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लोगों में नए कर का डर, बाजार के मुनाफे की डगर

व्यापारियों और छोटा-मोटा कारोबार करने वालों को लगता है कि एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद हर चीज का दाम बढ़ जाएगा।
Author नई दिल्ल | June 29, 2017 01:49 am
प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल)

सुमन केशव सिंह

वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को लेकर देश भर के बाजारों में माहौल गरम है। व्यापारियों और छोटा-मोटा कारोबार करने वालों को लगता है कि एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद हर चीज का दाम बढ़ जाएगा। ग्राहकों के इस डर का लाभ उठा कर कई आॅनलाइन शॉपिंग साइट और खुदरा व्यापारी भी इस मौके को भुनाने में जुट गए हैं। मगर जानकारों की मानें तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई खुदरा व्यापारी और खुदरा सामानों की कंपनियां अपने स्टॉक में रखा सालों पुराना माल ऊंची कीमत में बेच कर मोटा मुनाफा कमाने में जुटी हैं।
महत्त्वपूर्ण बात यह है खुदरा माल बेचने वालों ने शहर में बड़े फ्लैक्स और होर्डिंग लगा रखे हैं। वे 50 से 60 फीसद तक दामों में कमी का दावा कर रहे हैं। शहर में ऐसे कई खुदरा कारोबारी हैं जो जीएसटी को लेकर लोगों को सस्ती चीजों का प्रलोभन दे रहे हैं और जीएसटी के बाद इन सामानों की कीमत में भारी इजाफे का डर दिखा रहे हैं। दरियागंज ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल बताते हैं कि शहर में लोगों को जीएसटी के नाम पर ठगने का धंधा चल रहा है। ये खुदरा कारोबारी अपना पुराना, स्क्रेच लगा और मियाद निकल चुके सामान ग्राहकों को बेच कर मूर्ख बना रहे हैं और लगभग बेकार चीजों की ऊंची कीमत वसूल रहे हैं। अग्रवाल कहते हैं कि हालांकि इस प्रकार से बाजार को भ्रमित करने वालों में कई बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।

जब इस बात की सच्चाई पता की गई तो यह बात सामने आई कि जीएसटी की आड़ में लोगों को पुराना माल बेचा जा रहा है। नोएडा सेक्टर-18 में इलेक्ट्रानिक सामान के बड़े शोरूम में कंपनी बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगा कर यह बता रही है कि जीएसटी की बढ़ी कीमतों के आने से पहले वह अपना सामान 50 फीसद कम दाम पर बेच रही है। जब वहां एक टीवी का दाम पूछा गया तो कंपनी के कर्मचारी ने पहले बताया कि जीएसटी के कारण दामों में भारी कटौती की गई है। सौदा तय हुआ और स्टाक में नए आए टीवी की मांग की, तब जाकर यह बात सामने आई कि वह पुराने टीवी पर यह छूट दे रहे हैं। इसी टीवी की कीमत एक महीने पहले 30 हजार थी, जीएसटी के बाद की कीमत 36 हजार से अधिक बताई जा रही थी लेकिन शोरूम में डिस्प्ले वाली टीवी की कीमत 28 हजार थी। जब यह पूछा गया कि जीएसटी तो एक जुलाई से लागू होना है, यदि आॅफ दिया जा रहा है तो सभी सामानों पर क्यों नहीं? तब उन्होंने बताया कि केवल शोरूम में प्रदर्शित सामानों पर ही यह छूट है।

कंपनी के एक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी उन बेकार चीजों को बेच रही है जो लगभग दो सालों से यहां शोरूम में पड़ा इनका कोई खरीदार नहीं मिल रहा है।उधर, जीआइपी मॉल में कैमरे के विभिन्न ब्रांडों के व्यापारी प्रकाश सिंह पाटनी कहते हैं कि यह अभी तक किसी को कुछ पता नहीं कि चीजों के दामों पर कितना फर्क पड़ेगा। फिर भी यदि 28 फीसद जीएसटी भी इलेक्ट्रॉनिक और लग्जरी चीजों पर लगता है तो भी यह कुल टैक्स में तीन फीसद तक ही इजाफा होगा। पाटनी ने बताया उत्पादक कंपनी की ओर से जीएसटी को लेकर अभी कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं और न ही उनकी ओर से कोई पेशकश हुई है।दरियागंज ट्रेडर एसोसिएशन के अध्यक्ष बताते हैं जीएसटी की मार ग्राहकों से ज्यादा खुदरा व्यापारियों पर पड़ेगी। अभी वे दिल्ली में 12.5 फीसद वैट और 12.5 फीसद उत्पाद शुल्क देते हैं। यदि इनमें अधिकतम 28 फीसद का इजाफा होता है तो भी केवल तीन फीसद होगा। लेकिन जीएसटी का बोझ मुख्य रूप से व्यापारियों पर पड़ेगा

परेशान हैं व्यापारी भी
व्यापारियों की चिंता है कि नई कर प्रणाली पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। 70 साल के गुरुबचन सिंह कहते हैं यह सीखना अब मेरे बस की बात नहीं। अगर इसके लिए एक कंप्यूटर आॅपरेटर रखा जाए तो वह 25 हजार रुपए मांगता है। इस कर प्रणाली के लिए कंप्यूटर लेना होगा। इसके अलावा जीएसटी की सॉफ्टवेयर कंपनी लोगों से 18 से 25 हजार वसूल रही है। यानी जीएसटी लागू करने के लिए हर व्यापारी को कम से कम एक लाख रुपए खर्च करना होगा। जीएसटी के अनुसार दो महीने से पुराने स्टॉक पर कारोबारियों का 40 फीसद का नुकसान हो रहा है।
ऊंची कीमत, पुराना माल
दरियागंज ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल बताते हैं कि शहर में लोगों को जीएसटी के नाम पर ठगने का धंधा चल रहा है। ये खुदरा कारोबारी अपना पुराना, स्क्रेच लगा और मियाद निकल चुके सामान ग्राहकों को बेच कर मूर्ख बना रहे हैं और लगभग बेकार चीजों की ऊंची कीमत वसूल रहे हैं। अग्रवाल कहते हैं कि हालांकि इस प्रकार से बाजार को भ्रमित करने वालों में कई बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।

 

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