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उद्योगपति पवन रुइया, जिसने निगले रेलवे के कई प्रोजेक्ट

जेसप कारखाने में षड्यंत्र के तहत बार-बार आग लगवाने के आरोप में दिल्ली से गिरफ्तार उद्योगपति पवन रुइया पर कई और आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
Author कोलकाता | December 12, 2016 20:45 pm
रुईया समूह के अध्यक्ष पवन रुईया। (फाइल फोटो)

दमदम स्थित जेसप कारखाने में षड्यंत्र के तहत बार-बार आग लगवाने के आरोप में दिल्ली से गिरफ्तार उद्योगपति पवन रुइया पर कई और आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें रेलवे की ओर से 50 करोड़ रुपए की सामग्री का हिसाब नहीं देने के साथ ही उसकी परियोजनाओं को निगलना भी शामिल है। सीआइडी और रेलवे अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2012 में एसी कोच व इएमयू तैयार करने के लिए जेसप को रेलवे की ओर से 50 करोड़ रुपए मूल्य का कच्चा माल और मशीनरी देने की घोषणा हुई। समझौते के मुताबिक रेलवे ने भारी भरकम रकम का कच्चा माल भी दे दिया, लेकिन रुइया ने रेलवे को न तो एक भी कोच बनाकर दिया और न ही उसकी राशि लौटाई। वर्ष 2014-15 के दौरान रेलवे ने कई बार पत्र लिखकर कोच देने को लेकर जानकारी मांगी, लेकिन रुइया समूह की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इस बीच, दो बार कारखाने में आग लग गई। खबर पाकर मौके पर पहुंचे अग्निशमन मंत्री व कोलकाता के मेयर शोभन चटर्जी ने षड्यंत्र के तहत आग लगाने की आशंका जताई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीआइडी जांच का निर्देश दे दिया। जेसप के खिलाफ जांच की खबर पाते ही रेलवे भी सक्रिय हो गया और सीआइडी से संपर्क किया। इसके बाद बीते पांच नवंबर को रेलवे की एक टीम ने जेसप कारखाने का निरीक्षण किया, लेकिन वहां रेलवे द्वारा कोच तैयार करने के लिए दिए गए कच्चे माल का कोई निशान नहीं मिला। मशीनरी भी नदारद थी। इसके बाद रेलवे के स्टोर विभाग के कार्यकारी निदेशक ने पत्र लिखकर सीआइडी से रुइया के खिलाफ शिकायत की। साथ ही गत 26 नवंबर को दमदम थाने में धारा 406 व 409 के तहत एफआइआर भी दर्ज कराया गया।

वहीं, दमकल विभाग और दमदम थाने की ओर से भी अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया गया। जांच कर रही सीआइडी ने रुइया को पूछताछ के लिए भवानी भवन बुलाने के लिए अक्तूबर से नवंबर के बीच चार बार समन जारी किया, लेकिन हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर वह नहीं पहुंचे। सीआइडी द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी करने के बाद वह कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गए और वारंट रद्द करने की गुहार लगाई, लेकिन अदालत ने वारंट रद्द करने से मना कर दिया, हालांकि उन्हें राहत देते हुए सीआइडी को गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया और रुइया को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया, लेकिन अदालती निर्देश की अवमानना करते हुए रुइया ने सीआइडी की जांच में किसी तरह सहयोग नहीं किया। सीआइडी रुइया पर नकेल कसती गई। आग लगने की फॉरेंसिक जांच की गई, जिसमें पुष्टि हो गई कि आग लगी नहीं, बल्कि लगाई गई थी। इस बीच सीआइडी ने जेसप कारखाने के निदेशक और अकाउंटेंट को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही चोरी करने, चोरी का माल खरीदने और उसे ठिकाने लगाने के आरोप में करीब 20 लोगों को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया। सीआइडी के जांच अधिकारियों को विश्वास है कि चोरी और घोटालों के दस्तावेज छिपाने के लिए पवन रुइया के इशारे पर ही कारखाने में आग लगाई गई ताकि कोई राज खुल न जाए। सीआइडी का मानना है कि रुइया से पूछताछ के बाद कई रहस्यों से परदा उठ सकता है।

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