगेः संवाद की संवेदना

पूंजीवादी सिद्धांत का विवेचन करते हुए रामविलास शर्मा ने लिखा है कि ‘कोई भी वाद या व्यवस्था अपने उत्थान में कल्याण को देखती है...