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केंद्रीय बजट: लोकलुभावन से कॉरपोरेट मनभावन की ओर

बुनियादी ढांचे व सामाजिक कल्याण के लिए खर्च में संतुलन पर जोर देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को संसद में 2015-16 का आम बजट पेश किया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की अगुआई वाली सरकार गरीबों की हमदर्द होने के साथ उद्योग की हितैषी है। बकौल जेटली उनके सामने चुनौती वृद्धि व […]
Union Budget: संसद में 2015-16 का आम बजट पेश, व्यक्तिगत आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं, कंपनी कर की दर चार साल के लिए पांच फीसद घटाई। (फ़ोटो-पीटीआई)

बुनियादी ढांचे व सामाजिक कल्याण के लिए खर्च में संतुलन पर जोर देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को संसद में 2015-16 का आम बजट पेश किया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की अगुआई वाली सरकार गरीबों की हमदर्द होने के साथ उद्योग की हितैषी है। बकौल जेटली उनके सामने चुनौती वृद्धि व राजकोषीय घाटे पर अंकुश के लिए संतुलन बैठाने की है। वित्त मंत्री ने कहा-हमें समाज कल्याण के लिए पैसा रखना होता है और हमें राज्यों को भी धन देना होता है। यह संतुलन बैठाने की गतिविधि है। हमें बुनियादी ढांचा बनाना है और साथ ही राजकोषीय घाटे का भी ध्यान रखना है।

वित्त मंत्री ने आम बजट में व्यक्तिगत आयकर दरों में तो कोई बदलाव नहीं किया है लेकिन देश में निवेश आकर्षित करने के लिए कंपनी कर की दर अगले चार साल के दौरान पांच फीसद घटाकर 25 फीसद करने की घोषणा की है। कंपनियों की आय पर कर की दर अभी 30 फीसद है। सरकार ने संपत्ति कर समाप्त करने का प्रस्ताव भी किया है। इससे होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए इसकी जगह एक करोड़ से अधिक की सालाना आय वाले अमीरों पर दो फीसद अतिरिक्त अधिभार लगा दिया गया है। साथ ही बजट में सेवाकर की दर दो फीसद बढ़ाकर 14 फीसद कर दी गई है। जिससे लगभग सारी सेवाएं महंगी हो जाएंगी।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पहले पूर्ण बजट में लोकलुभावन घोषणाओं से बचा गया है। 2015-16 के लिए आयकर की दरों में और उनके स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अरुण जेटली ने मध्यम आय वर्ग को कुछ राहत देते हुए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर मिलने वाली आय कर छूट को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए कर दिया है। इसी तरह अब स्वास्थ्य बीमा योजना में कवर नहीं होने वाले 80 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के मामले में सालाना 20,000 के बजाय 30,000 रुपए के चिकित्सा खर्च पर आयकर छूट दी जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि विभिन्न आयकर रियायतों को मिलाकर अब आयकर दाताओं को 4.44 लाख रुपए तक की छूट उपलब्ध होगी।

बजट से धूम्रपान व अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल और महंगा होगा। सेवाकर में वृद्धि से होटलों में खाना व ठहरना, हवाई यात्रा, केबल व डीटीएच सेवाएं, ब्यूटी पार्लर में जाना, कुरियर सेवा, क्रेडिट व डेबिट कार्ड से संबंधित सेवाएं, ड्राइक्लीनिंग, स्टाक ब्रोकिंग, संपत्ति प्रबंधन व बीमा और कई तरह की अन्य गतिविधियां महंगी हो जाएंगी। जो वस्तुएं सस्ती हुई हैं उनमें चमड़े के फुटवियर, स्थानीय स्तर पर विनिर्मित मोबाइल, कंप्यूटर टैबलेट, माइक्रोवेव, मूंगफली का मक्खन, पैकेटबंद फल, एंबुलेंस सेवाएं और अगरबत्ती शामिल है।

