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स्विस बैंक के कुछ और भारतीय खाताधारकों यश बिड़ला, पोंटी चड्ढा के दामाद के नाम उजागर

स्विट्जरलैंड सरकार ने अपने यहां बैंक खाते रखने वाले कुछ और भारतीय नागरिकों के नाम उजागर किए हैं। ये वे नाम हैं जिनके खिलाफ भारत में कर संबंधी जांच चल रही है। यहां के संघीय राजपत्र में प्रकाशित इन नामों में उद्योगपति यश बिड़ला, जमीन जायदाद कारोबारी पोंटी चड्ढा के दामाद गुरजीत सिंह कोचर, दिल्ली की महिला उद्योगपति रितिका शर्मा और मुंबई के सिटी लिमोजिन घोटाले में शामिल दो व्यक्तियों के नाम हैं। पोंटी चड्ढा की हत्या कुछ साल पहले उसके फॉर्महाउस में कर दी गई थी।
Author May 27, 2015 09:03 am
यश बिड़ला सहित स्विटजरलैंड में बैंक खाता रखने वाले सात भारतीयों के नाम का खुलासा

स्विट्जरलैंड सरकार ने अपने यहां बैंक खाते रखने वाले कुछ और भारतीय नागरिकों के नाम उजागर किए हैं। ये वे नाम हैं जिनके खिलाफ भारत में कर संबंधी जांच चल रही है। यहां के संघीय राजपत्र में प्रकाशित इन नामों में उद्योगपति यश बिड़ला, जमीन जायदाद कारोबारी पोंटी चड्ढा के दामाद गुरजीत सिंह कोचर, दिल्ली की महिला उद्योगपति रितिका शर्मा और मुंबई के सिटी लिमोजिन घोटाले में शामिल दो व्यक्तियों के नाम हैं। पोंटी चड्ढा की हत्या कुछ साल पहले उसके फॉर्महाउस में कर दी गई थी।

स्विट्जरलैंड की सरकार ने इन भारतीयों के बारे में भारतीय अधिकारियों द्वारा मांगी गई सूचनाओं के बाद उनके नाम प्रकाशित किए हैं। स्विट्जरलैंड के कर विभाग स्विस फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफटीए) ने बिड़ला और ब्लेसिंग एपैरल कंपनी की रितिका शर्मा के बारे में भारत सरकार से कुछ सूचनाएं पहले ही साझा की हैं।

इनके अलावा दो अन्य भारतीयों – स्नेहलता साहनी और संगीता साहनी – के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं। इन दोनों के खिलाफ भी भारत में जांच चल रही है। सिटी लिमोजीन के जरिए मुंबई में पोंजी योजना चलाने को लेकर जांच का सामना कर रहे सईद मोहम्मद मसूद के बारे में कुछ ब्योरा स्विस प्राधिकरण ने पूर्व में साझा किया था। प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर कुछ साल पहले उसका खाता जब्त कर लिया गया था।

प्रकाशित अधिसूचना के मुताबिक, भारत सरकार ने मसूद और सी कौसर मोहम्मद मसूद के बारे में नई जानकारी मांगी है। इस मामले में बिड़ला के कार्यालय में इस एजंसी की ओर से ई-मेल से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला। साथ ही रितिका को भी बार-बार फोन किया गया, पर उनकी तरफ से भी कोई जवाब नहीं मिला।

इससे पहले भी स्विस बैंक खातों की एचएसबीसी सूची में बिड़ला का नाम लीक हुआ था, उन्होंने उस समय कुछ भी कहने से मना कर दिया था। कोचर के परिवार वालों ने भी अधिसूचना के बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। ऐसा माना जाता है कि वह भारत से बाहर हैं। उनके खिलाफ पिछले कुछ समय से आयकर विभाग और अन्य एजंसियां जांच कर रही हैं।

सिटी लिमोजिन के मसूद नाम के दोनों व्यक्तियों का संपर्क सूत्र उपलब्ध नहीं हो सका। इन व्यक्तियों के नाम प्रकाशित करते हुए एफटीए ने कहा है कि अगर वे चाहते हैं कि कर मामलों पर उनके बीच ‘द्विपक्षीय सहायता’ संधि के तहत उनके बारे में जानकारी भारतीय अधिकारियों के साथ साझा नहीं की जाए तो वे 30 दिन के भीतर फेडरल एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

बिड़ला और रितिका शर्मा के मामले में अधिसूचना में उनके भारत में पते का भी जिक्र है लेकिन राजपत्र में वह सूचना नहीं दी गई है जिसे भारत को पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। अन्य भारतीय नागरिकों के मामले में उनके नाम और जन्मतिथि के अलावा कोई अन्य ब्योरा नहीं है। इसी प्रकार की स्थिति ब्रिटेन, स्पेन और रूस के नागरिकों के मामले में है। हालांकि अमेरिकी और इजराइली नागरिकों के संदर्भ में उनके पूरे नाम नहीं बताए गए हैं और केवल नाम के संकेत (इनीशिअल) और जन्मतिथि जारी किए गए हैं।

स्विट्जरलैंड सरकार ने इस महीने इस प्रकार के कम-से-कम 40 ‘नोटिस’ प्रकाशित कराए हैं। आगे भी इस प्रकार के कुछ और नाम सार्वजनिक किए जाने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में धन रखने का मुद्दा भारत में बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है। भारत सरकार लंबे समय से स्विस अधिकारियों पर संदिग्ध कर चोरी करने वालों की जानकारी साझा करने को लेकर दबाव दे रही है।

हालांकि स्विट्जरलैंड ने वैसे मामलों में कुछ ब्योरा साझा किया है जिनमें भारत स्विस बैंकों के भारतीय ग्राहकों द्वारा संदिग्ध कर चोरी को लेकर स्वतंत्र रूप से कुछ सबूत उपलब्ध कराने में सक्षम रहा। फिलहाल इस बारे में एफटीए प्रवक्ता को ई-मेल के जरिये पूछे गए सवालों के जवाब नहीं आए हैं।

उल्लेखनीय है कि स्विट्जरलैंड की सरकार के पास भारत समेत विभिन्न देशों से संदिग्ध कालाधन रखने वालों के बारे में जानकारी को लेकर मिले कई अनुरोधों के बीच यह जानकारी सार्वजनिक की गई है। इन नोटिसों के अनुसार संबद्ध व्यक्ति तीस दिन में फेडरल एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्ट में अपील कर सकता। उसे अपने पक्ष में साक्ष्य भी पेश करने होंगे।

राजपत्र में प्रकाशित इन नोटिस के जरिए स्विस एफटीए संबद्ध व्यक्तियों को कानूनी उपाय का अवसर भी देना चाहता है। इन लोगों के बारे में दूसरे देश की सरकारें जानकारी देने का आग्रह कर रही थीं।

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