December 08, 2016

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दाल की कीमतों में आ रही उछाल से डरे उपभोक्ता

अनाज की कीमतें आसमान पर तो हरी सब्जियों और फल के भाव एकदम से गिरे नीचे।

दाल।

नोटबंदी का असर दिल्ली में अब दाल और सब्जियों के दामों में दिखना शुरू हो गया है। बीते एक सप्ताह में दालों के दामों में उछाल आया है और सब्जियों के दामों में मामूली गिरावट देखी जा रही है। दिल्लीवासी अभी जरूरी वस्तुओं के दामों और नए नोटों को बदलवाने की समस्या से उबर पाए ही नहीं पाए थे कि खाद्य वस्तुओं के बढ़े भावों ने उनके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। नोटबंदी से राजधानी में दाल और खाद्य वस्तुओं के दामों में लगातार आ रहे उछाल के फिलहाल कम होने की संभावना कम ही नजर आ रही है। बीते साल इन दिनों में जिन सब्जियों के दाम 30 से 40 रुपए किलो थे, इस समय उनके दाम 25 से 35 रुपए हैं। इन दामों का ठीक उलट खुदरा बाजार में दालों के दामों में दिखाई दे रहा है।
खाद्यान्न और फल-सब्जियों पर विपरीत असर

नोटबंदी के बाद बाजार से पुराने नोट गायब हो गए हैं और नए नोट खर्च करने में लोग अभी हिचक रहे हैं। जिससे बाजार में मुद्रा का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। बाजार में नए करेंसी के अभाव के कारण खाद्यान्नों के ज्यादातर थोक व्यापारियों ने खरीददारी करीब बंद कर दी है। जिन थोक व्यापारियों के गोदामों में पहले ही से दाल, आटा, रिफाईंड तेल और अन्य सामग्री हैं वह ज्यादा मुनाफे में सामान बेच रहे हैं। इसके विपरीत दिल्ली के आजादपुर फल एवं सब्जी मंडी में कहीं भी गोदाम नहीं है जहां व्यापारी अपनी सब्जियां और फल सुरक्षित रख सकें। दिल्ली की मंडियों में फल और सब्जी की आवक आम दिनों की ही तरह से है, लेकिन नए नोटों को संभल कर खर्च करने में खरीददार पहले से काफी कम मात्रा में फल और सब्जी की खरीददारी कर रहे हैं। फल और सब्जी खराब होने से होने वाले नुकसान को देखते हुए राजधानी से बाहर से फल और सब्जी लेकर आया व्यापारी कम कीमत पर ही अपना सामान बेच रहा है। जिसकी वजह से फुटकर बाजार में सब्जियों के दामों में धीरे धीरे गिरावट आ रही है।

रसोई में अच्छे दिनों की आस

दिल्लीवासी अपनी रसोई में अच्छे दिनों का इंतजार कर रहें हैं। दालों की कीमतों में 20 से 40 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। अरहर दाल जो दो महीने पहले 130 रुपए किलो थी, वह 180 रुपए पहुंच गई है। चना की दाल 120 रुपए से बढ़कर 140 रुपए प्रति किलो बिकने लगी है। मलका दाल 75 रुपए से बढ़कर 90 रुपए हो गई है। मूंग धुली 65 रुपए से 100 रुपए और मसूर का भाव 75 से बढ़कर 90 रुपए किलो, राजमां 90 से बढ़कर 120 रुपए किलो बिकने लगा है। चावल और चीनी के भी दामों में भी इजाफा देखा जा रहा है। चीनी के दाम 40 रुपए किलो से बढ़कर 45 रुपए किलो हो गए हैं। रिफाईंड की पेटी जो पहले 965 रुपए थी, वह अब 1050 रुपए हो गयी है। एक पेटी में रिफाईंड तेल की 12 थैलियां होती हैं। आटे की पांच थैलियों का कट्टा जो पहले 1300 रुपए का था, वह 1450 रुपए का हो गया है।

कीमत नियंत्रण में राज्य और केंद्र दोनों विफल

रोजमर्रा के सामानों के दामों में दोनों सरकारों का नियंत्रण न हो पाने से आम परिवारों का बजट गड़बड़ाने लगा है। आजादपुर सब्जी मंडी के व्यापारी नेता राजकुमार भाटिया ने सब्जियों के दामों में आ रही गिरावट की वजह राजधानी में कोई भी सरकारी गोदाम नहीं होना बताया है। उन्होंने कहा कि व्यापारी अन्य राज्यों में माल बेचने के बजाए दिल्ली में ही कम कीमत में बेच रहे हैं। भाटिया का कहना है कि माना कि करेंसी का अभाव है लेकिन यहां स्टोरेज की व्यवस्था होती तो व्यापारी अपना सामान उनमें रख सकते थे। दिल्ली में दाल के थोक व्यापारी पवन कुमार ने कहा कि व्यापारियों के पास नया माल खरीदने के लिए फिलहाल करेंसी नहीं है। उन्होंने कहा कि राजधानी के ज्यादातर थोक व्यापारी इन दिनों गोदामों में रखे सामान को ही बेच रहें हैं। थोक व्यापारियों की ओर से दाम बढ़ाने को उन्होंने गलत बताया। पवन ने कहा कि दामों में बढ़ोतरी फुटकर व्यापारी कर रहे होंगे, लेकिन बदनाम थोक व्यापारियों को किया जा रहा है।

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First Published on November 17, 2016 4:04 am

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