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स्टेट बैंक खर्च घटाने के अभियान में जुटा, 2800 कर्मचारियों ने मांगी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति

पांच सहयोगी बैंकों के विलय के बाद परिसंपत्ति के मामले में देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक आॅफ इंडिया अब अपने खर्च घटाने के अभियान में जुट गया है।
Author नई दिल्ली | April 4, 2017 01:27 am
भारतीय स्टेट बैंक (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया)

पांच सहयोगी बैंकों के विलय के बाद परिसंपत्ति के मामले में देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक आॅफ इंडिया अब अपने खर्च घटाने के अभियान में जुट गया है। सहयोगी बैंकों की 18 सौ से ज्यादा शाखाओं को या तो बंद किया जाना है या इन्हें दूसरे दफ्तरों में एकीकृत कर दिया जाएगा। खाली होने जा रहे कर्मचारियों के लिए स्टेट बैंक आॅफ इंडिया प्रबंधन ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) घोषित की थी। इसके तहत कुल 12,500 कर्मचारियों को वीआरएस दिया जाना है। हालांकि, अभी तक सिर्फ 28 सौ कर्मचारियों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्ष अरुंधती भट्टाचार्य और उनके वरिष्ठ सहयोगियों ने मुंबई में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बैंकों के विलय को लेकर ताजा स्थिति के बारे में जानकारी दी और भविष्य की रूपरेखा पर बात की। भारतीय स्टेट बैंक के पांच सहयोगी बैंकों- स्टेट बैंक आॅफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक आॅफ हैदराबाद(एसबीएच) स्टेट बैंक आॅफ मैसूर (एसबीएम), स्टेट बैंक आॅफ पटियाला(एसबीपी)और स्टेट बैंक आॅफ त्रावणकोर (एसबीटी) के साथ साथ भारतीय महिला बैंक (बीएमबी)- का एक अप्रैल 2017 से स्टेट बैंक में विलय हो गया है।

बैंक कर्मचारियों का संगठन वीआरएस का विरोध कर रहा है। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संगठन बाकी पेज 8 पर के उपाध्यक्ष थॉमस फ्रैंकों के अनुसार, विलय का फायदा खास नहीं मिलने वाला। दूसरी ओर, स्टेट बैंक का प्रबंधन यह भरोसा दे रहा है कि जो कर्मचारी वीआरएस नहीं लेंगे, उन्हें कुछ और काम दिया जाएगा। अगली तिमाही तक स्वरूप काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगा। वीआरएस की योजना पांच अप्रैल तक के लिए खुली है। एसबीआइ ने वीआरएस लेने के लिए कुछ मानदंड तय किए हैं। वीआरएस लेने वाला कर्मचारी का सेवाकाल 20 साल और उसकी आयु 55 साल होनी चाहिए। इसी तरह के कई और नियम हैं। पांच सहयोगी बैंकों और बीएमबी को मिलाकर स्टेट बैंक के कर्मचारियों की कुल संख्या 2,70,011 तक पहुंच गई है। इसमें 69,191 कर्मचारी सहयोगी बैंकों और बीएमबी के हैं। सहयोगी बैंकों के विलय के बाद संपत्ति के लिहाज से भारतीय स्टेट बैंक की गणना दुनिया के 50 प्रमुख बैंकों में होने लगी है। बैंक के ग्राहकों की संख्या 37 करोड़ और शाखा नेटवर्क 24,000 तक पहुंच गया है। बैंक के एटीएम की संख्या 59,000 हो गई।

स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार खांड़ा के अनुसार, सहयोगी बैंकों के 1107 कर्मचारियों को पुनर्पदस्थापित किया जाएगा। सहयोगी बैंकों के पांच मुख्यालयों में से दो को रखा जाएगा। तीन मुख्यालयों को भंग कर दिया जाएगा। इसी तरह 27 जोनल दफ्तर, 81 क्षेत्रीय कार्यालय और 11 नेटवर्क दफ्तर भंग किए जाएंगे। 24 अप्रैल तक पुराने ढांचे में ही काम किया जाएगा। स्टेट बैंक की परिसंपत्तियां 30.72 लाख करोड़ रुपए की हैं। यह दुनिया में परिसंपत्तियों के मामले में 64वें नंबर का बैंक है। विलय के बाद अब इसकी परिसंपत्तियों का मूल्य 40 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का हो गया है और विश्व रैंकिंग 45 तक पहुंच गई है।

 

 

 

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