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केजी बेसिन ब्लॉक में जीएसपीसी की हिस्सेदारी खरीदने पर बात कर रही ओएनजीसी

शुरुआत में ओएनजीसी इस ब्लॉक में हिस्सेदारी खरीदने की इच्छुक नहीं थी क्योंकि उसका मानना था कि इस ब्लॉक में भंडार जीएसपीसी के दावे से कहीं कम है।
Author नई दिल्ली | September 10, 2016 20:28 pm
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी)

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के जी बेसिन ब्लॉक में जीएसपीसी की हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। कंपनी ने प्राकृतिक गैस भंडार के आकलन के लिए अमेरिकी सलाहकार कंपनी की नियुक्ति की है। ओएनजीसी के चेयरमेन एवं प्रबंध निदेशक डी के सर्राफ ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक के बाद शुक्रवार (9 सितंबर) को यहां संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने इससे पहले जीएसपीसी पर कभी बात नहीं की। लेकिन मुझे लगता है कि अब मैं इस पर बात कर सकता हूं। हम जीएसपीसी से दीनदयाल क्षेत्र में उनकी हिस्सेदारी का कुछ प्रतिशत खरीदने के लिए बातचीत कर रहे हैं। बातचीत चल रही है।’

केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही गुजरात सरकार की कंपनी जीएसपीसी कर्ज भुगतान में असफलता से बचने के लिए बंगाल की खाड़ी स्थित केजी-ओएसएन-2001-3 (दीनदयाल) ब्लॉक में अपनी बहुलांश हिस्सेदारी ओएनजीसी को बेचने की तैयारी कर रही है। शुरुआत में ओएनजीसी इस ब्लॉक में हिस्सेदारी खरीदने की इच्छुक नहीं थी क्योंकि उसका मानना था कि इस ब्लॉक में भंडार जीएसपीसी के दावे से कहीं कम है। हिस्सेदारी के लिए जो मूल्य मांगा जा रहा था, रिटर्न से मेल नहीं खाता है। उन्होंने कहा कि हमने फील्ड के आकलन के लिए तकनीकी सलाहकार राइडर एंड स्कॉट की नियुक्ति की है। हम इस क्षेत्र में कुछ प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए जीएसपीसी से बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें काफी ‘उल्लेखनीय’ निवेश करना होगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या इसके लिए किसी विदेशी भागीदारी को जोड़ा जाएगा, सर्राफ ने कहा कि अभी ऐसा नहीं है। सर्राफ ने यह भी कहा कि ऐसे समय जब विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम नीचे बने हुए हैं सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों की सब्सिडी में तेल उत्पादक कंपनियों के योगदान को लेकर स्पष्ट नीति की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘सरकार को सब्सिडी योगदान के बारे में स्पष्ट नीति की घोषणा करनी चाहिए, यह उपयुक्त समय है। इस समय तेल के दाम काफी नीचे हैं, एक सीमा तय होनी चाहिए, जिससे नीचे कच्चे तेल के दाम रहने पर तेल उत्पादक कंपनियों (अपस्ट्रीम) पर सब्सिडी का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।’ सर्राफ ने हालांकि, कच्चे तेल की दाम की सीमा नहीं बताई। उन्होंने केवल इतना कहा कि, ‘इस समय कच्चे तेल के दाम इस सीमा से काफी नीचे हैं।’ मूल्य सीमा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह सीमा अभी तय की जानी है।

ओएनजीसी सहित ऑयल और गेल ने वित्त वर्ष 2015-16 में पेट्रोलयम सब्सिडी में कुल 1,980 करोड़ रुपए का योगदान किया था जिसमें ओएनजीसी का हिस्सा 1,096 करोड़ रुपए रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष में इन कंपनियों ने कुल 42,822 करोड़ रुपए की सब्सिडी सहायता उपलब्ध कराई जिसमें ओएनजीसी ने 36,300 करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि की भरपाई की। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम की चाल के बारे में पूछे जाने पर ओएनजीसी चेयरमैन ने कहा कि इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। फिर भी अगले छह से एक साल के भीतर इसमें थोड़ी मजबूती आ सकती है। ऐसा अनुमान है। उन्होंने कहा, ‘कच्चे तेल के दाम को लेकर विश्वास काफी कम है, कोई भी इसकी भविष्यवाणी करने की स्थिति में नहीं है।’

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