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जीएसटी लागू होने पर दिए गए गिफ्ट का भी रखना होगा हिसाब, जानिए और किस-किस का रखना होगा रिकॉर्ड

जीएसटी के मसौदा नियमों के 'लेखा एवं रिकॉर्ड' प्रावधान उद्योग के लिए कठिन काम साबित हो सकते हैं।
उत्पाद शुल्क को जीएसटी में शामिल कर लिया गया है, लेकिन पंजीकृत व्यक्ति को विनिर्मित वस्तुओं का मासिक उत्पादन खाता बनाने की जरूरत है।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने पर कंपनियों को खोए, चोरी हुए, बर्बाद हुए सामान या गिफ्ट और मुफ्त में नमूने के तौर पर दी गई वस्तुओं का भी पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू हो रहा है। जीएसटी के इस प्रावधान का पालन करना उद्योगों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। जीएसटी के मसौदा नियमों के ‘लेखा एवं रिकॉर्ड’ प्रावधान उद्योग के लिए कठिन काम साबित हो सकते हैं, क्योंकि अगले दो महीने में इसका पालन करना होगा। जीएसटी को देश में आजादी के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार माना जा रहा है। इसे काफी सरल और कम अनुपालन आवश्यकताओं वाली कर व्यवस्था माना जा रहा है।

कारोबारियों को रखने होंगे ये रिकॉर्ड: देश में कारोबारियों को प्रत्येक सामान के स्टॉक का साफ सुथरे तरीके से रिकॉर्ड रखने की जरूरत होगी। माल की प्राप्ति, उसकी आपूर्ति का साफ-साफ रिकॉर्ड रखा जाना चाहिये। शुरू में कितना माल था, कितना प्राप्त हुआ, कितना आपूर्ति किया गया, कितना गुम हो गया, खराब हो गया, नष्ट कर दिया गया अथवा निशुल्क नमूनों के तौर पर दिया गया या फिर उपहार में दिया गया। उसका पूरा रिकॉर्ड होना चाहिये। उत्पाद शुल्क को जीएसटी में शामिल कर लिया गया है, लेकिन पंजीकृत व्यक्ति को विनिर्मित वस्तुओं का मासिक उत्पादन खाता बनाने की जरूरत है। कच्चा माल कितना है, तैयार माल कितना है, बेकार टुकड़े और वैस्ट कितना है सभी रिकार्ड होने चाहिये। नियमों में कहा गया है कि पंजीकृत व्यक्ति को बहीखाते में इसका क्रमानुसार उल्लेख करना होगा।

पीडब्ल्यूसी में लीडर, प्रत्यक्ष कर प्रतीक जैन ने बताया कि उद्योग के लिए लेखा रिकॉर्ड तैयार करना काफी कठिन हो सकता है क्योंकि अब नए कराधान के लागू होने में केवल दो महीने ही बचे हैं। यह उद्योग के लिए बड़ी चुनौती होगी। उत्पाद शुल्क व्यवस्था खत्म होकर जीएसटी आधारित प्रणाली लागू होने के बावजूद उन्हें उत्पादन का मासिक रिकॉर्ड रखने की जरूरत होगी। जैन ने कहा, ‘इसमें काफी ज्यादा समान व्यय होगा, ऐसे में यह अस्पष्ट है कि इन गतिविधियों के बीच आवंटन किस प्रकार से किया जाएगा। करदाताओं को प्रत्येक गतिविधियों के लिए आपूर्ति के बिल, चालान, क्रेडिट नोट, डेबिट नोट, रसीद वाउचर, भुगतान वाउचर और ई-वे बिल के विवरण को भी अलग से रखना होगा। हालांकि सरकार ने खाते को किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में रखने की मंजूरी दे दी है।

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