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थोड़े से पैसे बचाने के लिए आयकर विभाग से छिपाई गई यह सूचना आपको पड़ सकती है भारी, जानिए

यदि आप अपनी आय के संबंध में आयकर विभाग अधूरी सूचना देते हैं या छिपा लेते हैं तो, इसके लिए आपको नोटिस भेजा सकता है और 200 परसेंट का जुर्माना लगाया जा सकता है।
Author नई दिल्ली | September 5, 2016 17:05 pm
आय के संबंध में आयकर विभाग को अधूरी सूचना देना या छिपाना अपराध है, जिसके लिए आपको 200 प्रतिशत तक जुर्माना देना पड़ सकता है।

यदि आप थोड़े से पैसे बचाने के लिए इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट को अपनी आय के बारे में झूठी जानकारी उपलब्ध करवाते हैं तो यह आपके लिए महंगा पड़ सकता है। विगत वर्षों में आयकर विभाग की जांच प्रक्रिया में काफी सुधार हुआ है और अब आपके लिए अपनी आय के बारे में जानकारी छिपाना आसान नहीं है। अब हर बड़े लेन-देन के लिए आपको संबंधित संस्था को पैन कार्ड नंबर देना पड़ता है। आपने जिस किसी भी संस्थान से वित्तिय लेन देन किया है, चाहें वह बैंक हो, म्यूचूअल फंड कंपनी हो या क्रेडिट कॉर्ड कंपनी हो सभी इस ट्रांजैक्शन के बारे में आयकर विभाग को सूचित करते हैं। अत: आयकर विभाग से अपनी आय या किसी अन्य वित्तिय लेन-देन की सूचना छिपाने अथवा अधूरी सूचना उपलब्ध कराने के एवज में आपको 200 प्रतिशत तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

अगर आप अपनी आय के संबंध में अधूरी सूचना देते हैं या छिपा लेते हैं तो इसके लिए आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है और ऐसा करने के पीछे की वजह पूछ सकता है। आपकी गलती के लिए आयकर कानून के मुताबिक आपसे जुर्माना भी वसूला जा सकता है। हम आपको कुछ ऐसी इन्कम के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में लोगों द्वारा आयकर विभाग को सामान्य तौर पर सूचना नहीं दी जाती है…

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जीवनसाथी या नाबालिग बच्चे के नाम से किए गए इन्वेस्ट पर मिलने वाले लाभ के बारे में: बहुत से लोग अपने जीवन साथी या बच्चे के नाम पर इंवेस्ट करते हैं। जीवनसाथी या नाबालिग बच्चे को गिफ्ट किए गई राशि पर सरकार की तरफ से टैक्स में छूट दी गई है। लेकिन, यदि इस राशि का उपयोग किसी प्रकार के इंवेस्टमेंट के लिए किया जाता है तो आयकर विभाग उस इंवेस्टमेंट से होने वाले लाभ को गिफ्ट करने वाले व्यक्ति के इन्कम में जोड़कर देखता है। उदारण के लिए मान लीजिए आपने अपनी पत्नी के नाम पर कोई प्रापर्टी खरीदी है और पत्नी ने प्रापर्टी की खरीद में कोई पैसा नहीं दिया है, तो उस प्रापर्टी से मिलने वाली लाभ राशि आपके इन्कम में जुड़ जाएगी और आयकर विभाग की ओर से निर्धारित टैक्स स्लैब के मुताबिक आपको आयकर चुकाना होगा।

ब्याज के रूप में प्राप्त आमदनी: फिक्स्ड डिपॉजिट्स, बॉन्ड्स इत्यादि से प्राप्त होने वाली आमदनी पर सरकार द्वारा टैक्स लिया जाता है और आपको अपने टैक्स रिटर्न में इसके बारे में जानकारी भी देनी होती है।
सरकार सिर्फ सेविंग अकाउंट्स पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स में छूट देती है। सेविंग अकाउंट्स पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर सरकार की ओर से कोई टैक्स नहीं वसूला जाता है। आपको अपने टैक्स रिटर्न में आयकर विभाग को इस बारे में सूचित करना पड़ता है।

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अन्य स्रोतों से होने वाली आय के बारे में आयकर विभाग को सूचित न करना: मान लीजिए आपने कुछ दिनों तक फ्रिलांसर के तौर पर काम किया और उसके बाद जॉब करने लगे। इस केस में आपके एम्प्लॉयर द्वारा आपकी सैलरी से टीडीएस डिडक्ट किया जाता है लेकिन, इसके बावजूद आपको अपने टैक्स रिटर्न में फ्रिलांसर के तौर पर कमाए गए इन्कम की जानकारी देनी होती है।

गिफ्ट के रूप में प्राप्त होने वाले कैश, चल या अचल संपत्ति के बारे में: यदि आपको अपने रिश्तेदारों के अतिरिक्त कहीं से कैश और चल या अचल संपत्ति के रूप में 50,000 रूपए से ज्यादा का गिफ्ट मिलता है तो इस पर टैक्स देना पड़ता है। शादी-विवाह में मिलने वाले गिफ्ट पर सरकार की तरफ से टैक्स में छूट दी जाती है।

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विदेशी संपत्ति या आय के बारे में: आयकर विभाग इसे बहुत ही गंभीर गलती मानता है और ऐसे केस में ज्यादा जुर्माना भरना पड़ता है। मान लीजिए आप किसी ऐसी मल्टि नेशनल कंपनी में काम करते हैं, जिसके शेयर्स विदेशी शेयर बाजार में लिस्टेड हो और आपको इम्प्लॉई कम्पेंसेशन स्कीम के अंतर्गत शेयर्स का भुगतान होता है, तो इस केस में आपको अपने टैक्स रिटर्न आयकर विभाग को इसके बारे में सूचित करना होता है।

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