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रिजर्व बैंक सरकारी एजेंसियों के साथ काले धन से जुड़े आंकड़े साझा करे: एसआईटी

उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी का गठन अर्थव्यवस्था में कालेधन पर नियंत्रण के तरीके सुझाने के लिए किया था।
Author नई दिल्ली | September 5, 2016 20:14 pm
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भारत में नोटों के मुद्रण और वितरण के लिए जिम्मेदार है।

काले धन पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने रिजर्व बैंक से कहा कि वह देश से बाहर जाने वाले गैरकानूनी कोष पर नजर रखने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों के साथ आंकड़ा साझा करे। न्यायमूर्ति एम बी शाह (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने 11 अगस्त को रिजर्व बैंक गवर्नर को लिखे एक पत्र में विभिन्न सरकारी विभागों के बीच आंकड़ों और सूचनाओं को प्रभावी तरीके से साझा करने के लिए एक संस्थागत प्रणाली स्थापित करने पर जोर दिया था। वित्त मंत्रालय के एक ट्वीट में सोमवार (5 सितंबर) कहा गया है, ‘एसआईटी अध्यक्ष ने आरबीआई से प्रवर्तन विभागों के साथ आंकड़े साझा करने के लिए संस्थागत प्रणाली तैयार करने को कहा है।’ मंत्रालय ने बैंकिंग नियामक आरबीआई से कहा है कि वह देश से बाहर गैरकानूनी तौर पर जाने वाले वित्तीय प्रवाह पर नजर रखने के लिए संस्थागत प्रणाली विकसित करे।

उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी का गठन अर्थव्यवस्था में कालेधन पर नियंत्रण के तरीके सुझाने के लिए किया था। एसआईटी का मानना है कि ये आंकड़े, डाटा भंडार के तौर पर सिर्फ केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो (सीईआईबी) जैसी एक या अन्य एजेंसियां ही साझा कर सकती हैं। एसआईटी ने कहा, ‘उक्त डाटा भंडार से विभिन्न एजेंसियां जल्द उचित कार्रवाई के लिए संबद्ध सूचना एकत्रित कर सकती हैं।’ दल ने कहा कि एक एजेंसी के पास आंकड़े उपलब्ध होंगे जिससे अन्य कानून अनुपालन एजेंसियां कार्रवाई के लिए संबद्ध सूचनाएं एकत्रित कर सकती हैं।फिलहाल, आरबीआई के पास विभिन्न खंडों में हर तरह के विदेशी मुद्रा हस्तांतरण के संबंध में सूचनाएं होती हैं। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, ‘एसआईटी का मानना है कि देश से बाहर जाने वाले गैरकानूनी वित्तीय प्रवाह पर नियंत्रण और नजर रखने के लिए प्रवर्तन निदेशालय, राजस्व आसूचना निदेशालय और सीबीडीटी जैसी विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा आरबीआई के आंकड़ों का उपयोग महत्वपूर्ण है।’

एसआईटी ने सुझाव दिया कि आरबीआई विदेशी मुद्रा हस्तांतरण इलेक्ट्रॉनिक रिपोर्टिंग प्रणाली (एफईटी-ईआरएस) में उपलब्ध सभी अधिकृत डीलरों के विदेशी मुद्रा हस्तांतरण आंकड़ों तक अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पहुंच प्रदान करे। एफईटी-ईआरएस को आयातक या निर्यात के पैन नंबर अपने अधिकार में ले लेना चाहिए और आरबीआई को इसके लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाने चाहिए। ‘निर्यात बकाया के आंकड़े’ के संबंध में एसआईटी ने कहा है कि फेमा उल्लंघन के संबंध में एक साल से अधिक की भारी-भरकम राशि बकाया है। साथ ही उसने कहा है कि हो सकता है कंपनियों ने गलत तरीके से शुल्क वापसी दावा किया होगा। रिजर्व बैंक निर्यात से होने वाली प्राप्ति को ईडीपीएमएस डाटा बेस में रखता है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘एसआईटी ने प्रवर्तन निदेशालय, राजस्व आसूचना निदेशालय और वाणिज्य मंत्रालय से कहा है कि वे निर्यात बकाए के आंकड़ों का विश्लेषण करें और इस संबंध में आवश्यक पहल करें।’ बैंक ऑफ बड़ौदा घोटाले के मद्देनजर एसआईटी ने आरबीआई से कहा था वह अग्रिम पे्रषण मूल्य के समक्ष बिल एंट्री की जांच के लिए प्रणाली शुरू करे।

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