जेटली ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहन की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि 65 एमएम की लंबाई तक की सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में 25 फीसद की बढ़ोतरी की गई है। अन्य लंबाई की सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में 15 फीसद वृद्धि की गई है। सिगार, चुरुट व सिगारिलोस पर भी इतनी ही बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। पान मसाला, गुटखा व अन्य तंबाकू उत्पादों पर संयोजित शुल्क योजना में बदलाव किया गया है। बजट प्रस्तावों के मुताबिक, कट तंबाकू पर उत्पाद शुल्क 60 से बढ़ाकर 70 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया गया है।

हालांकि वित्त मंत्री ने आम आदमी को मूल्यवृद्धि से राहत देते हुए रोजाना के आम इस्तेमाल की वस्तुओं पर शुल्कों में कमी की है। 1,000 रुपए से अधिक के चमड़े के जूते चप्पल सस्ते होंगे। इन पर उत्पाद शुल्क 12 से घटाकर 6 फीसद किया गया है। पैकेटबंद फल व सब्जियां भी सस्ते होंगे। इनकी प्री कूलिंग, पकाने, खुदरा पैकिंग व लेबलिंग को सेवाकर से छूट दी गई है। इसी तरह स्थानीय स्तर पर विनिर्मित मोबाइल फोन, एलईडी-एलसीडी पैनल, एलईडी लाइट और एलईडी लैंप पर उत्पाद शुल्क में कटौती की गई है। माइक्रोवेव अवन भी सस्ता होगा। इसके विनिर्माण में काम आने वाले प्रमुख कलपुर्जे मैग्नेट्रॉन को सीमा शुल्क से छूट दी गई है। पहले इस पर पांच फीसद का सीमा शुल्क लगता था। रेफ्रिजरेटर की कीमतों में भी कमी आ सकती है। इसके विभिन्न कलपुर्जों पर आयात शुल्क घटाया गया है।

इसी तरह सोलर वाटर हीटर के दाम भी घटेंगे। इस पर उत्पाद शुल्क बदलकर सेनवैट क्रेडिट के बिना 12 फीसद से शून्य, वहीं सेनवैट क्रेडिट के साथ इसे 12.5 फीसद किया गया है। अगरबत्ती के दाम भी कम होंगे। इन पर अब उत्पाद शुल्क नहीं लगेगा। पेसमेकर की कीमतों में भी कमी आएगी। इसके विनिर्माण में काम आने वाली कुछ विशेष वस्तुओं को शुल्क से छूट दी गई है। एंबुलेंस व एंबुलेंस सेवाओं के दाम भी घटेंगे। ऐसे वाहनों की चेसिस पर उत्पाद शुल्क को 24 से घटाकर 12.5 फीसद कर दिया है। वहीं मरीजों के लिए दी जाने वाली सभी एंबुलेंस सेवाआें को सेवाकर की छूट मिलेगी। संग्रहालय, चिड़ियाघर, राष्ट्रीय पार्कों, वन्य जीव अभयारण्य या बाघ अभयारण्य जाना अब सस्ता होगा। वित्त मंत्री ने ऐसी गतिविधियों पर सेवाकर की छूट दी है।

जेटली ने शनिवार को अपनी सरकार का वित्तीय वर्ष 2015-16 का 17,77,477 करोड़ रुपए का बजट लोकसभा में रखा। 177 खरब के इस खर्च में योजनागत मद के लिए 46 खरब 52 अरब की रकम का प्रावधान है। जबकि 131 खरब 22 अरब रुपए की राशि गैरयोजनागत मद में खर्च की जाएगी। यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2014-15 के संशोधित बजट अनुमान के आसपास ही है। खर्च की पूर्ति के लिए वित्त मंत्री ने 144 खरब 94 अरब रुपए की आमदनी विभिन्न केंद्रीय करों से होने का अनुमान जताया है। इसमें से 52 खरब 39 अरब राज्यों को उनके हिस्से के कर राजस्व के रूप में दिए जाएंगे।

