December 08, 2016

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खुदरा-थोक महंगाई में कमी, उद्योग ने की ब्याज दरों में कटौती की मांग

खाद्य वस्तुओं के वर्ग की मुद्रास्फीति अक्तूबर में हल्की घट कर 4.34 प्रतिशत रही जबकि सितंबर में यह 5.75 प्रतिशत थी।

Author नई दिल्ली | November 15, 2016 21:03 pm
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

खाद्य वस्तुओं के दामों में गिरावट से अक्तूबर महीने में खुदरा और थोक मुद्रास्फीति में कमी आई है। इससे यह उम्मीद बंधी है कि रिजर्व बैंक अगले महीने की मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में एक और कटौती करेगा। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अक्तूबर में घटकर 14 महीने के निचले स्तर 4.20 प्रतिशत पर आ गई। वहीं थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति लगातार दूसरे माह गिरते हुए अक्तूबर में 3.39 प्रतिशत पर आ गयी। खुदरा मुद्रास्फीति जहां सितंबर में 4.39 प्रतिशत थी, वहीं थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में 3.57 प्रतिशत के स्तर पर थी। अक्तूबर में खुदरा मुद्रास्फीति 3.32 प्रतिशत पर रही, जो सितंबर के 3.88 प्रतिशत की तुलना में कम है। अक्तूबर में थोक मुद्रास्फीति घटकर 4.34 प्रतिशत पर आ गई, जो सितंबर में 5.75 प्रतिशत पर थी। उद्योग मंडल फिक्की ने मांग की है कि निवेशकों तथा उपभोक्ता धारणा में सुधार के लिए ब्याज दरों में कटौती की जाए। फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन नेवतिया ने कहा कि आवास, वाहन तथा टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्रों के लिए को आसान वित्त सुगम कराने के लिए रिजर्व बैंक को रेपो दरों में तत्काल आधा प्रतिशत की कटौती पर विचार करना चाहिए। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने पिछले महीने नीतिगत दरों को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत किया था। केंद्रीय बैंक की अगली मौद्रिक समीक्षा 7 दिसंबर को होनी है। इक्रा की वरिष्ठ अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि 500 और 1,000 के नोट को बंद करने के फैसले से आगामी महीनों में मुद्रास्फीति और घट सकती है। अप्रैल सितंबर की अवधि में कारखाना उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 0.1 प्रतिशत पर आ गई है जो एक साल पहले समान अवधि में 4 प्रतिशत रही थी।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि मॉनसून अनुकूल रहने से थोक और खुदरा मुद्रास्फीति नरम रहेगी। ऐसे में केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में कटौती के अपने रुख पर कायम रहना चाहिए। मंगलवार (15 नवंबर) जारी थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों के अनुसार अक्तूबर में सब्जियों के भाव एक साल पहले की तुलना में शून्य से 9.97 प्रतिशत नीचे रहे। जुलाई में सब्जियां 28.45 प्रतिशत ऊंची चल रही थीं। अक्तूबर में प्याज के थोक भाव 65.97 प्रतिशत नीचे थे। वैसे इस दौरान सामान्य उपभोग की सब्जी आलू में मुद्रास्फीति का दबाव 60.58 प्रतिशत था। इसी दौरान फलों के भाव पिछले साल से 6.45 प्रतिशत ऊंचे थे। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार दालों के भाव अब भी ऊपर है और आलोच्य अवधि में दालों की मुद्रास्फीति 21.80 प्रतिशत थी। अक्तूबर में विनिर्मित वस्तुओं के वर्ग में थोक मुद्रास्फीति 2.67 प्रतिशत पर आ गयी जबकि सितंबर में यह 2.48 प्रतिशत थी। चीनी के थोक भाव इस दौरान एक साल पहले की तुलना में 29.63 प्रतिशत ऊंचे थे जबकि पेट्रोल का भाव 3.57 प्रतिशत बढ़ा। अगस्त के थोक मूल्य सूचकांक के संशोधित आंकड़ों के अनुसार उस माह की मुद्रास्फीति 3.85 प्रतिशत थी जबकि प्रारंभिक आंकड़ों में यह 3.74 थी।

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First Published on November 15, 2016 3:49 pm

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