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RBI की क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान, ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं

उद्योग-व्यवसाय जगत को निराश करते हुए आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने आज नीतिगत ब्याज दर में कमी नहीं की। बाजार विश्लेषकों को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक रेपो दर में (जिस दर पर वह बैंकों को तात्कालिक जरूरत के लिए उधार देता है) कटौती कर सकता है। केंद्रीय बैंक ने आज अपनी मौद्रिक समीक्षा रपट […]
Author February 3, 2015 15:58 pm
आरबीआई ने प्रमुख दरों में नहीं किया कोई बदलाव, एसएलआर 50 बेसिस प्वाइंट हुआ कम (फोटो: रॉयटर्स)

उद्योग-व्यवसाय जगत को निराश करते हुए आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने आज नीतिगत ब्याज दर में कमी नहीं की। बाजार विश्लेषकों को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक रेपो दर में (जिस दर पर वह बैंकों को तात्कालिक जरूरत के लिए उधार देता है) कटौती कर सकता है।

केंद्रीय बैंक ने आज अपनी मौद्रिक समीक्षा रपट में कहा कि पखवाड़े भर पहले बिना किसी पूर्व घोषित कार्यक्रम के नीतिगत दर में कटौती के बाद मुद्रास्फीति या राजकोषीय मोर्चे पर कोई ऐसी बात नहीं हुई जिसके आधार पर नीतिगत ब्याज में कटौती की जाए।

आरबीआई ने रेपो दर 7.75 प्रतिशत पर बरकरार रखी है लेकिन सांविधिक नकदी अनुपात (एसएलआर) 0.50 प्रतिशत घटाकर 21.5 प्रतिशत कर दी है जो सात फरवरी से लागू होगी। एसएलआर के तहत बैंकों को अपनी जमा का निर्धारित न्युनतम हिस्सा विनिर्दिष्ट सरकारी प्रतिभूतियों या तरल सम्पत्तियों के रूप में रखना अनिवार्य है। इसमें कमी से बैंकों के पास कर्ज देने पास अधिक धन सुलभ हो सकता है।

राजन ने यह भी उम्मीद जताई कि पिछले महीने नीतिगत दर में की गयी कटौती के आधार पर और अधिक बैंक अपना कर्ज सस्ता करेंगे। 15 जनवरी की कटौती के बाद अभी कुछ ही बैंकों ने अपनी ब्याज दरें घटाई हैं।

मौद्रिक नीति की छठी द्वैमासिक समीक्षा की घोषणा करते हुए राजन ने यहां कहा ‘‘ 15 जनवरी (रेपो में 0.25 प्रतिशत की कमी किये जाने की तारीख) के बाद से मुद्रास्फीति में कमी की प्रक्रिया या राजकोषीय दृष्टिकोण के संबंध में कोई नयी उल्लेखनीय बात नहीं हुई है। इस लिए आरबीआई के लिए यह उचित होगा कि वह उसकी प्रतीक्षा करे और वर्तमान दर को बनाए रखे।’’

मौद्रिक नीति की समीक्षा की घोषणा होते ही स्थानीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और बैंकिंग शेयर सबसे अधिक प्रभावित हुए।

आरबीआई ने बांड बाजार के विकास के लिए कई पहलों की घोषणा की है। उसने विदेशी संस्थागत निवेशकों को सरकारी बांडों में उनकी निवेश की सीमा खत्म होने के बाद भी उनमें पुनर्निवेश करने की छूट दी है।

आरबीआई ने निर्यात रिण के मामलों में बैंकों को मिली विशेष पुनर्वित्त सुविधा (ईसीआर) समाप्त कर इसकी जगह संशोधित तरलता समायोजन व्यवस्था के तहत प्रणालीगत तरलता (नकदी) की सुविधा ही लागू करने की घोषणा की है। यह बदलाव सात फरवरी से लागू हो जाएगा।

गौरतलब है कि उर्जित आर पटेल समिति ने अलग अलग क्षेत्रों के लिए अगल अगल पुर्वित्त सुविधा समाप्त करने की सिफारिश की है और इसके तहत ईसीआर में धीरे धीरे कमी कर दी गयी थी।

बैंक ने कहा है कि बैंकों के पास नकदी की स्थिति अच्छी है और निर्यात ऋण के लिए पुनर्वित्त की मांग का मासिक औसत अक्तूबर के बाद से सीमा का औसतन 50 प्रतिशत से कम रहा है।

