December 11, 2016

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मिस्त्री को पूरा अधिकार मिला हुआ था, उन्होंने बोर्ड का भरोसा खो दिया: टाटा संस

टाटा समूह की कंपनियों की प्रवर्तक कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि मिस्त्री के कार्यकाल के दौरान बार-बार समूह की संस्कृति और परंपराओं के विरुद्ध कार्य हुए।

Author मुंबई | October 27, 2016 20:45 pm
टाटा समूह ने पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री। (PTI Photo/File)

टाटा समूह ने साइरस मिस्त्री के आरोपों को ‘निराधार और दुर्भावनापूर्ण’ करार देते हुए गुरुवार (27 अक्टूबर) को उनकी तीखी आलोचना की और कहा कि मिस्त्री को बतौर चेयरमैन समूह तथा उसकी कंपनियों को नेतृत्व प्रदान करने के पूरे अधिकार दिए गए थे पर उन्होंने निदेशक मंडल के सदस्यों का भरोसा खो दिया था। मिस्त्री द्वारा निदेशक मंडल के सदस्यों को लिखे गोपनीय पत्र को सार्वजनिक किए जाने पर समूह की धारक कंपनी टाटा संस ने अफसोस जताया है। इसी पत्र में मिस्त्री ने कंपनी की संचालन व्यवस्था और निर्णयों पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। धारक कंपनी की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया है कि ‘यह पत्र निदेशक मंडल के सदस्यों को लिखा गया था जिसको पूरी तरह गोपनीय बताते हुए भेजा गया था लेकिन उसे अनुचित और अशोभनीय तरीके से सार्वजनिक कर दिया गया।’ पूर्व चेयरमैन ने यह पत्र पद से हटाए जाने के एक दिन बाद लिखा था।

टाटा समूह की कंपनियों की प्रवर्तक कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि मिस्त्री के कार्यकाल के दौरान बार-बार समूह की संस्कृति और परंपराओं के विरुद्ध कार्य हुए। टाटा संस ने एक बयान में कहा, ‘पत्र में निराधार और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए गए थे। इसके जरिये टाटा समूह, टाटा संस के निदेशक मंडल तथा टाटा समूह की कई कंपनियों तथा कुछ सम्मानित व्यक्तियों के ऊपर आक्षेप लगाया गया।’ कंपनी ने मिस्त्री के इस दावे को खारिज कर दिया कि वह ‘निरीह’ चेयरमैन बन गए थे। बयान के अनुसार, ‘कार्यकारी चेयरमैन के रूप में उन्हें समूह तथा उसकी कंपनियों की अगुवाई के लिए पूरा अधिकार दिया गया था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनको पद से हटाये जाने के बाद ही पूर्व चेयरमैन के विभिन्न क्षमताओं के तहत एक दशक से अधिक समय तक किए गए कारोबारी निर्णय को लेकर आरोप लगाए गए और तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया।’

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बयान के अनुसार टाटा संस के निदेशक मंडल ने अपने चेयरमैन को अवसरों तथा चुनौतियों का प्रबंधन करने के लिये पूरी स्वायत्ता प्रदान की। हालांकि पूर्व चेयरमैन के कार्यकाल के दौरान बार-बार समूह की संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ कार्य हुए। टाटा संस ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मिस्त्री ने कई कारणों से निदेशक मंडल का भरोसा खोया।’ बयान के मुताबिक मिस्त्री 2006 से कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल थे और उन्हें नवंबर 2011 में डिप्टी चेयरमैन नियुक्त किया गया। औपचारिक रूप से उन्हें 28 दिसंबर 2012 को चेयरमैन नियुक्त किया गया। वह समूह के साथ विभिन्न कंपनियों की संस्कृति, परंपराओं, कामकाज का ढांचा, वित्तीय एवं परिचालन अनिवार्यताओं से वाकिफ थे। मिस्त्री के कई आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए टाटा संस ने कहा, ‘यह अक्षम्य है कि मिस्त्री ने कर्मचारियों की नजर में समूह की छवि धूमिल करने का प्रयास किया।’

टाटा संस ने मिस्त्री के पत्र को व्यक्तियों तथा कंपनी के निदेशक मंडल के खिलाफ आरोप लगाने का प्रयास करार दिया और कहा कि ऐसा कर उन्होंने कारपोरेट कामकाज के नियमों की उपेक्षा की जबकि उनसे उम्मीद थी कि वे पद पर बने रहते, इसे बरकरार रखेंगे। समूह ने कहा कि कई रिकॉर्ड हैं जो यह बताते हें कि उनके द्वारा लगाये गये आरोप अवांछित हैं। बयान के अनुसार, ‘अगर जरूरत पड़ी तो इन रिकार्डों का उपयुक्त मंचों पर खुलासा किया जाएगा, टाटा संस और समूह कंपनियों के जिम्मेदार निदेशक मंडल के निर्णय को न्यायसंगत बताया जाएगा।’ मिस्त्री को पद से हटाए जाने के कारण बताते हुए कंपनी ने कहा, ‘टाटा संस के निदेशकों ने बार-बार कुछ कारोबारी मुद्दों और चिंताओं को लेकर सवाल उठाये थे। टाटा ट्रस्ट के न्यासी मिस्त्री के साथ विश्वास की बढ़ती कमी को लेकर चिंतित हो रहे थे लेकिन इन सबका समाधान नहीं किया गया।’ टाटा संस के निदेशक मंडल ने अपने सामूहिक सोच-विचार के आधार पर अपने चेयरमैन को उस रूप से हटाने का फैसला किया।

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बोर्ड के निर्णय का बचाव करते हुए कंपनी ने कहा कि उसके निदेशकों में विभिन्न क्षेत्रों के चर्चित हस्तियां हैं। बयान के अनुसार, ‘यह ऐसे लोगों का समूह नहीं है जिनसे कोई उम्मीद करेगा कि वे बिना उपयुक्त सोच-विचार के उन इकाइयों के हितों में निर्णय करेंगे जिसके बोर्ड में शामिल हैं।’ समूह के ऋण बोझ के मुद्दे पर टाटा संस ने कहा कि उसके निदेशक मंडल ने पूर्व में कर्ज में कम लाने के लिए निर्णायक रूप से जोर दिए जाने के साथ पोर्टफोलियो और पूंजी कुशलता पर अधिक ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया था। बयान के अनुसार, ‘ये आरोप तथ्यों या वास्तविक स्थिति पर आधारित नहीं है। अपने रुख के बचाव के लिए अपनी सुविधा के हिसाब से चुनिंदा सूचना को सार्वजनिक किया गया, टाटा का तरीका समस्याओं से भागने या उनके बारे में लगातार शिकायत करने का नहीं है बल्कि उससे मजबूती से निपटना तथा एक बेहतर कल तैयार करने का है।’

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First Published on October 27, 2016 8:39 pm

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