December 06, 2016

ताज़ा खबर

 

सरकार को कालेधन की अर्थव्यवस्था के स्रोत पर सतर्क रहने की जरूरत: एसबीआई

नोटबंदी के बाद 86 प्रतिशत मुद्रा या 14 लाख करोड़ रुपए की करेंसी चलन से बाहर हो गई थी।

Author नई दिल्ली | November 24, 2016 19:50 pm
भारतीय स्टेट बैंक (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया)

सरकार का ऊंचे मूल्य के नोट बंद करने का फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है, हालांकि, उसे कालेधन की अर्थव्यवस्था के स्रोत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। एसबीआई के एक शोध नोट में यह बात कही गई है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त करेंसी का प्रवाह है और यह आंकड़ा 5 लाख करोड़ रुपए तक हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की अतिरिक्त नकदी की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह संतुलित बनाने के लिये न तो जरूरी है और न ही यह वांछित है। समय के साथ इस तरह की अतिरिक्त नगदी बिना हिसाब किताब के साथ अर्थव्यवस्था में जुड़ी चली गई और यह काली अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन गई। नोट में कहा गया है, ‘ऐसे में नोटबंदी सही दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि, हमें कालेधन की अर्थव्यवस्था के सृजन के स्रोत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1,000 रुपए का नोट बंद करने की घोषणा की थी। इससे 86 प्रतिशत मुद्रा या 14 लाख करोड़ रुपए की करेंसी चलन से बाहर हो गई थी। एसबीआई रिसर्च का कहना है कि सरकार को डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहन के लिए प्रोत्साहन की सूची जारी करनी चाहिए। मसलन सभी सरकारी सेवाओं में नकद लेनदेन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। दुकानों पर पीओएस (स्वाइप) मशीनों को लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए और एक निश्चित सीमा से अधिक के नकद लेनदेन पर पैन की जानकारी देना अनिवार्य किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल भुगतान क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। अभी डिजिटल बैंकिंग का आकार करीब 1.2 लाख करोड़ रुपए है। यह कम से कम तीन लाख करोड़ रुपए पर पहुंचना चाहिए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 24, 2016 7:50 pm

सबरंग