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लोगों को सस्ते घर देने के लिए पीएमअो ने सभी सरकारी विभागों से कहा कि बताएं कहां-कहां बेकार पड़ी है जमीन

शहरी विकास मंत्रालय ने विकसित सरकारी कॉलोनियों में जमीनों का चुनाव शुरू कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

मोदी सरकार का सपना है कि 2022 तक सभी के पास अपना घर हो। मोदी सरकार ने इसका वादा भी किया था। अब इसी वादे को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी सरकारी विभागों से कहा है कि वह ऐसी जमीन बताएं जिसका वह इस्तेमाल नहीं कर रहे है। खासतौर पर विकसित सरकारी कॉलोनियों में इन जमीनों की तलाश करने को कहा गया है। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ऐसी जमीन की तलाश कर लैंड बैंक बनाना चाहती है ताकि सरकार के अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट को रफ्तार मिल सके। जमीन की कमी के कारण राज्यों को आवास परियोजनाओं की योजना बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इस प्रयास के जरिए पीएमओ को उम्मीद है कि जमीनों की तलाश की जा सकेगी और फिर राज्य सरकार से कहा जाएगा कि वे इन जमीनों की उपलब्धता को लेकर प्रस्ताव भेजें। इकोनॉमिक टाइम्स को एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, इस पूरी प्रगति पर पीएमओ की नजर है। वह इस पर पूरा ध्यान दे रहा है। हमें उम्मीद है कि कुछ राज्य दूसरे राज्यों की तुलना में बेहतर कर रहे हैं। उन्होंने लाभार्थियों की सूची तैयार कर ली है और जमीन की उपलब्धता को लेकर भी वहां कोई समस्या नहीं है। इसलिए अब सभी मंत्रालयों को आदेश दिए हैं कि वे एक लिस्ट तैयार करें कि किन कॉलोनियों में नए घरों का निर्माण किया जा सकता है।

शहरी विकास मंत्रालय ने विकसित सरकारी कॉलोनियों में जमीनों का चुनाव शुरू कर दिया है। ऐसी कॉलोनियां जहां मूलभूत सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं और मंजूरी में किसी तरह की समस्या नहीं होगी। अब तक केंद्र सरकार ने 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 90,000 करोड़ रुपये के हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दी है। सरकार ने 16.42 लाख अफोर्डेबल घरों के निर्माण को मंजूरी दी है, इसमें सबसे अधिक 2.27 तमिलनाडु के लिए हैं। इसके अलावा 1.94 लाख की संख्या के साथ आंध्र प्रदेश दूसरे और 1.81 लाख मकानों के साथ मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है।

2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने 2022 तक सबको घर देने का वादा किया था। लेकिन, इस स्कीम को लेकर केरल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में कमजोर प्रगति से सरकार चिंतित है। यह कई प्रस्तावों को मंजूर नहीं कर पाए हैं। अधिकारी ने कहा कि हम राज्यों को यह बताने की कोशिश करेंगे कि आपके पास कहां जमीन है। आप हमें प्रस्ताव भेजिए अगर यह जमीन केंद्र की होगी तब भी स्वीकृति मिल जाएगी। हमें उम्मीद है कि इससे काम में तेजी आएगी।

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