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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को उम्मीद, सरकार जल्द गठित करेगी जीएसटी परिषद

राष्ट्रप्रति ने नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली से जुड़े जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को गुरुवार (8 सितंबर) को अपनी संस्तुति प्रदान कर दी है।
Author चेन्नई | September 10, 2016 20:19 pm
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (पीटीआई फाइल फोटो)

अब जबकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून का रूप ले चुका है राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्दी ही जीएसटी परिषद का गठन करेगी और अप्रत्यक्ष करों के गहन असर को कम करेगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने से भारत की 2,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब उपभोक्ता सभी पहली बार एक साझा बाजार में तब्दील हो जाएंगे। जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को पिछले महीने संसद से मंजूरी मिलने के बाद 19-20 राज्यों ने इसका अनुमोदन कर दिया। जिसके बाद यह राष्ट्रपति की मंजूरी के योग्य बन गया। राष्ट्रपति ने यहां करूर वैश्य बैंक के शताब्दी समारोह के मौके पर कहा, ‘और मुझे उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय अब जीएसटी परिषद बनाने के लिए उचित कदम उठाएगा जो कि जीएसटी की दर तय करेगी। क्योंकि अब यह जीएसटी परिषद की जिम्मेदारी होगी कि हमारी अर्थव्यवस्था में वस्तु एवं सेवा कर की एक समान दर हो।’

राष्ट्रपति ने कहा कि उत्पाद शुल्क, सेवा शुल्क और मूल्यवर्द्धित कर जैसे विभिन्न प्रकार के केंद्रीय और राज्य अप्रत्यक्ष करों को समाहित करने वाला जीएसटी न केवल एक समान दर वाला होगा बल्कि इसके तहत विभिन्न बिंदुओं पर भी कर नहीं देना होगा। जीएसटी व्यवस्था में केवल एक बिंदु पर ही कर लगेगा। इसलिए इस नई व्यवस्था का असर गंभीर नहीं होगा। मुखर्जी ने कहा कि जीएसटी विधेयक के पारित होने से लगभग डेढ़ दशक से अधिक समय से की जा रही मेहनत सफल हुई है। उन्होंने कहा, ‘आखिरकार संवैधानिक प्रक्रियाओं का अनुपालन होने और दोनों सदनों में संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद परसों तक 19 से अधिक शायद 20 राज्यों ने इसका अनुमोदन कर दिया, जिससे यह राष्ट्रपति की अनुशंसा के योग्य बन गया।’

मुखर्जी ने कहा कि भारत ने वर्ष 2015 में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ सबसे तेजी से वृद्धि दर्ज करने वाली अर्थव्यवस्था के तौर पर अपने-आपको दृढ़ता से स्थापित किया है। उन्होंने कहा, ‘हम विश्वास से कह सकते हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है और हमारी संभावना बेहतर है क्योंकि हम 2016 और 2017 दोनों में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करने वाले हैं।’ प्रणब ने कहा कि भारत के बाहरी मोर्चे पर भी स्थिति स्थिर बनी हुई है। चालू खाते का घाटा वर्ष 2015-16 में सुधरकर 1.1 प्रतिशत हो गया जो कि इससे पिछले वर्ष 1.3 प्रतिशत पर था। विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़कर 365 अरब डॉलर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा, ‘इस साल सामान्य बारिश के मद्देनजर मुझे उम्मीद है कि हमारा खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 में हासिल 26.5 करोड़ टन के रिकार्ड को पार कर जाएगा।’

राष्ट्रप्रति ने नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली से जुड़े जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को गुरुवार (8 सितंबर) को अपनी संस्तुति प्रदान कर दी है। सरकार अगले साल एक अप्रैल से इसे लागू करना चाहती है। जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक के पारित होने और आधे से अधिक राज्यों की विधानसभाओं में इसके अनुमोदन तथा राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद जीएसटी परिषद के गठन का रास्ता साफ हो गया है। जीएसटी परिषद ही नई व्यवस्था के तहत कर की दर निर्धारित करेगी और उन उपकर तथा अधिभार पर भी फैसला करेगी जिन्हें इसमें समाहित किया जाना है। जीएसटी एक दर वाली अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था होगी जिसमें सभी ज्यादातर केंद्रीय और राज्यों के अप्रत्यक्ष कर समाहित हो जाएंगे। मसलन, उत्पाद शुल्क, सेवा कर, केंद्रीय बिक्री कर और राज्यों में लगने वाला मूल्य वर्धित कर (वैट) सभी इसमें समाहित होंगे।

विधेयक को 19 राज्यों द्वारा अनुमोदन करने के बाद राष्ट्रपति सचिवालय भेजा गया। विधेयक का अनुमोदन करने वाले राज्यों में भाजपा शासित असम पहला राज्य रहा। जिन अन्य राज्यों ने इसका अनुमोदन किया उनमें बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, नगालैंड, महाराष्ट्र, हरियाणा, सिक्किम, मिजोरम, तेलंगाना, गोवा, ओड़िशा और राजस्थान शामिल हैं। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने हाल ही में कहा था कि सरकार जीएसटी क्रियान्वयन के मामले में समय से आगे है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था, ‘राज्यों के अनुमोदन के लिए 30 दिन रखे गए थे जबकि ऐसा 23 दिन में ही हो गया।’ राष्ट्रपति की अनुशंसा मिलने के बाद सरकार अब जीएसटी परिषद की अधिसूचना जारी करेगी जो कर की दर निर्धारित करेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में बनने वाली जीएसटी परिषद में राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होंगे। केन्द्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी के साथ ही एकीकृत जीएसटी कानूनों का खाका तैयार करने के लिए अब केन्द्र और राज्य सरकारें रात-दिन काम कर रही हैं।

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