January 20, 2017

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सस्ते हो सकते हैं मकान, दुकान और वाहन कर्ज, रेपो रेट में कटौती कर रिजर्व बैंक ने दिया दिवाली का तोहफा

रिजर्व बैंक के नए गवर्नर उर्जित पटेल ने मंगलवार को पहली मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दर में 0.25 फीसद कटौती कर सभी को चौंका दिया।

Author नई दिल्ली | October 5, 2016 02:59 am
रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल।(फाइल फोटो)

रिजर्व बैंक के नए गवर्नर उर्जित पटेल ने मंगलवार को पहली मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दर में 0.25 फीसद कटौती कर सभी को चौंका दिया। उनके इस कदम से मकान, दुकान और वाहनों के बैंक कर्ज सस्ते होंगे। उद्योग जगत ने इसका स्वागत करते हुए इसे दिवाली उपहार बताया है।  गवर्नर उर्जित पटेल के नेतृत्व में यह पहली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा है। इसके साथ ही स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) में ब्याज दरों के बारे में विचार विमर्श किया गया। समिति में तीन सदस्य सरकार ने नामित किए हैं जबकि बाकी तीन सदस्य रिजर्व बैंक से हैं।  एमपीसी की दो दिन चली बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 0.25 फीसद घटाकर 6.25 फीसद कर दिया। जनवरी 2011 के बाद से यह रेपो की सबसे कम दर है। रेपो दर में ताजा कटौती से बैंकों  को कर्ज सस्ता करने में मदद मिलेगी और मकानों व वाहनों का कर्ज सस्ता होगा। चालू वित्त वर्ष मेंं अप्रैल के बाद रेपो दर में यह पहली कटौती है। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के जाने के बाद दरों में नरमी की काफी उम्मीद की जा रही थी। उसी उम्मीद के बीच रेपो दर में यह कटौती हुई है। रघुराम राजन पर अक्सर दरों को ऊंचा रखकर आर्थिक वृद्धि का गला घोंटने के आरोप लगते रहे हैं। यहां तक कि सत्ताधारी भाजपा के भी कुछ लोग उन पर ऐसा आरोप लगाते रहे हैं।

इससे पहले नवंबर 2010 में रेपो दर 6.25 फीसद थी और अक्तूबर 2011 में यह बढ़ती हुई 8.5 फीसद पर पहुंच गई। रिजर्व बैंक ने मंगलवार को जैसे ही मौद्रिक समीक्षा के तहत दरों में कटौती की घोषणा की, तुरंत बाद सरकार ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि इससे अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ेगी और आठ फीसद जीडीपी वृद्धि हासिल करने में मदद मिलेगी।
रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में कहा कि एमपीसी का यह निर्णय नरम मौद्रिक नीति के रुख के अनुरूप है। साथ ही वृद्धि को समर्थन देने के साथ 2016-17 की चौथी तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआइ) आधारित मुद्रास्फीति 5.0 फीसद के स्तर पर रखने व मध्यम अवधि में दो फीसद घट-बढ़ के साथ 4.0 फीसद के लक्ष्य की दिशा में है। समिति के सभी छह सदस्यों ने नीतिगत दर में कटौती के पक्ष में मतदान किया।

केंद्रीय बैंक ने अलबत्ता आगाह करते हुए कहा है कि निजी निवेश धीमा पड़ने व कमजोर वैश्विक मांग के साथ भू-राजनीतिक संकट को देखते हुए अगले साल वृद्धि को लेकर जोखिम है। तो भी केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष के लिए संसद की ओर से निर्धारित मुद्रास्फीति के 2-6 फीसद के लक्ष्य को लेकर आशान्वित है। चेतावनी के बावजूद रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में जीडीए वृद्धि 7.6 फीसद व अगले वित्त वर्ष में 7.9 फीसद रहने का अनुमान जताया है।  रिजर्व बैंक ने कहा कि इस अनुमान में सातवें वेतन आयोग की वेतन और पेंशन को लेकर सिफारिशों को ध्यान में रखा गया है। जिसका असर सकल मांग पर पड़ेगा। सरकार की तरफ से बैंक के फैसले पर वित्त सचिव अशोक लवासा ने कहा कि मुद्रास्फीति के लक्ष्य को लेकर रिजर्व बैंक और सरकार एक राह पर हैं। सरकार मुद्रास्फीति को 2 से 6 फीसद के दायरे में रखने के लिए सभी संभव उपाय कर रही है

कटौती का लाभ ग्राहकों को मिलेगा

दीवाली से पहले कर्ज लेने वालों को खुशखबरी देते हुए बैंकरों ने मंगलवार को वादा किया कि वे नीतिगत दर में कटौती का फायदा जल्द से जल्द आम ग्राहक तक पहुंचाएंगे। इसका मतलब यह हुआ कि आवास, वाहन व कारपोरेट ऋण सस्ते हो सकते हैं। रिजर्व बैंक की ओर से रेपो दर को 0.25 फीसद घटाकर 6.25 फीसद करने के बाद देना बैंक के सीएमडी व इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आइबीए) के चेयरमैन अश्विनी कुमार ने कहा, ‘वित्त वर्ष के व्यस्त सीजन में रेपो दर में 0.25 फीसद कटौती स्वागतयोग्य कदम है। एमसीएलआर में पहले ही स्थिरता को देखते हुए इस कटौती का फायदा जल्द से जल्द हस्तांतरित किए जाने की उम्मीद है।’

एसबीआइ की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा, ‘आने वाले समय में अनुकूल मुद्रास्फीति दायरे को देखते हुए रिजर्व बैंक के नीतिगत उपाय सामंजस्य बिठाने वाले बने रहने की उम्मीद है। ऐसे में बैंक नकदी परिदृश्य के हिसाब से दरों का फायदा आगे देना जारी रखेंगे।’आइसीआइसीआइ बैंक की प्रबंध निदेशक व सीईओ चंदा कोचर ने कहा कि इस कटौती से निवेश व खपत को बल मिलेगा। फेडरल बैंक के प्रबंध निदेशक श्याम श्रीनिवासन ने कहा कि आरबीआइ की नीति स्पष्ट रूप से व्यावहारिकता पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘मैं रेपो दर में 0.25 फीसद कटौती और नकदी को समर्थन देने के रिजर्व बैंक के कदम का स्वागत करती हूं। इन कदमों से देश में खपत और निवेश आधारित वृद्धि को मजबूत सहारा मिलेगा।’

 

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First Published on October 5, 2016 2:58 am

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