इस तरह जेटली के पास बचेंगे महज 91 खरब 98 अरब रुपए। केंद्र सरकार को कर राजस्व के अलावा दूसरे स्रोतों से भी 22 खरब 17 अरब रुपए की आमदनी का अनुमान है। इस तरह बजट में 52 खरब 59 अरब का घाटा छोड़ दिया गया है। जिसकी भरपाई वित्तमंत्री को कर्ज लेकर करनी होगी। बजट का यह राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 3.9 फीसद के बराबर है। जबकि बजट में राजस्व घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 2.8 फीसद रहने की संभावना जताई गई है। वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को अगले तीन साल के दौरान घटाकर तीन फीसद पर लाने की घोषणा की है।

विदेशों में जमा कालेधन को अब तक देश में वापस न ला पाने के कारण मोदी सरकार विपक्ष की आलोचनाओं का लगातार सामना कर रही है। अपने बजट भाषण में अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर खुलकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि नया कानून बनाया जाएगा। जिसमें विदेशों में रखी गई संपत्ति को अपराध माना जाएगा और इस तरह की छुपाई गई आय और संपत्ति पर 300 फीसद तक का जुर्माना देना होगा। इसमें समाधान की छूट भी नहीं होगी। इस तरह की संपत्ति और आय पर अधिकतम दर से कर लगाया जाएगा और किसी तरह की कटौती और छूट नहीं दी जाएगी।

विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के मकसद से जेटली ने विवादित सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियमों (गार) के क्रियान्वयन को दो साल के लिए टाल दिया। बजट में सामाजिक क्षेत्र की योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के लिए आबंटन बढ़ाने के साथ ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए 70,000 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है। वित्त मंत्री ने लोगों को सोना खरीदने से दूर करने के प्रयास स्वरूप कर मुक्त ढांचागत बांड फिर से जारी करने और सावरेन स्वर्ण बांड शुरू करने की भी घोषणा की है। इस पर निर्धारित दर पर ब्याज देय होगा। विमोचन के समय बांड के अंकित मूल्य पर नकदी में राशि का भुगतान किया जाएगा।

गरीब और वंचित तबके से जुड़ी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में शिक्षा के लिए 68,968 करोड़ रुपए, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 33,152 करोड़ रुपए, मनरेगा सहित ग्रामीण विकास के लिए 77,526 करोड़ रुपए और आवास एवं शहरी विकास के लिए 22,407 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा गया है। रक्षा क्षेत्र का बजट 11 फीसद बढ़ाकर 2,46,727 करोड़ रुपए किया गया है। चालू वित्त वर्ष के दौरान रक्षा क्षेत्र के लिए 2,22,370 करोड़ रुपए बजट आबंटन किया गया था।
उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि 8 से 8.5 फीसद और जल्द ही दहाई अंक तक पहुंचने की उम्मीद है।

जेटली ने कहा कि वृहद आर्थिक स्थायित्व के साथ गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और टिकाऊ द्विअंकीय आर्थिक वृद्धि की स्थिति को बहाल किया गया है। जेटली के मुताबिक, देश में पासा पलटने वाले दो सुधारों को शुरू किया जा रहा है। पहला- वस्तु व सेवाकर (जीएसटी), जिसे एक अप्रैल 2016 से अमल में लाया जाएगा। यह अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होगा। दूसरा- जन-धन खाता, आधार और मोबाइल की तीन तकनीक आधारित योजनाओं का इस्तेमाल सरकारी सहायता के नकद हस्तांतरण में किया जा रहा है। इससे सहायता के दुरुपयोग और लक्षित व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

वित्त मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष पांच चुनौतियां गिनार्इं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आय दबाव में है। ढांचागत परियोजनाओं में निजी क्षेत्र का निवेश कमजोर है। विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट, राज्यों को केंद्रीय करों में अधिक हिस्सा मिलने से संसाधनों की तंगी और राजकोषीय अनुशासन को बनाए रखना ये पांच चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में तमाम चुनौतियों के बावजूद 4.1 फीसद के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। राजकोषीय घाटे को दो साल के बजाए अगले तीन साल के दौरान जीडीपी के तीन फीसद पर लाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

