चौपाल

चौपालः नेहरू की विरासत

पांचवें दशक में बनी बच्चों की एक फिल्म ‘जागृति’ में कवि प्रदीप का गीत था: ‘हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस...

चौपालः दो साल

‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ जैसे आकर्षक नारों, यूपीए सरकार की अकर्मण्यता, भ्रष्टाचार व नकारात्मकता से त्रस्त मतदाताओं और मीडिया...

अच्छे दिन कहां

पिछले दो वर्षों में मोदी सरकार ने देश में रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं, जैसे मेक इन...

कोचिंग का कुचक्र

अगर हम औसत सौ विद्यार्थी भी प्रत्येक कक्षा में मानें तो चालीस हजार रुपए प्रतिदिन एक क्लास का और दिन में हमारा टीचर तीन...

नदियों की मुक्ति

जब सत्ता के तार पूंजी से जुड़ जाते हैं और संयोग से इसे धार्मिकता की भी आड़ मिल जाती है, फिर चाहे जंगल हो,...

हिंसा के पीछे

श्रमिक हितों की परवाह किए बिना मोदी सरकार जिस तरह उनके आर्थिक हितों पर लगातार चोट किए जा रही थी, उसके खिलाफ श्रमिकों का...

चौपालः संभावना के शत्रु

एक बच्चे में न जाने कितनी संभावनाएं होती हैं पर हमारा समाज धीरे-धीरे उन संभावनाओं को खत्म कर देता है। उसे एक वस्तु की...

चौपालः प्लेटफार्म की बोली

पिछले दिनों मैं रेलगाड़ी में आरा से बनारस आ रही थी। मेरे पास टिकट तो था पर आरक्षण नहीं था। जबकि इस तरह आज...

मजबूर मजदूर

देश में हर साल दस करोड़ लोग काम की तलाश में अपना घर छोड़ देते हैं जिनमें से करीब साढ़े तीन करोड़ लोग शहरों...

सत्ता का मद

कथित बड़े बाप का बेटा होने और सत्ता के गरूर ने संभवत: रॉकी यादव को ऐसा जघन्य अपराध करने के लिए प्रेरित किया, वरना...

सफलता की भाषा

पर सच्चाई है कि हम सबको भ्रमित किया जा रहा है, क्योंकि कोई भी भाषा कभी भी सफलता में बाधक नहीं बन सकती और...

कथनी बनाम करनी

भले भारत में घोषित इमरजेंसी न हो, पर लोकतांत्रिक संस्थाओं-प्रक्रियाओं को किनारे करने और सुनवाई के रास्तों को बंद करते जाने के तौर-तरीके इमरजेंसी...

जानलेवा तिलिस्म

कुछ जिंदगियां आम होती हैं। उनकी मौत कभी सवाल नहीं उठाती। ऐसी खामोश मौतें सिर्फ दुनियादारी के विलाप का विषय बनती हैं और कुछ...

बेबस अन्नदाता

लातूर में कई साल पहले जबर्दस्त भूंकप आया था। आपदा इस बार भी आई है, मगर सूखे के रूप में। पानी लुट न जाए,...

जल से कल

यह बात तय है कि अच्छी वर्षा का लाभ तभी लिया जा सकेगा जब पहाड़ों को वनस्पतियों, पेड़ों से न सिर्फ पाट दिया जाए,...

किसान की सुध

सरकार ग्रामीणों के लिए अनेक योजनाएं चलाती है लेकिन वे कागजों तक सीमित होती है।

पानी का संकट

सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों को देखें तो स्पष्ट है कि पानी की अत्यधिक खपत संकट का मूल है।

मजदूर की सुध

आज पूंजी का भूमंडलीकरण तो हुआ है, पर श्रम और श्रमिक चेतना का भूमंडलीकरण नहीं हो पाया है।

चौपालः कथनी बनाम करनी

मनमोहन सिंह जैसे कमजोर प्रधानमंत्री ने देश का बेड़ा गर्क कर दिया और मोदी जैसा 56 इंची सीने वाला नेता ही इस देश को...

चौपालः सोच का सूखा

सूखे की वजह सेकुलरता है’- यह पहला वाक्य था उस संदेश का, जो तीन-चार रोज पहले ‘वाट्सएप’ पर पढ़ने को मिला। लिखा था: आपको...

पंचायत की सूरत

वर्ष 1992 में लागू हुए इस संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई स्थान आरक्षित कर दिया।

सूखे में सेल्फी

केंद्रीय जल आयोग की वेबसाइट के अनुसार देशभर में सबसे अधिक बांध महाराष्ट्र में हैं। यहां बांधों की कुल संख्या 1845 हैं, जिनमें से...

सुलगते सवाल

प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार दोनों के आला अधिकारी, वन विभाग, वायु सेना, राष्ट्रीय आपदा राहत बल आदि के छह हजार कमचार्री इसे बुझाने...

चौपालः श्रमिकों के साथ

पिता कहते थे कि शिक्षा प्राप्त कर लोगे तो सब पा जाओगे; मैं शिक्षा नहीं पा सका, इसलिए जीवन में कष्ट है। पिता के...