December 05, 2016

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पैसों की दरकार, पर जनता लाचार

बैंकों और एटीएम में नोट बदलने की प्रक्रिया बेहद धीमी रफ्तार से ज्यादातर लोग खाने-पीने से लेकर कहीं आने-जाने तक को लाचार हो गए हैं।

Author नोएडा | November 14, 2016 04:16 am
एक युवक 500 रुपये का नया नोट दिखाते हुए। (Source: ANI)

बैंकों और डाकघरों में मांग के मुकाबले नए नोटों की उपलब्धता में भारी कमी के कारण चार दिन पहले तक प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी के फैसले को सराहने वाली जनता अब कराहने लगी है। बैंकों और एटीएम में नोट बदलने की प्रक्रिया बेहद धीमी रफ्तार से ज्यादातर लोग खाने-पीने से लेकर कहीं आने-जाने तक को लाचार हो गए हैं। बैंक खुलने से घंटों पहले लोगों का लाइन लगाने का सिलसिला बैंक बंद होने के बाद तक जारी रहता है। सभी बैंकों और एटीएम पर पुलिस बल तैनात होने के बावजूद कहासुनी से लेकर झगड़े तक की घटनाएं हो रही हैं। नोट बदलवाने के लिए बैंकों के बाहर कतार में लगे लोग स्थानीय पुलिस बलों पर परेशान करने का आरोप भी लगा रहे हैं। उनके मुताबिक, बैंकों के गेट पर तैनात पुलिस वाले अपने जानकारों और परिजनों को फोन कर उसी बैंक में नोट बदलने के लिए बुला लेते हैं, जिसके कारण कई घंटों में लाइन कुछ फीट ही आगे खिसक पाती है।

वहीं गौतमबुद्धनगर के एक बैंक के अधिकारी एके सिंह ने बताया कि नोट बदलवाने के लिए लोगों के पास दिसंबर तक का समय है, लेकिन वे तुरंत नोट बदलना चाह रहे हैं, जिसकी वजह से परेशानी बढ़ रही है। एटीएम में नहीं पर्याप्त नगदी बैंकों में रकम निकालने या पुराने नोट बदलवाने के एवज में मिल रहे 2000 रुपए के नोट भी लोगों की मुसीबत बन रहे हैं। छोटी करंसी न होने की वजह से इसे खर्च करने में भी खासी दिक्कत आ रही है। सामान खरीदने के बाद बची हुई रकम तक दुकानों से नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण बैंक से 2000 का नोट पाने वाले लोग 100 रुपए के नोटों की चाहत में दोबारा एटीएम के बाहर लाइन में खड़े हो रहे हैं।

लोगों का आरोप है कि एटीएम में पर्याप्त मात्रा में रकम नहीं डाली जा रही है। इस वजह से 2000 रुपए प्रति कार्ड की सीमा होने के बावजूद कुछ ही देर बाद कैश खत्म हो जा रहा है। एटीएम से 2000 रुपए के नोट भी नहीं निकल रहे हैं। बैंक सूत्रों के मुताबिक, 2000 रुपए के नोट एटीएम से निकलने में अभी लंबा समय लगेगा। दूसरी तरफ नाम न छापने की शर्त पर कई बैंक मैनेजरों ने बताया कि नोट बदलने के फैसले के ऐसे असर का आकलन पहले से नहीं किया गया था। नई करंसी नहीं मिल पा रही है, जिस वजह से मांग के मुकाबले महज 10-20 फीसद रकम से ही काम चलाना पड़ रहा है। ऐसे में बैंकों के बाहर लोगों की भीड़ लगातार बनी है, लेकिन उपलब्धता नहीं होने से आधा समय इंतजार में बीत रहा है। सूत्रों के अनुसार 18 नवंबर के बाद बैंकों में ज्यादा नकदी आने की उम्मीद है।

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First Published on November 14, 2016 4:16 am

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