January 21, 2017

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पनबिजली क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नई नीति: पीयूष गोयल

देश में 150 गीगावाट पनबिजली उत्पादन की संभावनाएं मौजूद हैं जिसमें से 50 गीगावाट अकेले अरुणाचल प्रदेश में ही पैदा हो सकती है।

Author वड़ोदरा | October 9, 2016 02:19 am
केंद्रीय ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार), कोयला (स्वतंत्र प्रभार), नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री पीयूष गोयल (PTI File Photo)

पनबिजली क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक नई नीति बनाने पर विचार कर रही है। पनबिजली क्षेत्र की अटकी पड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार का इरादा पवन व सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय क्षेत्र की परियोजनाओं को मिलने वाले लाभ 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली पनबिजली परियोजनाओं को भी उपलब्ध कराने का है। बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने यहां कहा कि हम एक अति-सक्रिय पनबिजली नीति लाने पर विचार कर रहे हैं ताकि ठप पड़ी परियोजनाओं को गति दी जा सके और पवन व सौर जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के क्षेत्र में दिया जाना वाला फायदा 25 मेगावाट से अधिक क्षमता की पनबिजली परियोजनाओं को देने की संभावनाओं को तलाशा जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इस नीति को सभी हितधारकों से परिचर्चा के बाद लाएगी।

बिजली मंत्रालय के एक प्रस्ताव के अनुसार अब तक 25 मेगावाट क्षमता तक के पनबिजली संयंत्रों को लघु पनबिजली परियोजनाओं के तौर पर श्रेणीबद्ध किया गया है और इन्हें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मिलने वाले फायदे उपलब्ध हैं। देश में 150 गीगावाट पनबिजली उत्पादन की संभावनाएं मौजूद हैं जिसमें से 50 गीगावाट अकेले अरुणाचल प्रदेश में ही पैदा हो सकती है। बिजली मंत्रालय ने इससे पहले कहा था कि 12वीं योजना में पनबिजली से पैदा होने वाली कुल 10,897 मेगावाट में से 4,371 मेगावाट पनबिजली उत्पादन क्षमता को जोड़ने का काम पूरा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि पनबिजली को भी नवीकरणीय ऊर्जा श्रेणी में शामिल कर दिया जाता है तो हमारी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2022 तक 225 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। गोयल ने कहा कि पूरी दुनिया में पनबिजली परियोजनाओं को नवीकरणीय ऊर्जा श्रेणी में रखा जाता है। केवल भारत में ही यह व्यवस्था है कि 25 मेगावाट से कम क्षमता की पनबिजली परियोजनाओं को ही नवीकरणीय माना जाता है इससे अधिक क्षमता की परियोजनाओं को इससे अलग माना जाता है।

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First Published on October 8, 2016 11:30 pm

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