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बैंकों के धन की लागत नहीं घटी है, ऐसा कहना बकवास है: रघुराम राजन

बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत ब्याज दर में कटौती का फायदा नहीं दिये जाने की सख्त आलोचना करते हुए केंद्रीय बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को कहा कि यह धारणा ‘बकवास’ है कि बैंकों के धन की लागत नहीं घटी है। राजन ने बैंकों पर ब्याज दरों में […]
Author April 8, 2015 08:50 am
आरबीआई ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर रेपो को 7.5 प्रतिशत से घटाकर 7.25 प्रतिशत कर दिया है।

बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों को भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत ब्याज दर में कटौती का फायदा नहीं दिये जाने की सख्त आलोचना करते हुए केंद्रीय बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को कहा कि यह धारणा ‘बकवास’ है कि बैंकों के धन की लागत नहीं घटी है। राजन ने बैंकों पर ब्याज दरों में कटौती के लिए दबाव भी बनाया।

उन्होंने कहा कि बैंक जितनी जल्दी रिण पर ब्याज दरों में कटौती करेंगे अर्थव्यवस्था के लिए उतना ही अच्छा होगा।

राजन ने कहा ‘‘हम (कटौती के) किसी स्तर विशेष की बात नहीं कर रहे हैं और न ही यह कह रहे हैं कि जब यह नहीं होगा, और कुछ नहीं होगा। लेकिन (नीतिगत कटौती के) प्रभाव के प्रसार में सुविधा चाहते हैं।’’

राजन ने कहा ‘‘मुझे ऐसा वातावरण नहीं देखना चाहता जहां रिण का कारोबार धीमा हो, बैंकों के पास धन पड़ा हो और उनके धन की सीमांत लागत घटी हो, बावजूद इसके यह धारणा हो कि धन की लागत नहीं गिरी है जो कि बकवास है। यह गिरी है।’’

राजन जनवरी से केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दर में 0.50 प्रतिशत की कटौती का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने में बैंकों की कोताही का हवाला दे रहे थे। आरबीआई आज बैंकों को 7.5 प्रतिशत पर उधार दे रहा है।

आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाताओं से कहा ‘‘नीतिगत दरों में कटौती का अब तक कर्ज की ब्याज दरों में बहुत कम असर हुआ है, हम लाभ आगे पहुंचाए जाने का इंतजार कर रहे हैं, मुझे यह यह संदेह नहीं है कि यह नहीं होगा, पर यदि यह जल्दी होता है तो यह अर्थव्यवस्था के बेहतर होगा।’’

राजन ने उम्मीद जतायी कि प्रतिस्पर्धा के दबाव और धन की अच्छी स्थिति के चलते बैंक कर्ज सस्ता करेंगे। रिजर्व बैंक ने आज अपनी रेपो दर को 7.5 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय किया पर आने वाले समय में उदार मौद्रिक नीति जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

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