December 07, 2016

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टाटा-मिस्त्री के बीच तकरार बढ़ी, अंदरूनी लड़ाई गहराने का अंदेशा

टाटा संस के पत्र के जवाब में सायरस मिस्त्री की ओर से जवाबी हमले में कहा गया कि समूह की कंपनियों के स्वतंत्र निदेशकों की आलोचना ‘सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण’ है।

Author मुंबई | November 14, 2016 12:15 pm
टाटा समूह ने पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री। (PTI Photo/File)

टाटा समूह और उसके पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री के बीच तकरार रविवार (13 नवंबर) बढ़ती नजर आयी। मिस्त्री खेमे ने कंपनियों पर नियंत्रण और स्वतंत्र निदेशकों के बारे में टाटा समूह के बयान को खारिज करते हुए उन्हें ‘सच्चाई से कोसों दूर’ और ‘सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया जबकि टाटा संस ने कहा कि वह मिस्त्री के निष्कासन से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए जो भी कदम जरूरी होगा, उठाएगी। टाटा संस के 10 नवंबर के पत्र के जवाब में आज (रविवार, 13 नवंबर) सायरस मिस्त्री की ओर से जवाबी हमले में कहा गया कि समूह की कंपनियों के स्वतंत्र निदेशकों की आलोचना ‘सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण’ है। टाटा संस के आरोपों का जवाब देते हुए मिस्त्री के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘यह कहना ‘सत्य से कोसों दूर’ है कि उनके (मिस्त्री के) नेतृत्व में समूह की कंपनियां ‘समूह के प्रवर्तक और अपने प्रमुख शेयरधारक से दूर होती जा रही थीं’।

मिस्त्री के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि यह कहना कि स्वतंत्र निदेशकों के रूप में अमानती की भूमिका निभा रहे भारतीय उद्योग जगत के इन नामी लोगों को किसी ‘निहित उद्देश्य’ या ‘चतुर चाल’ से बहकाया जा सकता है, ‘सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण’ है। उन्होंने कहा कि टाटा संस की ओर से ‘भारतीय कंपनी जगत के नामी लोगों’ की स्वतंत्रता पर उंगली उठायी जा रही है। टाटा संस ने हाल में कंपनी के चेयरमैन पद से हटाए गए सायरस मित्री के खिलाफ अपना रुख कड़ा करते हुए रविवार को कहा कि मिस्त्री के निष्कासन से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए जो भी जरूरी होगा किया गया। टाटा संस समूह की धारक कंपनी है। कंपनी ने समूह के स्वतंत्र निदेशकों से अपेक्षा की है कि वे टाटा की कंपनियों के भविष्य और उनके सभी अंशधारकों के हितों की रक्षा को सुनिश्चित करेंगे। मिस्त्री खेमे के बयान के बाद देर शाम को जारी एक बयान में टाटा संस ने कहा है कि उसके 10 नवंबर के बयान में तथ्य सामाने रखे जा चुके हैं ताकि मिस्त्री को हटाने के निदेशक मंडल के निर्णय को ‘अपेक्षित संदर्भों के साथ देखा जा सके।’ आज के बयान में कहा गया है कि ‘टाटा संस का प्रबंधन स्थिति से निपटने के लिए जो भी जरूरी होगा करेगा।’

टाटा संस ने पिछले सप्ताह आरोप लगाया था कि मिस्त्री ने उसका विश्वास खो दिया था क्योंकि वह 100 अरब डॉलर सालाना से अधिक का कारोबार करने वाले इस समूह की मुख्य कारोबारी कंपनियों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करने लगे थे। मिस्त्री खेमे का आज (रविवार, 13 नवंबर) का बयान टाटा संस के उस 9 पृष्ठ के बयान के जवाब में है जिसमें आरोप लगाया गया है कि वह ताज होटल चलाने वाली समूह की इंडियन होटल कंपनी पर ‘अपना नियंत्रण’ स्थापित करना चाहते थे। इस कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों ने टाटा संस के पूर्व चेयरमैन मिस्त्री का साथ दिया है। उस बयान में कहा गया था कि मिस्त्री ने इन वर्षों में बड़ी चालाकी से यह सुनिश्चित किया कि इस होटल कंपनी के निदेशक मंडल में टाटासंस की ओर से वह एक मात्र प्रतिनिधि होंगे। इसका उद्देश्य था कि इंडियन होटल्स कंपनी पर प्रभाव और  नियंत्रण की टाटा संस की क्षमता काम नहीं कर सके। टाटा केमिकल्स के स्वतंत्र निदेशकों ने भी मिस्त्री का साथ दिया है। इसके बाद टाटा संस ने नुस्ली वाडिया को अपनी कंपनी के निदेशक मंडल से निकालने की कार्रवाई शुरू की है। मिस्त्री ने कहा कि कंपनियों के निदेशक मंडल के स्वरूप में बदलाव कंपनी निदेशक की परिपाटी में बदलाव लाने के तहत किया गया था ताकि नमक से लेकर साफ्टवेयर तक के कारोबार में लगे इस समूह की कंपनियों का संचालन स्वतंत्र ढंग से किया जा सके।

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First Published on November 14, 2016 12:15 pm

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