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छाती पर मूंग दल रही हैं दालें

दिल्ली में दालों के दाम आसमान छू रहे हैं। दालों की कीमत बढ़ने की वजह इसकी सप्लाई का कम होना है। दरअसल हाल के वर्षों में देश में दालों की खेती कम हो रही है। दिल्ली में खपत होने वाली दालों का करीब 80 फीसद विदेशों से आता है।
Author नई दिल्ली | October 7, 2015 08:48 am
चना दाल मई 2014 में 46 रुपए किलो से बढ़कर इस मई में 78 रुपए किलो पर पहुंच गई। उड़द दाल 170 रुपए किलो की ऊंचाई पर है।

दिल्ली में दालों के दाम आसमान छू रहे हैं। दालों की कीमत बढ़ने की वजह इसकी सप्लाई का कम होना है। दरअसल हाल के वर्षों में देश में दालों की खेती कम हो रही है। दिल्ली में खपत होने वाली दालों का करीब 80 फीसद विदेशों से आता है। दिल्ली की थोक मंडियों में इन दिनों दालें मुंबई से आ रही हैं। दालों के दाम मुंबई में बैठे व्यापारी तय करते हैं। दाम तय करने में राज्य और केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है। सबकुछ देश के व्यापारी ही अपने मन मुताबिक तय कर लेते हैं।

देश में दालों की पैदावार पिछले करीब 20 साल से कम होती जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि किसानों को पैदावार के उचित मूल्य नहीं मिल पाते। दालों की खेती में लगातार हो रहे घाटे की वजह से देश के व्यापारियों ने दालों की खेती से हाथ खिंचना शुरू कर दिया। जिसका मौजूदा नतीजा ये है कि सिर्फ चने को छोड़कर सारी दालें विदेशों से आ रही हैं। दालों में मसूर और मटर की दाल कनाडा से आ रही है। उड़द और अरहर की दाल बर्मा के रंगून से आ रही है। राजमां ज्यादातर चीन से आ रहा है। काबली चना आस्ट्रेलिया से आ रहा है।

दिल्ली में दालों की चार बड़ी मंडियां लारेंस रोड, भोरगढ़, नरेला और नयाबाजार में हैं। यंहा के व्यापारी मुंबई से कच्ची दालें मंगवाते हैं। इन दालों को साफ करने के लिए दिल्ली के कई मिलों उन्हें भेज दिया जाता है। मिलों से दालों के पैकेट या फिर बोरियों में भरकर बिक्री के लिए दिल्ली के बाजारों में भेज दिया जाता है।

दिल्ली की मंडियों में दालों का स्टाक इतना ही रह पा रहा है कि राजधानी की कुल तीन दिन की खपत हो पाए। उसकी एक बड़ी वजह दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से दालों के व्यापारियों के गोदामों में लगातार मारे जा रहे छापे हैं। दिल्ली के एक थोक दाल विक्रेता पंकज ने बताया कि पहले दिल्ली का व्यापारी दालों का करीब 15 दिन का स्टाक रखता था। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से लगातार डाले जा रहे छापों से व्यापारियों ने दालों का स्टाक करना बंद कर दिया है। दालों के लगातार कम हो रहे स्टाक की वजह से भी दालों के दाम बढ़ रहे हैं। दिल्ली के व्यापारियों का कहना है कि यदि इन दिनों विदेशों से दालें न आएं तो इनके दाम एक हजार रुपए किलो तक जा सकते हैं।

दिल्ली की थोक मंडियों में दालों के दाम और राजधानी के फुटकर बाजार के दामों में भी काफी फर्क है। इसकी पहली वजह तो यही है कि किसी भी सरकारी विभाग का इस पर नियंत्रण नहीं है। एक नजर दालों के थोक और फुटकर बाजार के दामों पर डालें तो कीमत का यह फर्क साफ तौर पर देखा जा सकता है।

उड़द की दाल की कीमत थोक बाजार में 125 से 150 रुपए प्रति किलो के करीब है, जबकि फुटकर में 180 रुपए प्रति किलो यह बिक रही है। मसूर की दाल की थोक कीमत 85 रुपए प्रति किलो है, जबकि फुटकर में 120 रुपए प्रति किलो। राजमा थोक बाजार में 85 रुपए प्रति किलो है, जबकि फुटकर में 120 रुपए प्रति किलो। इसी तरह, मूंग साबुत थोक बाजार में 95 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रहा है तो फुटकर में 110 रुपए प्रति किलो। थोक बाजार में मूंग धुली 100 से 110 रुपए प्रति किलो है तो फुटकर में इसकी कीमत 135 रुपए प्रति किलो। अरहर की दाल थोक में 140 रुपए प्रति किलो है जबकि फुटकर में 180 रुपए प्रति किलो।

नरेंद्र भंडारी

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