दुनिया मेरे आगे

  • स्वच्छता का परदा

    विनोद कुमार पिछले कुछ समय से स्वच्छता और सफाई को लेकर अजीब तमाशा हो रहा है। मोदीजी ने आह्वान किया और लोग निकल पड़े झाड़ू...

  • दूर के राही

    सुनील मिश्र पिछले महीने विख्यात पार्श्वगायक दिवंगत किशोर कुमार की पुण्यतिथि तेरह अक्तूबर को सरकारी ड्यूटी के हिसाब से एक दिन पहले खंडवा आ गया...

  • तुम अकेली नहीं होगी

    सदफ़ नाज़ प्यारी रेहाना जब्बारी! तुम्हारी मां ‘शोलेह’ के नाम तुम्हारा खत पढ़ा। तुम्हारी फांसी और उसके बाद इस खत से अब पूरी दुनिया तुम्हें...

  • तहजीब के तराने

    सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी बात सत्तर के दशक की है। तब दिल लखनवी बड़े लोकप्रिय थे। ऊंची आवाज और बुलंद तरन्नुम में गजल पढ़ते थे और एक-एक...

  • नफरत के नासूर

    निवेदिता पच्चीस साल पहले भागलपुर जख्मों से भर गया था। एक बार फिर उसके जख्म हरे हो गए। स्मृति भी किस अंधेरे में अपना राज...

  • उलटी बयार

    विश्वंभर शिक्षा में बदलाव के प्रति राज्य सरकारों के सरोकारों और गंभीरता को उनके फैसलों के संदर्भ में देखा-समझा जाना चाहिए। राजस्थान के शिक्षामंत्री ने...

  • खोई हुई दिशाएं

    मधु कांकरिया वह पिछले सप्ताह ही एम्स्टर्डम से मुंबई आई थी, तीन महीने के लिए। पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि वह डच...

  • हाइटेक ठगी

    अजेय कुमार जनसत्ता 17 नवंबर, 2014: बेटे को तरक्की पर जब उसकी कंपनी ने एक महंगा मोबाइल फोन दिया तो मुझे डर लगा रहता था...

  • अंतहीन बाजार

    संदीप जोशी जनसत्ता 15 नवंबर, 2014: बाजार को हर मौके पर मुनाफा कमाने की चाहत रहती है। वहीं उपभोक्ता को बाजार में होड़ से सस्ते...

  • बाजार में बचपन

    शुभू पटवा जनसत्ता 14 नवंबर, 2014: बच्चों के लिए सोचना और काम करना जितना जरूरी है, उतना ही जटिल भी। लेकिन हमारे समाज की मनीषा...