उन्होंने सबसिडी को तर्कसंगत बनाने पर जोर दिया। सबसिडी को सीधे लक्ष्य तक पहुंचाने और दुरुपयोग रोकने के लिए शुरू में वजीफे के तौर पर दी जाने वाली सहायता को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजना के तहत लाया गया। अब दूसरे लाभ भी इसमें शामिल किए जा रहे हैं। एलपीजी सबसिडी सहित विभिन्न सहायता योजनाओं का लाभ इसके तहत आने से कुल 10.3 करोड़ लोग इसके दायरे में आ चुके हैं। जेटली ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 5,300 करोड़ रुपए आबंटित किए हैं। इसमें जल संभरण और लघु सिंचाई योजनाओं को समर्थन दिया जाएगा।

लघु और सीमांत किसानों पर विशेष ध्यान देते हुए वित्त मंत्री ने ग्रामीण ढांचागत विकास कोष (आइआइडीएफ) में 25,000 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव किया है। यह कोष नाबार्ड के तहत गठित किया गया है। इसके अलावा दीर्घकालिक ग्रामीण ऋण कोष के लिए 15,000 करोड़ रुपए, अल्पकालिक सहकारी ग्रामीण ऋण पुनर्वित्त कोष के लिए 45,000 करोड़ रुपए और अल्पकालिक आरआरबी पुनर्वित्त कोष के लिए 15,000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया गया है।

उन्होंने कहा कि 2015-16 के दौरान कृषि ऋण वितरण का 8.5 लाख करोड़ रुपए का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने सूक्ष्म व लघु इकाइयों और छोटे कारोबारियों की वित्त संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए 20,000 करोड़ रुपए की राशि से सूक्ष्म इकाई विकास पुनर्वित्त एजंसी यानी मुद्रा बैंक बनाने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लघु वित्त संस्थानों को पुनर्वित्त सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 3,000 करोड़ रुपए का ऋण गारंटी कोष बनाने की भी घोषणा की है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना नाम से एक नई बीमा योजना की घोषणा की गई है। इस योजना में मात्र 12 रुपए सालाना प्रीमियम पर देश का कोई भी नागरिक दो लाख रुपए तक के दुर्घटना बीमा का हकदार होगा। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से अटल पेंशन योजना की घोषणा की गई है। जिसमें योगदान के अनुसार पेंशन की सुविधा दी जाएगी।

बजट में 18 से 50 वर्ष के आयु वर्ग में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना की भी घोषणा की गई है। इसमें स्वाभाविक और दुर्घटना दोनों तरह से होने वाली मौत पर दो लाख रुपए की बीमा राशि मिलेगी। इसके लिए 330 रुपए का सालाना प्रीमियम चुकाना होगा। जेटली ने कहा कि सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) दोनों तरह के कोष में पड़ी कुल 9,000 करोड़ रुपए की राशि को एक अलग कोष में डाला जाएगा। जिसका इस्तेमाल वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जाने वाली सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रीमियम पर दी जाने वाली सहायता में किया जाएगा।

उन्होंने 20,000 करोड़ रुपए सालाना प्रवाह के साथ राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआइआइएफ) बनाने की भी घोषणा की। ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए वित्त मंत्री ने सड़कों के लिए 14,031 करोड़ रुपए और रेलवे को दी जाने वाली सकल बजटीय सहायता 10,050 करोड़ रुपए बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि 2015-16 में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां 80,844 करोड़ रुपए अधिक खर्च कर कुल 3,17,889 करोड़ रुपए का पूंजी व्यय करेंगी।

