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TATA ग्रुप के ताज मानसिंह होटल की होगी नीलामी

टाटा समूह को गुरुवार को तब बड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने एनडीएमसी को राष्ट्रीय राजधानी के बीचोंबीच बसे होटल ताज मानसिंह की ई-नीलामी की मंजूरी दे दी।
Author नई दिल्ली | April 21, 2017 02:31 am

टाटा समूह को गुरुवार को तब बड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने एनडीएमसी को राष्ट्रीय राजधानी के बीचोंबीच बसे होटल ताज मानसिंह की ई-नीलामी की मंजूरी दे दी। मौजूदा समय में टाटा समूह की इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (आइएचसीएल) इसका संचालन कर रही है। दिल्ली नगर पालिका परिषद ने यह होटल आइएचसीएल को पट्टे पर दिया हुआ था और अब इसे नीलाम करने का फैसला किया हुआ है। आइएचसीएल ने इसके विरोध में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने नीलामी पर सहमति दे दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और आइएचसीएल को यहां भी मुंह की खानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पीसी घोष और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन के पीठ ने नई दिल्ली नगर पालिका परिषद की याचिका को मंजूर कर लिया कि टाटा समूह की कंपनी के पास होटल की ई-नीलामी से इनकार करने का अधिकार नहीं हो सकता।

पीठ ने हालांकि एनडीएमसी से कहा कि अगर टाटा समूह ई-नीलामी में हार जाता है तो वह होटल खाली करने के लिए कंपनी को छह माह का वक्त दे। पीठ ने यह भी कहा कि एनडीएमसी को इस ऐतिहासिक संपत्ति की ई-नीलामी करते वक्त टाटा समूह की कंपनी आइएचसीएल के बेदाग इतिहास को भी ध्यान में रखना चाहिए। एनडीएमसी ने तीन मार्च को शीर्ष अदालत से कहा था कि वह होटल की ई-नीलामी करना चाहती है। अदालत ने होटल की नीलामी मंजूर करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने पर आइएचसीएल से एक सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां, अगर कोई हों तो उन्हें दाखिल करने के लिए कहा था।

आइएचसीएल ने अपनी याचिका में कहा था कि यह स्पष्ट नहीं है कि एनडीएमसी उस संपत्ति को नीलाम क्यों करना चाहती है जिसने उसे सर्वश्रेष्ठ राजस्व दिया है। कंपनी ने कहा कि एनडीएमसी की विशेषज्ञ रिपोर्ट में भी कहा गया है कि अगर होटल को किसी दूसरी पार्टी को नीलाम किया गया तो परिषद राजस्व खो देगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 21 नवंबर को अपने आदेश में होटल ताज मानसिंह की नीलामी में यथास्थिति बनाए रखने को कहा था। आइएचसीएल ने होटल की नीलामी को हरी झंडी देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष न्यायालय में आठ नवंबर को अपील की थी। बताते चलें कि यह एनडीएमसी की संपत्ति है जिसे आइएचसीएल को 33 साल के पट्टे पर दिया गया था। पट्टे की यह अवधि 2011 में समाप्त हो गई। इसके बाद कई आधारों पर कंपनी को नौ अस्थायी विस्तार दिए जा चुके हैं। इनमें से तीन एक्सटेंशन तो पिछले साल ही दिए गए थे।

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