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करोड़ों का घोटाला करने वाले विजय माल्या का पासपोर्ट ससपेंड

करीब 9,400 करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी किंगफिशर एअरलाइंस के मालिक और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समनों को धता बता रहे उद्योगपति विजय माल्या का पासपोर्ट चार हफ्तों के लिए निलंबित कर दिया गया है।
Author नई दिल्ली | April 16, 2016 00:56 am
किंगफिशर एअरलाइंस के मालिक विजय माल्या

करीब 9,400 करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी किंगफिशर एअरलाइंस के मालिक और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समनों को धता बता रहे उद्योगपति विजय माल्या का पासपोर्ट चार हफ्तों के लिए निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने 60 साल के माल्या का पासपोर्ट रद्द कर देने की धमकी दी थी। माल्या की कंपनी किंगफिशर एअरलाइंस पर देश के 13 बैंकों का इस साल फरवरी तक 9,432 करोड़ रुपए का कर्ज था। माल्या दो मार्च को देश छोड़कर चले गए थे। पिछले करीब एक महीने से भी ज्यादा समय से ब्रिटेन में रह रहे और ईडी के सामने पेश होने से इनकार कर चुके माल्या का राजनयिक पासपोर्ट ईडी की सिफारिश पर विदेश मंत्रालय ने निलंबित किया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया, ‘विदेश मंत्रालय में पासपोर्ट जारी करने वाले अधिकारियों ने आज ईडी की सलाह पर विजय माल्या के राजनयिक पासपोर्ट की वैधता चार हफ्तों के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है। पासपोर्ट कानून, 1967 की धारा 10-ए के तहत यह कार्रवाई की गई है।’ प्रवक्ता ने बताया, ‘माल्या को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा गया है कि पासपोर्ट कानून, 1967 की धारा 10 (3) (सी) के तहत उनका पासपोर्ट क्यों न जब्त कर लिया जाए या क्यों न रद्द कर दिया जाए। यदि वह इस समय-सीमा के भीतर जवाब नहीं देते हैं तो यह मान लिया जाएगा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है और फिर विदेश मंत्रालय रद्द करने की कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ेगा।’
संसद सदस्य होने के नाते राजनयिक पासपोर्ट धारक माल्या ने दो मार्च को भारत छोड़ा था। माल्या को कर्ज देने वाले 13 बैंकों के समूह ने दो मार्च को ही ‘डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल’ (डीआरटी) का रुख कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। बैंकों के समूह ने बाद में माल्या की वह पेशकश ठुकरा दी थी। इसमें माल्या ने कहा था कि वह शुरुआती किस्त में 4,000 करोड़ रुपए का भुगतान करेंगे और बाकी रकम बाद में चुकाएंगे।

सूत्रों ने बताया कि माल्या के खिलाफ कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि सरकार जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों और धोखेबाजों की ओर से बैंकों का पैसा हड़पने के मुद्दे पर चिंतित है। उन्होंने बताया कि इस साल फरवरी तक किंगफिशर एअरलाइंस पर 9,432 करोड़ रुपए का कर्ज है। उसने जानबूझकर 13 बैंकों का कर्ज चुका पाने में अपनी अक्षमता जाहिर की थी। एअरलाइंस के अध्यक्ष के तौर पर माल्या कंपनी के अहम फैसले लेने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। इसमें बैंकों के समूह से कर्ज लेने का मामला भी शामिल था।

दस मार्च, 15 मार्च और दो अप्रैल को ईडी के सामने पेश होने के लिए जारी समन के बावजूद माल्या जानबूझकर पेश नहीं हुए जबकि समन जारी होने पर प्रक्रिया के तहत उनका एजंसी के सामने पेश होना जरूरी था। सूत्रों ने बताया कि धनशोधन के अपराध के साथ ही माल्या की ओर से की गई अनियमितताओं और आपराधिक कृत्यों के कई पहलू सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि कई एजंसियां इन मामलों की जांच कर रही हैं। धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत जांच अधिकारियों के समक्ष माल्या का पेश न होना जानबूझकर इसे धता बताने के बराबर है। इसमें जांच की प्रक्रिया जानबूझकर बाधित करने की मंशा नजर आ रही है। इस पृष्ठभूमि में ईडी ने विदेश मंत्रालय से माल्या का पासपोर्ट रद्द करने की गुजारिश की थी।

सूत्रों ने बताया कि सरकार जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों पर मुकदमा चलाने और उनसे जनता का पैसा हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। कर्ज के इस ममले में आपराधिक गबन, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत सीबीआइ जांच कर रही है जबकि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआइओ) कंपनी कानून के उल्लंघन की जांच कर रहा है। इनके अलावा, ईडी पीएमएलए के तहत मामले की जांच कर रहा है।

गैरजमानती वारंट की अपील

विजय माल्या की दिक्कतें उस समय और बढ़ गईं जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को यहां विशेष पीएमएलए अदालत में याचिका दायर कर 900 करोड़ रुपए आइडीबीआइ कर्ज धोखाधड़ी मामले में उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी करने की मांग की। एक ईडी अधिकारी ने कहा, ‘हमने उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी करने के लिए अदालत से अनुरोध किया है। कल इस पर सुनवाई हो सकती है।’ माल्या की किंगफिशर एअरलाइंस ने 9400 करोड़ रुपए से अधिक के कर्ज की वापसी में चूक की है। वह ईडी के समनों का उल्लंघन कर रहे हैं।

एक महीने से अधिक समय से ब्रिटेन में रह रहे 60 साल के उद्योगपति ईडी की ओर से जारी तीन समनों को नजरअंदाज कर चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए मई तक का समय मांगा था। नौ अप्रैल को अंतिम समन के जवाब में माल्या ने मामले के जांच अधिकारी को यहां जानकारी दी थी कि कर्ज वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी कानूनी कार्यवाही के कारण वह व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए असमर्थ रहेंगे।
एजंसी ने अप्रैल के पहले सप्ताह में माल्या के खिलाफ नया समन जारी कर उनसे नौ अप्रैल को पेश होने के लिए कहा था। इससे पहले उन्होंने आधिकारिक कारण बताते हुए तारीख आगे बढाने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने कहा कि माल्या ने तारीख आगे बढाने का अनुरोध करते हुए ईडी को जानकारी दी थी कि बैंक कर्ज से संबंधित मामले फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। वह अपने कानूनी और कारपोरेट दलों की मदद से इन कर्जों के मामलों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए उन्हें कुछ समय चाहिए।

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