वित्त मंत्री ने ढांचागत विकास के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) योजनाओं के मॉडल की समीक्षा और उसमें नई जान फूंकने की भी घोषणा की। उन्होंने रेल, सड़क और सिंचाई क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए कर मुक्त ढांचागत क्षेत्र बांड जारी करने की इजाजत देने की मंशा भी जाहिर की। सभी को बिजली उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए सरकार ने 4,000 मेगावाट की पांच नई अल्ट्रा मेगा बिजली परियोजनाएं स्थापित करने की भी घोषणा की है।

देश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने एक लोक ऋण प्रबंधन एजंसी स्थापित करने का प्रस्ताव किया है। देश के बाहरी ऋण और घरेलू ऋण दोनों की ही देखरेख इस एजंसी के तहत लाई जाएगी। वित्त मंत्री ने उपभोक्ता जिंस बाजारों का नियमन करने वाले वायदा बाजार आयोग और शेयर बाजार नियामक सेबी दोनों का विलय करने का भी बजट में प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि इससे उपभोक्ता जिंस वायदा बाजार और बड़े पैमाने पर होने वाली सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। जेटली ने अशोक चक्र के निशान के साथ देश में ही सोने के सिक्के बनाने की घोषणा की।

कालेधन से जुड़े लेनदेन पर अंकुश लगाने के लिए उन्होंने एक नए और व्यापक बेनामी सौदा (निरोधक) विधेयक संसद के चालू सत्र में ही पेश करने की घोषणा की। इस कानून के तहत बेनामी सौदों के जरिए खरीदी गई संपत्ति खरीदने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। इससे रीयल एस्टेट क्षेत्र में बेनामी संपत्ति के तौर पर रखे जाने वाले कालेधन पर अंकुश लगेगा। इस कड़ी में एक और कदम के तहत एक लाख रुपए से अधिक के लेनदेन पर स्थाई खाता संख्या (पैन) का उल्लेख अनिवार्य कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि कर चोरी का असर कम से कम करने के लिए 22 वस्तुओं पर कई तरह के इनपुट, कच्चे माल, मध्यवर्ती और कलपुर्जों पर आयात शुल्क की मूल दर में कमी का प्रस्ताव है। बड़े अमीरों पर संपत्ति कर समाप्त करने से जहां 1,008 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान होगा वहीं दो फीसद के अतिरिक्त अधिभार से 9,000 करोड़ रुपए प्राप्त होंगे। विवेकाधीन अधिकारों के इस्तेमाल की गुंजाइश को दूर करते हुए जेटली ने इसके लिए पांच करोड़ रुपए की सीमा को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए कर दिया है।

जेटली ने सेवाकर पर लगने वाले तीन फीसद के शिक्षा उपकर सहित सेवाकर की दर को मौजूदा 12.36 फीसद से बढ़ाकर एकमुश्त 14 फीसद कर दिया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी क्रियान्वयन की सुविधा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। वित्त मंत्री ने उत्पाद शुल्क पर लगने वाले शिक्षा और सेकंडरी व उच्च शिक्षा उपकर को उसमें समाहित करते हुए केंद्रीय उत्पाद शुल्क की सामान्य दर को 12.36 फीसद से बढ़ाकर 12.5 फीसद कर दिया है। मूल्यानुसार लगने वाली उत्पाद शुल्क की 12 फीसद से कम और 12 फीसद से ऊंची दर में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है।

बजट में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआइआइ) पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) प्रावधानों को भी तर्कसंगत बनाया गया है। एफआइआइ को शेयरों की खरीद-फरोख्त से होने वाले पूंजीगत लाभ पर जो निम्न दर से कर लगता है, उस पर अब मैट लागू नहीं होगा। आइटीए वस्तुओं के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली, पापुलेटिड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स को छोड़कर सभी वस्तुओं को विशेष अतिरिक्त शुल्क से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि यह छूट वास्तविक इस्तेमाल की शर्त पर होगी। कुछ अन्य आयातों और कच्चे माल पर भी विशेष अतिरिक्त ड्यूटी को कम किया जाएगा।

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