केंद्रीय बैंक ने दोहराया कि वह मुद्रास्फीति और उच्च गुणवत्ता वाले राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर और सुकूनदेह स्थिति में होना चाहता है। साथ ही उसे महीने अंत में पेश होने वाले वित्त मंत्री अरुण जेटली के पहले पूर्ण बजट के संकेतों का भी इंतजार है।

राजन ने कहा कि मुद्रास्फीति जनवरी 2016 तक छह प्रतिशत के लक्षित स्तर के आस-पास रह सकती है लेकिन ढीला-ढाला मॉनसून, कच्चे तेल की कीमत और राजकोषीय लक्ष्य में चूक की संभावना जोखिम पेश करती है।

चालू खाते का घाटा चालू वित्त वर्ष में सकल घरलू उत्पाद का 1.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और अलगे साल यह इससे भी कम रहेगा। ऐसा मुख्य तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की लुढ़कती कीमत के कारण होगा।

राजन ने करीब 17 महीने पहले केंद्रीय बैंक के प्रमुख का पदभार संभालने के बाद से मुद्रास्फीति पर काबू पाने को प्राथमिकता दी थी हालांकि उन्होंने 15 जनवरी को बगैर कार्यक्रम के नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर चौंका दिया।

राजन ने बाद में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति और सकल घरेलू उत्पाद के आगामी आंकड़ों पर नजर रखेगा। वित्त वर्ष 2015-16 की पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा सात अप्रैल को पेश की जाएगी।

आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि सरकार की ठोस बजट पेश करने की मंशा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली 28 फरवरी को नयी सरकार का पहला पूर्ण बजट पेश करेंगे।

मौद्रिक नीति के दस्तावेज में कहा गया है कि राजकोषीय घाटे के नवंबर में 99 प्रतिशत को छू जाने के बावजूद केंद्रीय बैंक को भरोसा है कि सरकार इसको जीडीपी के 4.1 प्रतिशत तक सीमित रखने के बजट के लक्ष्य से नहीं चूकेगी।

रिजर्व बैंक ने कहा है कि 15 जनवरी को रेपो दर में अचानक 0.25 प्रतिशत कटौती का मुद्रास्फीतिक अनुमानों में कमी, जिंस मूल्यों में गिरावट तथा ग्रामीण वेतन में कम वृद्धि से प्रेरित था। समीक्षा में कहा गया है, ‘‘ सार्वजनिक तौर पर यह प्रतिबद्धता व्यक्त करने के बाद की जैसे ही आने वाले नए आंकड़े से गुंजाइश बनेगी, मौद्रिक नीति के रुख में बदलावा किया जाएगा, रिजर्व बैंक ने 15 जनवरी को नीतिगत दर में कटौती की।’’

ग्रामीण मांग में नरमी के संकेतों का जिक्र करते हुए रिजर्व बैंक ने आर्थिक वृद्धि के बारे में उम्मीदों को नीचे रखने की सलाह दी है। आर्थिक वृद्धि के बारे में आरबीआई ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आधार वर्ष और आकलन प्रक्रिया में बदलाव का मतलब होगा 2014-15 के सकल घरेलू उत्पाद के वृद्धि के आंकड़ों तथा अनुमानों में कुछ तब्दीली होगी।

आरबीआई का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर (पुराने आधार वर्ष के तहत) 5.5 प्रतिशत और 2015-16 में 6.5 प्रतिशत रहेगी।

रिजर्व बैंक ने कहा है कि लघु ऋण बैंक और भुगतान बैंक के लाइसेंस के आवेदनों की जांच दो वाह्य सलाहकार समितियां (ईएसी) करेंगी और आरबीआई को अपनी सिफारिशें सौंपेंगी। संबंधित समितियों की अध्यक्षता क्रमश: आरबीआई की पूर्व डिप्टी गवर्नर उषा थोराट और आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के निदेशक नचिकेत मोर करेंगे।

आरबीआई ने भारत से विदेश धन भेजने की उदारीकृत रेमिटेंस योजना (एलआरएस) के तहत भेजी जाने वाली राशि की वाषिक सीमा बढ़ाकर प्रति व्यक्ति 2,50,000 डॉलर वार्षिक कर दी है। अभी यह सीमा 1,25,000 डॉलर थी।

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