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पीएमआई: सितंबर में विनिर्माण क्षेत्र में नरमी, नीतिगत दर में कटौती की उम्मीद

विनिर्माण वृद्धि दर में गिरावट के बावजूद लगातार नौवें महीने कारोबारी स्थिति में सुधार हुआ क्योंकि सूचकांक महत्वपूर्ण 50 के ऊपर बना हुआ है।
Author नई दिल्ली | October 3, 2016 17:32 pm
पीएमआई का 50 से ऊपर रहना वृद्धि को और इससे नीचे रहना संबंधित क्षेत्र में मंदी को दर्शाता है।

देश में नए कारोबारी ऑर्डर में धीमी वृद्धि के बीच सितंबर महीने में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में हल्की नरमी आई। ऐसे में मुद्रास्फीति दबाव में कमी को देखते हुए रिजर्व बैंक नीतिगत दर में कटौती कर सकता है। यह बात एक मासिक सर्वे में कही गई है। विनिर्माण के प्रदर्शन को बताने वाला निक्की मार्किट इंडिया मैनुफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजेर्स इंडेक्स (पीएमआई) सितंबर में घटकर 52.1 पर आ गया जो अगस्त में 52.6 था। यह इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में वृद्धि में कुछ नरमी आई है। रिपोर्ट तैयार करने वाली आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री पालीयाना डी लीमा ने कहा, ‘भारतीय विनिर्माण उद्योग में सितंबर महीने में थोड़ी नरमी रही। इसका कारण अगस्त से नए ऑर्डर की वृद्धि में कमी आना है। अगस्त में यह 20 महीने के उच्च स्तर पर था।’

विनिर्माण वृद्धि दर में गिरावट के बावजूद लगातार नौवें महीने कारोबारी स्थिति में सुधार हुआ क्योंकि सूचकांक महत्वपूर्ण 50 के ऊपर बना हुआ है। हालांकि अगस्त से विस्तार की गति धीमी हुई है और अपेक्षाकृत नरम है। 50 से ऊपर अंक का मतलब है विस्तार जबकि इसके नीचे गिरावट को बताता है। उन्होंने कहा, उत्पादन में अभी भी वृद्धि जारी है और ऐसा लगता है कि 2016-17 की दूसरी तिमाही में क्षेत्र का जीडीपी वृद्धि में योगदान बेहतर रहेगा। तिमाही आधार पीएमआई उत्पादन सूचकांक 51.4 से बढ़कर अप्रैल-जून में 53.6 रहा। इस बीच, भारत में विनिर्मित वस्तुओं के लिए विदेशों से नए ऑर्डर सितंबर में स्पष्ट रूप से बढ़े और यह 14 महीने में तीव्र वृद्धि है।

आलोच्य महीने में कंपनियों की खरीद गतिविधियों में इजाफा हुआ है और अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी हुई लेकिन यह मामूली रही। कीमत मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि आलोच्य महीने में औसत खरीद लागत में तेजी से वृद्धि हुई लेकिन दीर्घकालीन प्रवृत्ति को देखें तो यह कमजोर रही। पालियाना डी लीमा ने कहा, ‘हालांकि मुद्रास्फीति दर ऊंची हुई है लेकिन ऐतिहासिक मानदंडों की तुलना में यह नरम है और यह संकेत देता है कि हमें 2016 में रिजर्व बैंक की आसान मौद्रिक नीति देखने को मिल सकती है।’ रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा मंगलवार (4 अक्टूबर) को होनी है।

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