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स्टॉक की कमी, मांग बढ़ने से काबुली चना-चना कीमतों में तेजी

राष्ट्रीय राजधानी में काबुली चना छोटी किस्म की कीमत तेजी के साथ रिकॉर्ड ऊंचाई 10,000-10,200 रुपए प्रति क्विंटल पर जा पहुंची
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 19:53 pm
पिछले वित्त वर्ष (2015-16) में करीब 55 लाख टन दाल का आयात किया गया था। (पीटीआई फोटो)

दलहन की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा दलहन के बफर स्टॉक की सीमा बढ़ाने तथा अधिक आयात करने सहित तमाम उपायों के बावजूद तैयार स्टॉक की कमी और मांग में आई तेजी के कारण दिल्ली के थोक दाल दलहन बाजार में बीते सप्ताह भी काबुली चना और चना की कीमतों में तेजी बरकरार रही। हालांकि मौजूदा स्तर पर कमजोर मांग के बीच उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति में आई तेजी के बाद उड़द, मूंग और मसूर दाल की कीमतें दवाब में रहीं। बाजार सूत्रों ने कहा कि कम उत्पादन होने के बीच बाजार में तैयार स्टॉक की कमी के कारण सटोरिया लिवाली बढ़ने से काबुली चना और चना की कीमतें रिकॉर्ड उच्च स्तर पर जा पहुंचीं।

इस बीच दलहनों की कीमतों के 200 रुपए किलो के आसपास जा पहुंचने के बाद इनकी कीमतों को नियंत्रित करने के हरसंभव उपाय अपनाने की कोशिश करते हुए केन्द्र सरकार ने इसकी खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और बोनस पर पुनर्विचार करने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। बफर स्टॉक को मौजूदा आठ लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन करने के साथ सरकार ने सरकारी स्तर पर अन्य दलहन उत्पादक राज्यों से आयात के अवसरों की संभावना को तलाशने का फैसला किया है। सरकार ने कहा कि वह कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जमाखोरों पर कार्रवाई करने के अलावा घरेलू उत्पादन और आयात को बढ़ाने के लिए कई सारे उपाय कर रही है।

राष्ट्रीय राजधानी में काबुली चना छोटी किस्म की कीमत तेजी के साथ रिकॉर्ड ऊंचाई 10,000-10,200 रुपए प्रति क्विंटल पर जा पहुंची जो कीमतें पिछले सप्ताहांत 8,800-10,000 रुपए प्रति क्विंटल थीं। चना, चना दाल स्थानीय और बेहतरीन क्वालिटी की भी मांग रही और इनकी कीमतें तेजी के साथ क्रमश: 8,400-8,900 रुपए और 8,600-8,800 रुपए और 8,900-9,000 रुपए प्रति क्विंटल हो गई जो कीमतें पिछले सप्ताहांत क्रमश: 8,100-8,400 रुपए और 8,200-8,500 रुपए और 8,600-8,700 रुपए प्रति क्विंटल थीं।

बेसन शक्तिभोग और राजधानी की कीमत तेजी के साथ क्रमश: 3,700 रुपए और 3,700 रुपए प्रति 35 किलो का बैग हो गई जो पिछले सप्ताहांत क्रमश: 3,600 रुपए और 3,600 रुपए प्रति 35 किग्रा का बैग थीं। मटर सफेद और हरी के लिए भी फुटकर विक्रेताओं की मांग रही और इनकी कीमतें 200-200 रुपए की तेजी के साथ क्रमश: 3,800-3,825 रुपए और 4,000-4,100 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। दूसरी ओर मसूर छोटी और बोल्ड किस्मों की कीमतें 150-150 रुपे की गिरावट के साथ क्रमश: 6,200-6,500 रुपए और 6,250-6,550 रुपे प्रति क्विंटल पर बंद हुई। इसके दाल स्थानीय और बेहतरीन क्वालिटी की कीमतें भी 200-200 रुपए की गिरावट के साथ क्रमश: 6,700-7,200 रुपए और 6,800-7,300 रुपए प्रति क्विंटल पर बंद हुई।

अरहर और इसके दाल दड़ा किस्म की कीमतें भी गिरावट के साथ क्रमश: 8,850 रुपए और 11,600-13,300 रुपए प्रति क्विंटल रह गई जो पिछले सप्ताहांत क्रमश: 9,100 रुपए और 11,900-13,600 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गई। उड़द और इसके दाल छिलका स्थानीय की कीमत 100-100 रुपए की गिरावट के साथ क्रमश: 10,300-11,800 रुपए और 10,600-10,700 रुपए प्रति क्विंटल पर बंद हुई। इसके दाल बेहतरीन क्वालिटी और धोया की कीमतें समान अंतर की गिरावट के साथ क्रमश: 10,700-11,200 रुपए और 11,100-11,400 रुपए प्रति क्विंटल रही। मूंग और इसके दाल छिलका स्थानीय की कीमत भी 100-100 रुपए की गिरावट के साथ क्रमश: 5,7000-6,300 रुपए और 6,250-6,650 रुपए प्रति क्विंटल रह गई। मूंग दाल धोया स्थानीय और बेहतरीन क्वालिटी की कीमत भी समान अंतर की गिरावट के साथ क्रमश: 6,650-7,150 रुपए और 7,150-7,350 रुपए प्रति क्विंटल रह गई।

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